ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोला जा सकता है, लेकिन इसके लिए एकमात्र शर्त यह है कि अमेरिका ईरान की सभी सात शर्तों को पूरी तरह स्वीकार करे। साथ ही, उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि इस जलमार्ग में किसी भी प्रकार का दुस्साहस या नया हमला करने का प्रयास किया गया, तो यह रास्ता हमेशा के लिए बंद हो जाएगा।
शीर्ष नेतृत्व के निर्देश और सैन्य तैयारी
हाल ही में ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई और वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। इस बैठक का हवाला देते हुए ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने बताया कि शीर्ष नेतृत्व ने क्षेत्रीय घटनाक्रमों और देश की सैन्य तैयारियों को लेकर कई महत्वपूर्ण रणनीतिक निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में सेना को हर वक्त युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रखने, शत्रु की किसी भी आक्रामकता का तत्काल और मुंहतोड़ जवाब देने तथा ऐसा प्रभावी पलटवार करने पर जोर दिया गया है जिससे विरोधी भविष्य में किसी भी हमले से पहले गहराई से सोचे।
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी संपत्तियों को बनाया जा सकता है निशाना
ईरानी सेना के प्रवक्ता ने यह भी साफ कर दिया है कि अमेरिकी सैन्य अड्डे और सेनाएं केवल पश्चिम एशिया तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे इस क्षेत्र के बाहर भी मौजूद हैं। ऐसी परिस्थितियों में यदि कोई भी आक्रामक कदम उठाया जाता है, तो ईरान के सशस्त्र बल अमेरिका की तमाम संपत्तियों और संसाधनों को बिना किसी भौगोलिक सीमा के अपने संभावित सैन्य लक्ष्य के रूप में देखेंगे और उन पर कार्रवाई कर सकते हैं।
ईरान की सात प्रमुख शर्तें
ईरान ने अमेरिका के सामने जो सात शर्तें रखी हैं, उनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल हैं
- आर्थिक प्रतिबंध: अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए तमाम आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह से समाप्त किया जाए।
- रोकी गई संपत्ति: दूसरे देशों के विभिन्न बैंकों में जमा ईरान की रोई गई और अटकी हुई संपत्ति को वापस किया जाए।
- नुकसान की भरपाई: युद्ध के दौरान ईरान के ठिकानों, बुनियादी ढांचे और अन्य संपत्तियों को जो भी नुकसान पहुंचा है, अमेरिका उसकी पूरी भरपाई करे।
- समुद्री कारोबार: बंदरगाहों और समुद्री व्यापार पर अमेरिका की तरफ से लगाई गई सभी प्रकार की रोक और पाबंदियां हटाई जाएं।
- तेल कारोबार: ईरान के तेल व्यापार पर लागू की गई पाबंदियों को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।
- सैन्य कार्रवाई बंद हो: अमेरिका और इजरायल दोनों ही ईरान के साथ-साथ क्षेत्र में उसके सहयोगी संगठनों के खिलाफ भी सैन्य कार्रवाई बंद करें।
- सैन्य मौजूदगी: अमेरिका पश्चिम एशिया क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को कम करे।
परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा के लिए तेहरान की रजामंदी
इन कड़े रुख के बीच ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करने की इच्छा भी जाहिर की है। परमाणु मामले पश्चिम एशिया के उस संघर्ष में एक बड़ी अड़चन बने हुए हैं जिसमें अमेरिका भी प्रत्यक्ष रूप से शामिल है। कतर इस पूरे संघर्ष में दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और कतर की ओर से पेश किए गए प्रस्तावों पर तेहरान गंभीरता से विचार कर रहा है। यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अधिक पारदर्शिता और खुलापन दिखाने के लिए राजी हो जाता है, तो इससे लंबे समय से रुकी पड़ी शांति वार्ता को एक नई दिशा और गति मिल सकती है।
























