दुनिया के एक छोर पर लोग जहां कड़ाके की ठंड और सर्दियों के स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं दूसरे छोर पर एक ऐसा देश भी है जहां वसंत के मौसम में आसमान से बर्फ बरसने लगी है। ऑस्ट्रेलिया में नवंबर के इस दौर में एक बेहद अनोखा और चौंकाने वाला मौसमी बदलाव देखा गया है। देश के विभिन्न पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों में अचानक से पारा लुढ़क गया और चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। न्यू साउथ वेल्स, विक्टोरिया और तस्मानिया के कई हिस्से इस अचानक आए बर्फीले तूफान की चपेट में आ गए। थ्रेडबो, पेरिशर और माउंट हॉथम जैसे पर्यटन स्थलों पर जमकर बर्फबारी हुई, जबकि तस्मानिया की राजधानी होबार्ट के पास स्थित कुनानयी यानी माउंट वेलिंगटन भी पूरी तरह बर्फ से ढक गया। दक्षिणी गोलार्ध में स्थित होने के कारण नवंबर का यह महीना ऑस्ट्रेलिया में वसंत ऋतु का होता है, जब सामान्य तौर पर ठंड विदा ले रही होती है और गर्मियों की आहट शुरू हो जाती है। लेकिन इस बार मौसम ने पूरी तरह से करवट ली और लोगों को अचानक से कड़ाके की ठंड का अहसास होने लगा।
अंटार्कटिका की हवाओं ने बदला मौसम का मिजाज
मौसम विभाग के आंकड़ों और रिपोर्ट्स के अनुसार, इस असामान्य ठंड और बर्फबारी के पीछे मुख्य वजह अंटार्कटिका की तरफ से उत्तर दिशा की ओर बढ़ी बर्फीली हवाएं हैं। दक्षिण-पश्चिमी हवाओं ने इस ठंड के असर को और ज्यादा गहरा कर दिया, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। आलम यह रहा कि लोगों को थर्मामीटर में दर्ज तापमान से कहीं अधिक कंपकंपी महसूस हुई। शनिवार दोपहर तक एडिलेड, मेलबर्न, होबार्ट, कैनबरा और सिडनी जैसे प्रमुख शहरों में महसूस किया जाने वाला तापमान तेरह डिग्री सेल्सियस से भी नीचे रिकॉर्ड किया गया। उदाहरण के लिए, एडिलेड में भले ही वास्तविक तापमान सत्रह दशमलव पांच डिग्री सेल्सियस था, लेकिन तेज और सर्द हवाओं के कारण वह बारह दशमलव तीन डिग्री जैसा महसूस हो रहा था। इसी तरह कैनबरा में अधिकतम तापमान बारह दशमलव नौ डिग्री दर्ज किया गया, लेकिन वहां के बाशिंदों को पांच दशमलव तीन डिग्री जैसी कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा।
तस्मानिया में ओलावृष्टि और सोशल मीडिया पर चर्चा
इस अजीबोगरीब मौसम की मार सिर्फ पर्वतीय इलाकों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि तस्मानिया में भारी बारिश के साथ जबरदस्त ओलावृष्टि भी देखने को मिली। किंग्सटन बीच ओवल का पूरा खेल मैदान सफेद ओलों की चादर से ऐसा ढका कि किसी बर्फीले मैदान का भ्रम होने लगा। स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों ने इस अनोखे मौसम के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जमकर साझा किए, जो तेजी से वायरल हो गए। थ्रेडबो में काम करने वाली मैडलीन मैकवी ने इस घटना को वसंत के मौसम में ऑस्ट्रेलिया का बेहद हैरान करने वाला नजारा करार दिया। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि यह पहली बार नहीं हुआ है कि नवंबर के महीने में इन इलाकों में बर्फ गिरी हो, क्योंकि इससे पहले नवंबर 2022 में भी इसी तरह की बेमौसम बर्फबारी दर्ज की जा चुकी है।
क्यों होती है भारत और ऑस्ट्रेलिया में मौसम की उलटी चाल
ऑस्ट्रेलिया में नवंबर के महीने में बर्फबारी के इस विज्ञान को समझने के लिए पृथ्वी की भौगोलिक बनावट और ऋतुओं के चक्र को गहराई से जानना आवश्यक है। हमारी पृथ्वी अपनी धुरी पर करीब तेईस दशमलव पांच डिग्री झुकी हुई है, और इसी झुकाव के कारण वर्ष के अलग-अलग समय में ग्रह के दोनों गोलार्धों को सूर्य की किरणें अलग मात्रा और कोण में मिलती हैं। पृथ्वी के ऊपरी हिस्से को उत्तरी गोलार्ध और निचले हिस्से को दक्षिणी गोलार्ध कहा जाता है। भारत, अमेरिका और यूरोप जैसे देश उत्तरी गोलार्ध का हिस्सा हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका दक्षिणी गोलार्ध के अंतर्गत आते हैं। जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की तरफ झुका होता है, तब वहां ग्रीष्म ऋतु होती है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध सूर्य से अपेक्षाकृत दूर झुका होने के कारण शीत ऋतु का अनुभव करता है। इसके लगभग छह महीने बाद यह स्थिति बिल्कुल उलट जाती है। यही कारण है कि जब भारत में जून और जुलाई के महीनों में भीषण गर्मी और मानसून का दौर होता है, तब ऑस्ट्रेलिया में कड़ाके की ठंड पड़ रही होती है। इसके विपरीत, जब दिसंबर और जनवरी में भारत वासी ठंड से ठिठुर रहे होते हैं, तब ऑस्ट्रेलिया में सूरज की तपिश के साथ गर्मियों का मौसम अपने चरम पर होता है।
आने वाले दिनों में भीषण गर्मी का अंदेशा
इस नवंबर की ठंड और बर्फबारी के बीच ऑस्ट्रेलिया के सामने आने वाले गर्मियों के मौसम को लेकर एक गंभीर चिंता भी मंडरा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह इस साल का आखिरी बड़ा शीतलहर का दौर साबित हो सकता है, लेकिन इसके बाद स्थिति पूरी तरह बदलने वाली है। मौसम विज्ञान से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों और संयुक्त राष्ट्र ने आने वाले समय में शक्तिशाली अल नीनो के खतरनाक प्रभावों को लेकर चेतावनी जारी की है। अल नीनो दरअसल प्रशांत महासागर के समुद्री तापमान में होने वाला एक ऐसा बड़ा बदलाव है, जो पूरी दुनिया के मौसम के चक्र को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। इसके प्रत्यक्ष प्रभाव के रूप में दक्षिणी गोलार्ध के कई हिस्सों में आगामी गर्मियों के दौरान सामान्य से कहीं अधिक तापमान और सूखे की स्थिति पैदा होने की आशंका जताई गई है। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी अफ्रीका में आने वाले महीनों में अत्यधिक गर्म और शुष्क मौसम रहने का अनुमान है, जिससे कृषि संकट और जंगलों में भीषण आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि नवंबर महीने की यह अचानक बर्फबारी और आने वाले महीनों में संभावित भीषण गर्मी को एक ही मौसमी घटना के दो अलग पहलू नहीं समझना चाहिए, क्योंकि दोनों के पीछे पूरी तरह से भिन्न मौसमी प्रक्रियाएं और कारक काम कर रहे हैं।


















