जेईई मेन 2027 परीक्षा में शामिल होने की योजना बना रहे अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही प्रशासनिक तैयारियां पूरी करना बेहद आवश्यक हो गया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा हालांकि अभी तक आगामी परीक्षा के लिए आधिकारिक अधिसूचना या पंजीकरण की तिथियों की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पिछले सत्रों के अनुभवों से सीख लेते हुए छात्रों को अपने पहचान पत्र और शैक्षणिक कागजातों का पुनरीक्षण अभी से शुरू कर देना चाहिए। आवेदन पोर्टल खुलने से पूर्व ही दस्तावेजों की जांच कर लेने से अंतिम समय में पैदा होने वाली प्रशासनिक दिक्कतों और तनाव से आसानी से बचा जा सकता है।
दस्तावेजों में स्पेलिंग और जन्मतिथि की गड़बड़ी पड़ सकती है भारी
अभ्यर्थी अक्सर जल्दबाजी में ऑनलाइन आवेदन पत्र भरते समय 10वीं के अंकपत्र और आधार कार्ड में दर्ज व्यक्तिगत विवरणों के अंतर को अनदेखा कर देते हैं। नाम की स्पेलिंग, पिता के नाम, उपनाम या जन्मतिथि में मामूली सा फर्क भी फॉर्म निरस्त होने या परीक्षा केंद्र पर प्रवेश से वंचित होने का मुख्य कारण बन सकता है। पंजीकरण के समय 10वीं के सर्टिफिकेट को प्राथमिक जन्मतिथि प्रमाण पत्र के रूप में स्वीकार किया जाता है। यदि इस मार्कशीट के विवरण आधार कार्ड से मेल नहीं खाते हैं, तो आधार आधारित सत्यापन प्रणाली आवेदन को स्वतः ही खारिज कर सकती है। इसके अलावा यदि पहचान पत्र पर बचपन की पुरानी तस्वीर मौजूद है, तो उसे तत्काल नई तस्वीर के साथ अद्यतन करवा लेना चाहिए।
लाइव फोटो कैप्चर और बायोमेट्रिक सत्यापन के सख्त नियम
देश की सबसे पारदर्शी और कठिन परीक्षाओं में शामिल जेईई मेन में किसी भी तरह के फर्जीवाड़े या छद्म रूप धारण करने की घटनाओं को रोकने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने सत्यापन व्यवस्था को अत्यधिक सख्त बना दिया है। पिछले सत्रों की भांति रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर ऑनलाइन फॉर्म भरते समय वेबकैम के जरिए अभ्यर्थी की लाइव फोटो ली जाती है। यह लाइव चेहरा, अपलोड की गई पासपोर्ट साइज फोटो और प्रस्तुत किए गए पहचान पत्र से डिजिटल रूप से मिलाया जाता है। यदि उंगलियों के निशान यानी बायोमेट्रिक डेटा या तस्वीरों में जरा सा भी अंतर मिलता है, तो डिजिटल सत्यापन की प्रक्रिया बीच में ही अटक जाती है।
आरक्षण एवं श्रेणी प्रमाण पत्रों का अद्यतन होना अनिवार्य
प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन करते समय विभिन्न वर्गों के अभ्यर्थियों को अपने आरक्षण से संबंधित वैध कागजात भी तैयार रखने होंगे। ईडब्ल्यूएस, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (नॉन-क्रीमी लेयर) के आवेदकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वर्ग या जाति प्रमाण पत्र निर्धारित सरकारी नियमों के अनुसार बना हो और उसकी वैधता अवधि सही हो। इसके अतिरिक्त दिव्यांगता कोटे का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों के पास मान्यता प्राप्त अधिकृत संस्थान द्वारा जारी वैध दिव्यांगता प्रमाण पत्र या यूडीआईडी कार्ड होना अनिवार्य है। फॉर्म भरते समय सर्वर डाउन होने जैसी तकनीकी बाधाओं से बचने के लिए हस्ताक्षर और नवीनतम फोटो की साफ-सुथरी स्कैन्ड प्रतियां पहले से बनाकर रखनी चाहिए।
सुधार प्रक्रिया में लगने वाले समय को ध्यान में रखकर तुरंत लें एक्शन
आधार कार्ड या अन्य किसी शैक्षणिक दस्तावेज में पाई गई गड़बड़ी को ठीक कराने की प्रक्रिया में समय लगता है। यूआईडीएआई अथवा संबंधित स्कूल बोर्ड के माध्यम से नाम, जन्मतिथि या फोटो में सुधार करवाने में आमतौर पर 15 से 30 दिनों का समय लग जाता है। यदि छात्र आधिकारिक अधिसूचना जारी होने का इंतजार करते रहेंगे, तो अंतिम तिथि के करीब सुधार कराने का समय नहीं मिलेगा। इसी वजह से अभ्यर्थियों को आज ही अपने सभी मूल कागजात और पहचान पत्रों का आपस में क्रॉस-चेक कर लेना चाहिए ताकि किसी भी त्रुटि को समय रहते सुधारा जा सके।



















