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बिना मानवीय नियंत्रण के फैसले लेने वाले मैलवेयर का खुलासा, चार एआई मॉडल्स की मदद से चलाता है साइबर अटैकएआई
22 सित॰ 2026, 4:20 pm (39 मिनट पहले)· 0

बिना मानवीय नियंत्रण के फैसले लेने वाले मैलवेयर का खुलासा, चार एआई मॉडल्स की मदद से चलाता है साइबर अटैक

सिस्को टालोस के शोधकर्ताओं ने केयर्न फ्रेमवर्क के जरिए क्लोज्डकोरम नामक स्वायत्त मैलवेयर की पहचान की है, जो चार अलग-अलग एआई मॉडल्स की सर्वसम्मति से हमले की रणनीति तय करता है।

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व और खतरनाक बदलाव सामने आया है, जहाँ मैलवेयर हमलों को अंजाम देने के लिए अब इंसानी ऑपरेटरों की सीधी निगरानी की जरूरत खत्म होती जा रही है। सुरक्षा विश्लेषकों ने एक नए निगरानी फ्रेमवर्क के जरिए ऐसे स्वायत्त हैकिंग टूल का पता लगाया है, जो किसी भी लक्षित सिस्टम में घुसपैठ के बाद अपने अगले कदम खुद तय करता है। इस टूल को क्लोज्डकोरम नाम दिया गया है, जो किसी भी निर्देश के लिए इंसानी हैंडलर के बजाय चार अलग-अलग बड़े भाषा मॉडल्स से संपर्क साधता है और उनसे मिली सर्वसम्मति के आधार पर आगे बढ़ता है। इस मैलवेयर का विश्लेषण करने के लिए विशेषज्ञों ने एक खास विश्लेषण ढांचा तैयार किया है जिसे कॉग्निटिव आर्टिफैक्ट इंटेलिजेंस रिसर्च नेटवर्क या केयर्न नाम दिया गया है।

केयर्न फ्रेमवर्क और तकनीकी सुरागों की पहचान

केयर्न नाम पर्वतारोहियों और ट्रेकर्स द्वारा रास्तों पर पत्थरों के बनाए गए उस ढेर से प्रेरित है, जिसका उपयोग सही दिशा दर्शाने के लिए किया जाता है। सिस्को टालोस में सुरक्षा शोधकर्ता और केयर्न के विकास का नेतृत्व करने वाले रयान फेटरमैन के अनुसार, जब कोई साइबर हमलावर सॉफ्टवेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जोड़ता है, तो उसके कुछ तकनीकी अवशेष या डिजिटल फिंगरप्रिंट पीछे छूट जाते हैं। यह फ्रेमवर्क फाइलों के मेटाडेटा से एआई एकीकरण के विशिष्ट लक्षणों को पहचानता है और प्रत्येक संदिग्ध नमूने को एक यूनिक आईडी देकर वर्गीकृत करता है।

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फेटरमैन का मानना है कि ऐसे संकेतों से सुरक्षा समुदाय को यह समझने में भारी मदद मिलती है कि हमलावर किस तरह के नए प्रयोग कर रहे हैं। रक्षात्मक नेटवर्क के लिए यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि एआई सिस्टम के जरिए किस तरह के अप्रत्याशित व्यवहार उभर रहे हैं, खासकर तब जब ये तकनीकें मुख्यधारा के हमलों का हिस्सा बनने लगी हैं। इस सिस्टम की मदद से पिछले कुछ महीनों में लगभग 20 अतिरिक्त ऐसे मैलवेयर नमूनों की पहचान की गई है जिनमें एआई घटकों को शामिल किया गया था।

लैमहग से लेकर क्लोज्डकोरम तक का सफर

मैलवेयर में एआई के उपयोग का यह सिलसिला बिल्कुल नया नहीं है। जुलाई 2025 में यूक्रेन की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा प्रतिक्रिया इकाई सीईआरटी-यूए ने लैमहग नामक मैलवेयर का उपयोग करने वाले एक फिशिंग अभियान की चेतावनी जारी की थी। वह विशेष मैलवेयर हगिंग फेस एपीआई के माध्यम से क्वेन2.5-कोडर-32बी-इंस्ट्रक्ट नामक एलएलएम से निर्देश प्राप्त करता था। उस समय सुरक्षा विशेषज्ञों को यह अंदेशा था कि बहुत जल्द एआई संचालित मैलवेयर की एक बड़ी बाढ़ देखने को मिलेगी और साइबर हमलों का पूरा परिदृश्य ही बदल जाएगा।

हालांकि, एक साल बाद इस गर्मी में जब फेटरमैन ने एआई युक्त मैलवेयर का अध्ययन किया, तो उन्हें केवल नौ नामित मैलवेयर परिवार ही मिले, जिनमें से कुछ केवल अनुसंधान के लिए बनाए गए कॉन्सेप्ट प्रोटोटाइप थे। इस अप्रत्याशित कमी ने उन्हें और अधिक गहराई से पड़ताल करने के लिए प्रेरित किया। केयर्न के विस्तृत विश्लेषण ने साबित कर दिया कि पर्दे के पीछे साइबर हमलावरों की गतिविधियां सार्वजनिक चर्चाओं की तुलना में कहीं अधिक जटिल और व्यापक हैं।

चार एआई मॉडल्स की सर्वसम्मति पर आधारित हमला

हाल ही में पहचाना गया क्लोज्डकोरम विशेष रूप से विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम को निशाना बनाने वाला मैलवेयर है। किसी भी सिस्टम में प्रवेश करने के बाद यह सॉफ्टवेयर डीपसीक, क्वेन, मिस्ट्रल और गूगल जेमिनी जैसे चार प्रमुख मॉडल्स से लगातार राय लेता है। यह प्रणाली इन सभी प्लेटफॉर्म्स से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं का मिलान करती है और जब मॉडल्स के बीच सहमति बन जाती है, तभी आगे की कार्रवाई शुरू करती है। यदि इनमें से कोई एक मॉडल या सेवा अस्थायी रूप से बंद भी हो जाए, तो भी यह बाकी सक्रिय सेवाओं से तालमेल बनाए रखता है।

इस बहु-स्तरीय बैकअप के कारण मैलवेयर का कमांड-एंड-कंट्रोल पूरी तरह स्वायत्त और बंद व्यवस्था बन जाता है, जहाँ इंसानी हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं बचती। जांचकर्ताओं ने पाया कि इस कोड के तार 2025 से क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी से जुड़े साइबर अपराध मंचों से जुड़े हुए हैं। इस सॉफ्टवेयर का मुख्य उद्देश्य उपयोगकर्ताओं के लॉगिन क्रेडेंशियल्स और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े डेटा की चोरी करना है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह स्पष्ट किया है कि वे इस बात की पुष्टि नहीं कर सके हैं कि इसे किसने विकसित किया है या वास्तविक हमलों में इसका वास्तविक उपयोग हुआ है या नहीं।

साइबर हमलों के संचालन का नया युग

सिस्को टालोस में थ्रेट इंटेलिजेंस के वरिष्ठ निदेशक मैट ओल्नी ने इस तकनीकी विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शुरुआत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल एक उत्पादकता उपकरण के रूप में देखा गया था, लेकिन अब इसका उपयोग साइबर हमलों के बुनियादी ढांचे को सक्रिय रूप से चलाने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह बदलाव हमलावरों को एक साथ कई मोर्चों पर हमले करने, अधिक सिस्टम्स को निशाना बनाने और विभिन्न प्रकार के कंप्यूटर्स को नियंत्रित करने की शक्ति देता है, क्योंकि उनके बैकएंड में एक बुद्धिमान प्रणाली लगातार सवालों का विश्लेषण कर सटीक जवाब दे रही होती है।

सवाल-जवाब

क्लोज्डकोरम क्या है?
यह विंडोज आधारित मैलवेयर है जो इंसानी निर्देश के बिना चार अलग-अलग एआई मॉडल्स से सलाह लेकर अपने अगले कदम तय करता है।
यह मैलवेयर किन चार एआई मॉडल्स की मदद लेता है?
यह मैलवेयर अपने निर्णय लेने के लिए डीपसीक, क्वेन, मिस्ट्रल और गूगल जेमिनी से राय मांगता है।
केयर्न फ्रेमवर्क क्या काम करता है?
केयर्न फाइलों के मेटाडेटा से एआई एकीकरण के तकनीकी लक्षणों को पहचानकर संदिग्ध मैलवेयर नमूनों को ट्रैक और वर्गीकृत करता है।
क्लोज्डकोरम का मुख्य मकसद क्या है?
इस मैलवेयर का मुख्य उद्देश्य सिस्टम से लॉगिन क्रेडेंशियल्स और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा डेटा चुराना है।
क्या इस मैलवेयर के पीछे के डेवलपर की पहचान हो सकी है?
शोधकर्ताओं ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि इसे किसने विकसित किया है या इसका वास्तविक हमलों में उपयोग हुआ है।
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