जब से चैटजीपीटी बाजार में आया है, तब से AI बनाने वाली कंपनियां खुद ही चेतावनी देती रही हैं कि यह तकनीक लाखों नौकरियां खत्म कर सकती है। अब कैलिफोर्निया यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या ये आशंकाएं सच में हकीकत बनने लगी हैं।
गुरुवार को कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम ने एक ऐसा कदम उठाया जिसे राज्य देश का पहला 'AI बेरोजगारी ट्रैकर' बता रहा है। यह एक सार्वजनिक डैशबोर्ड है, जिसका मकसद यह नजर रखना है कि कहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से राज्य में नौकरियां तो नहीं जा रहीं। न्यूसम के नेतृत्व में कैलिफोर्निया लगातार AI से जुड़ी नीतियां गढ़ने की दिशा में बढ़ रहा है, और न्यूसम को 2028 के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद का संभावित दावेदार माना जा रहा है।
न्यूसम ने एक्स पर लिखा, "AI को लेकर देश के पहले कार्यकारी आदेश के तहत मेरे प्रशासन ने अभी एक डैशबोर्ड शुरू किया है, जो AI की वजह से होने वाले नौकरी नुकसान के संकेतों पर नजर रखेगा और प्रभावित होने वाले कामगारों की बेहतर मदद करेगा।" उन्होंने आगे लिखा, "कैलिफोर्निया इस उभरती तकनीक को सिर्फ किनारे खड़े होकर नहीं देखेगा, बल्कि हम कदम उठाएंगे।"
यह डैशबोर्ड काम कैसे करेगा
इस डैशबोर्ड को कैलिफोर्निया एम्प्लॉयमेंट डेवलपमेंट डिपार्टमेंट और कैलिफोर्निया पॉलिसी लैब के UCLA केंद्र के शोधकर्ताओं ने मिलकर तैयार किया है। यह हर महीने अपडेट होगा और उन पेशों में बेरोजगारी के दावों पर नजर रखेगा, जिन्हें AI के असर के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है। राज्य के अधिकारियों का कहना है कि इस डेटा से यह समझने में मदद मिलेगी कि किन कामगारों को दोबारा ट्रेनिंग, नौकरी ढूंढने में सहायता, स्वास्थ्य बीमा संबंधी मार्गदर्शन या किसी और तरह की मदद की जरूरत है।
UCLA में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर और कैलिफोर्निया पॉलिसी लैब के UCLA केंद्र के फैकल्टी डायरेक्टर टिल वॉन वाक्टर ने एक बयान में कहा, "AI तेजी से आगे बढ़ रहा है, और अपनी नौकरियों को लेकर कामगारों की चिंताएं बिल्कुल वाजिब हैं। यह नया ट्रैकर अटकलों की जगह ठोस सबूत रखता है, जिससे हमें साफ तौर पर समझ आएगा कि क्या बदल रहा है और प्रभावित कामगारों की सबसे बेहतर मदद कैसे की जाए।"
देशभर में बदल रहा है रवैया
यह कदम दिखाता है कि नीति बनाने वाले लोग AI को लेकर अपना नजरिया बदल रहे हैं। वर्मोंट के सीनेटर बर्नी सैंडर्स AI की वजह से जाने वाली नौकरियों पर बार-बार खतरे की घंटी बजाते रहे हैं। वहीं मिसौरी के रिपब्लिकन सीनेटर जॉश हॉली ने अक्टूबर में एक द्विदलीय विधेयक पेश किया, जिसमें कंपनियों के लिए AI से जुड़ी छंटनी की जानकारी देना जरूरी किया गया है। अप्रैल में न्यूयॉर्क असेंबली के सदस्य एलेक्स बोरेस ने AI की वजह से नौकरियां जाने से जुड़ा एक 'AI डिविडेंड' देने का प्रस्ताव रखा था।
क्या कह रहा है अब तक का डेटा
फिलहाल कैलिफोर्निया का डेटा बताता है कि AI की वजह से छंटनी की जिस बड़ी लहर का डर था, वह अभी नहीं आई है। शोधकर्ताओं को राज्यभर में AI से जुड़ी बेरोजगारी बढ़ने का कोई सबूत नहीं मिला। हालांकि उन्होंने यह जरूर पाया कि 2022 में चैटजीपीटी-3.5 के आने के बाद, AI के असर वाले पेशों में काम करने वाले कॉलेज पढ़े-लिखे कामगारों के बीच बेरोजगारी के दावे ज्यादा रहे, खासकर सैन फ्रांसिस्को बे एरिया में।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब AI की वजह से नौकरियां जाने की चिंता लगातार बढ़ रही है। जनवरी में एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई ने चेतावनी दी थी कि AI अगले पांच साल में शुरुआती स्तर की आधी व्हाइट-कॉलर नौकरियों तक को खत्म कर सकता है। इसके बाद से अर्थशास्त्री अपनी उस पुरानी धारणा को बदलने लगे हैं कि AI कामगारों की जगह लेने के बजाय उनकी मदद ज्यादा करेगा। अप्रैल में फेडरल रिजर्व के एक अध्ययन में पाया गया कि चैटजीपीटी के आने के बाद अमेरिका में प्रोग्रामर की नौकरियों की बढ़ोतरी करीब 50% तक गिर गई। यह अब तक का सबसे मजबूत सबूत है कि जेनरेटिव AI ज्यादा असर झेलने वाले पेशों में भर्ती को प्रभावित कर रहा है।













