ओपनएआई या एंथ्रोपिक जैसी दिग्गज कंपनियों द्वारा बनाए गए अथवा ओपन-सोर्स आर्किटेक्चर पर तैयार मौजूदा एआई मॉडल्स में एक बुनियादी कमी देखने को मिलती है। अतिरिक्त ट्रेनिंग के बिना ये सिस्टम अपनी पिछली गलतियों से सबक नहीं सीख पाते। कानून और वित्त जैसे जटिल क्षेत्रों में काम करने वाले संस्थानों को जब सामान्य मॉडल्स को अपने अनुकूल बनाना होता है, तब उन्हें आमतौर पर मॉडल्स की फाइन-ट्यूनिंग का सहारा लेना पड़ता है। इस पूरी कवायद में या तो इन-हाउस रिसर्चर्स की भारी-भरकम टीम खड़ी करनी पड़ती है या फिर फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स कहे जाने वाले महंगे सलाहकारों पर निर्भर रहना पड़ता है।
इसी तकनीकी अड़चन को खत्म करने के मकसद से करीब एक साल पहले ट्रेजेक्टरी की शुरुआत हुई थी। स्टैनफोर्ड के तीन सहपाठियों द्वारा स्थापित यह स्टार्टअप पूरी प्रक्रिया को ऑटोमैटिक बनाने पर काम कर रहा है, जिससे एआई मॉडल्स मानवीय फीडबैक के आधार पर अपनी कमियों को सुधार सकें और विशिष्ट दायित्वों में निरंतर दक्ष बन सकें। मात्र 18 सदस्यों वाली इस कंपनी ने सिकोइया के नेतृत्व में सीरीज ए राउंड में 4.5 करोड़ डॉलर का निवेश जुटाया है, जिसमें कंपनी का मूल्यांकन 30 करोड़ डॉलर आंका गया है। इस फंडिंग राउंड में एनवीडिया, बेसेमर वेंचर पार्टनर्स और बेन कैपिटल वेंचर्स ने भी हिस्सा लिया है।
फाउंडेशनल मॉडल्स और कार्यक्षेत्र के अनुभव का अंतर
ट्रेजेक्टरी के सह-संस्थापक रौनक माल्दे ने मौजूदा फाउंडेशनल मॉडल्स की तुलना एक ऐसे बेहद मेधावी पीएचडी छात्र से की है जो हर बार किसी नई नौकरी की शुरुआत कर रहा हो। माल्दे का कहना है कि इसके विपरीत आर्थिक व्यवस्था में उस पेशेवर की असली कद्र होती है जिसके पास उस काम का 30 साल का लंबा अनुभव हो। स्टार्टअप का यह प्रयास इसी खाई को पाटने के लिए कंटीन्यूअल लर्निंग यानी सतत शिक्षण पद्धति पर आधारित है।
इस तकनीक के तहत कारोबारी संस्थान किसी भी ओपन-सोर्स एआई मॉडल से शुरुआत कर सकते हैं और ट्रेजेक्टरी के प्लेटफॉर्म को अपने सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों से जोड़ सकते हैं। यह प्लेटफॉर्म इस बात का फीडबैक जुटाता रहता है कि मॉडल वास्तविक कामकाज में कैसा प्रदर्शन कर रहा है। इसके बाद ट्रेजेक्टरी उसी सूचना का इस्तेमाल मॉडल को दोबारा री-ट्रेन करने के लिए करती है, जिससे समय बीतने के साथ-साथ मॉडल जटिल और तकनीकी कार्यों में ज्यादा सटीक परिणाम देने लगता है।
गैर-तकनीकी विशेषज्ञों के हाथों में मॉडल सुधारने की कमान
इस नई व्यवस्था से वकील, डॉक्टर और दूसरे क्षेत्रों के विशेषज्ञ बिना किसी इंजीनियर के खुद ही मॉडल्स के प्रदर्शन को लगभग स्वचालित तरीके से बेहतर बना सकते हैं। यह क्षमता किसी भी संगठन के लिए विशेष एआई तैनात करने की लागत को घटाती है और काम की गति को तेज करती है। हार्वे और रोगो जैसी कंपनियां पहले से ही ओपन-सोर्स मॉडल्स की पोस्ट-ट्रेनिंग के लिए ट्रेजेक्टरी का उपयोग कर रही हैं।
इस प्रक्रिया की मदद से मॉडल्स किसी अनुभवी वकील या वित्तीय विश्लेषक की भांति निर्णय लेने में सक्षम हो रहे हैं। वे पुराने कामकाज से सीखते हैं, जैसे किसी विशेष कानूनी अनुबंध की समीक्षा करना या तय पद्धति से किसी कंपनी का मूल्यांकन करना। ट्रेजेक्टरी के ग्राहकों की सूची में डेकागन, मर्कोर और एनवीडिया भी शामिल हैं। अब स्टार्टअप ने अपने पोस्ट-ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध करा दिया है। माल्दे के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले लोग खुद तय करते हैं कि उनके संगठन के लिए सबसे बेहतर मानक क्या हैं और वे उसे अपने मॉडल के सुधार में बदल सकते हैं।
सुरक्षा के साथ स्व-सुधार और बढ़ती प्रतिस्पर्धा
कंटीन्यूअल लर्निंग की यह अवधारणा काफी हद तक रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट से मिलती-जुलती है, जहां एआई प्रणालियां अपनी क्षमताओं को खुद बढ़ाती हैं। हालांकि सह-संस्थापक माइकल एलाबद का तर्क है कि ट्रेनिंग की प्रक्रिया में इंसानों की सीधी निगरानी बनाए रखना ज्यादा सुरक्षित रास्ता है, क्योंकि पूरी तरह से स्वायत्त स्व-सुधार अनचाहे या खतरनाक नतीजों को जन्म दे सकता है।
पोस्ट-ट्रेनिंग को सुगम और स्वचालित बनाने के इस मैदान में ट्रेजेक्टरी अकेली खिलाड़ी नहीं है। कंपनी के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं, जिनमें मीरा मुराती द्वारा स्थापित थिंकिंग मशीन्स लैब का नाम प्रमुख है, जो टिंकर प्लेटफॉर्म का संचालन करती है। इसके अलावा 3.25 अरब डॉलर के मूल्यांकन वाली एप्लाइड कंप्यूट और कंपनियों को अपने एजेंट तैयार करने में मदद करने वाली प्राइम इंटेलेक्ट भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।
माल्दे का मानना है कि कंपनी की सबसे मजबूत पूंजी उनकी टीम है। माल्दे उन चुनिंदा शोधकर्ताओं में शामिल थे जिन्हें गूगल डीपमाइंड ने विंडसर्फ से एक्वि-हायर किया था। एलाबद भी डीपमाइंड में काम कर चुके हैं, जबकि तीसरे सह-संस्थापक अर्जुन करणम ने पहले एप्पल में जनरेटिव फाउंडेशन मॉडल्स पर काम किया है। स्टार्टअप ने ओपनएआई, स्ट्राइप और नेटफ्लिक्स से भी रिसर्चर्स और प्रोडक्ट डिजाइनर्स को अपनी टीम में जोड़ा है। एआई ट्रेनिंग कंपनी में डिजाइन की अहमियत को रेखांकित करते हुए करणम बताते हैं कि उन्होंने ऐसा यूजर इंटरफेस विकसित किया है जो गैर-तकनीकी ग्राहकों के लिए पोस्ट-ट्रेनिंग की पूरी प्रक्रिया को सहज और आसान बना देता है।


















