अचानक पैदा होने वाले अनजाने हालात में कोई इंसान क्या कदम उठाएगा, क्या कोई कम्प्यूटर इसका सटीक अंदाज़ा पहले ही लगा सकता है? इज़राइली स्टार्टअप 42AI ने इंसानी सोच और फैसलों की संभावनाओं को मापने का दावा करने वाला एक खास बिहेवियरल वर्ल्ड मॉडल पेश किया है। स्टार्टअप ने तीन साल के गुप्त विकास चरण से बाहर आते ही 6.25 करोड़ डॉलर यानी 62.5 मिलियन डॉलर की शुरुआती सीड फंडिंग जुटाने का ऐलान किया है। वर्तमान में यह तकनीक कुछ चुनिंदा वित्तीय ब्रोकरेज कंपनियों में काम कर रही है, जहां बाज़ार के भारी उतार-चढ़ाव के बीच व्यक्तिगत ट्रेडर्स की हरकतों और प्रतिक्रियाओं को पहले से भांपने की कोशिश की जा रही है।
फैसले तय नहीं होते बल्कि संभावनाओं पर टिके होते हैं
इंसानी दिमाग की कार्यप्रणाली पर बात करते हुए 42AI के सीईओ और सह-संस्थापक अमित गाल-ओर ने समझाया कि इंसानी बर्ताव कभी भी पूरी तरह तयशुदा नहीं होता, बल्कि यह लगातार संभावनाओं यानी प्रोबेबिलिटी के दायरे में घटता है। इंसान की कुछ बुनियादी मनोवैज्ञानिक प्रवृत्तियां होती हैं जो हालात बदलने के बावजूद उसके फैसलों को प्रभावित करती रहती हैं। स्टार्टअप इसी अंदरूनी रुझान को मापकर ऐसे डेटा में तब्दील करता है जिसे मशीन लर्निंग मॉडल आसानी से समझ सके। सह-संस्थापक और सीटीओ एहुद एज्रा के मुताबिक, समय के साथ इंसान के अनुभव बदल सकते हैं लेकिन उसकी बुनियादी प्रवृत्तियां हमेशा एक तय प्रोबेबिलिटी या डिस्ट्रीब्यूशन के हिसाब से सामने आती हैं। यह सिस्टम किसी व्यक्ति के किसी खास फैसले तक पहुंचने की केवल संभावना को रेखांकित करता है।
पुराने रिकॉर्ड की नकल नहीं बल्कि अंदरूनी प्रेरणाओं की पड़ताल
पारंपरिक एल्गोरिद्म अक्सर पिछले लेन-देन या पुराने एक्शन की नकल करके आगे का अनुमान लगाते हैं, लेकिन 42AI का मॉडल इंसान की अंदरूनी प्रेरणाओं और मनोवैज्ञानिक रुझानों को समझने की कोशिश करता है। इसके लिए कंपनी उन गतिविधियों और प्रतिक्रियाओं का बारीकी से विश्लेषण करती है जो पहली नज़र में बिल्कुल असंबंधित लग सकती हैं। वित्तीय दुनिया में किसी ट्रेडर या निवेशक के लिए यह डेटा केवाईसी सत्यापन पूरा करने की रफ्तार, ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया, कस्टमर सपोर्ट पर की गई बातचीत, फंड ट्रांसफर के तरीके और शेयर ट्रेडिंग के समय से जुटाया जाता है।
शुरुआती चरण में जब कोई ग्राहक सेल्स या सपोर्ट टीम से संवाद करता है, तो सिस्टम बातचीत के टोन, आवाज के उतार-चढ़ाव, कॉल की संख्या और बातचीत के तौर-तरीकों जैसे कई संकेतों का अध्ययन करता है। यह सारा डेटा मॉडल में भेजा जाता है। इसके बाद जब वही ग्राहक बाज़ार में सक्रिय होकर शेयर खरीदता या बेचता है, तो सिस्टम उस समय के बाज़ार के मिज़ाज के साथ इन गतिविधियों का मिलान करता है। सीटीओ एहुद एज्रा के अनुसार, सिस्टम यह समझने की कोशिश करता है कि सामने वाला व्यक्ति बाहरी दुनिया को किस नज़रिए से देख रहा है। इस वर्ल्ड मॉडल की रूपरेखा में हर अकेला व्यक्ति अपने आप में एक अलग दुनिया की तरह काम करता है।
ट्रांसफॉर्मर तकनीक और तीन साल का बहुविषयक शोध
इन सभी व्यवहारिक अवलोकनों को गणितीय लक्षणों में बदला जाता है। इसके बाद यह डेटा ट्रांसफॉर्मर आधारित वर्ल्ड मॉडल में डाला जाता है, जो अलग-अलग परिस्थितियों में संभावित फैसलों की संभावनाएं सामने रखता है। अपने अनुमानों के पीछे की तार्किक व्याख्या तैयार करने के लिए कंपनी एक अलग लैंग्वेज मॉडल का इस्तेमाल करती है। सिस्टम की ट्रेनिंग इस तरह तय की गई है कि सिमुलेशन के दौरान व्यक्ति की मूल प्रवृत्तियां सुरक्षित रहें। अगर कोई ट्रेडर सामान्य तौर पर जोखिम से बचता है, लेकिन मॉडल उसे जोखिम उठाने वाले के रूप में दिखाने लगे, तो ट्रेनिंग रिवॉर्ड के हिसाब से उसे गलत लक्ष्य माना जाता है।
इस पूरे फ्रेमवर्क को विकसित करने में स्टार्टअप को तीन साल का समय लगा। इसमें मनोविज्ञान, न्यूरोसाइंस और जेनेटिक्स के तालमेल के अलावा ट्रॉमा और पीटीएसडी विशेषज्ञों से सलाह ली गई। इसके साथ ही वर्ष 2011 में रसायन विज्ञान के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित डैन शेच्टमैन का मार्गदर्शन भी इस प्रोजेक्ट में शामिल रहा। शुरुआत में टीम ने हज़ारों लोगों पर मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और व्यवहारिक परिदृश्यों का अध्ययन किया। इसके बाद सरकारी आंकड़ों और बायोबैंक के ज़रिए 20 लाख यानी 2 मिलियन से ज़्यादा लोगों का डेटा इसमें जोड़ा गया। बाद में इसका विस्तार लगभग 3 करोड़ यानी 30 मिलियन ग्राहकों के डेटासेट तक पहुंच गया।
लाइव कामकाज और सटीकता के आंकड़े
सक्रिय ब्रोकरेज कंपनियों में यह मॉडल ग्राहकों के पिछले वित्तीय लेन-देन और सपोर्ट कॉल के रिकॉर्ड का विश्लेषण करता है। सीईओ अमित गाल-ओर का कहना है कि मॉडल को व्यक्ति की निजी पहचान की ज़रूरत नहीं पड़ती और सिस्टम कभी यह नहीं जानता कि असल में वह व्यक्ति कौन है, हालांकि सिस्टम गतिविधि से जुड़े व्यक्तिगत व्यवहारिक प्रोफाइल ज़रूर तैयार करता है।
बाज़ार के ट्रेड की दिशा भांपने को लेकर कंपनी ने 98 प्रतिशत सटीकता का दावा किया है। हालांकि गाल-ओर ने स्पष्ट किया कि 98% सटीकता का मतलब यह नहीं है कि हर एक ट्रेड का सही अनुमान लग जाता है, बल्कि इसका अर्थ यह है कि ट्रेडिंग का कुल प्रवाह पहले से अनुमानित दायरे के भीतर रहता है। इसके साथ ही मॉडल ट्रेडिंग की दिशा और वॉल्यूम का पूर्वानुमान लगाने में लगातार 0.8 से 0.85 का F1 स्कोर हासिल करता है। मशीन लर्निंग में F1 स्कोर सही अनुमानों, गलत चेतावनियों और छूटे हुए इवेंट्स के बीच संतुलन मापने का एक मानक पैमाना माना जाता है।
तकनीक की सीमाएं, कारोबारी मॉडल और फंडिंग संरचना
यह मॉडल हर परिस्थिति में चमत्कार नहीं कर सकता क्योंकि एक मशीन के तौर पर इसकी भी स्वाभाविक सीमाएं हैं। इंसानी ज़िंदगी के हर व्यक्तिगत अनुभव या विचार तक किसी सिस्टम की सीधी पहुंच नहीं हो सकती। यदि कोई ट्रेडर अपने किसी दोस्त या सहकर्मी की व्यक्तिगत सलाह मानकर अचानक अपना फैसला बदल लेता है, तो ऐसे बाहरी संदर्भों की गैरमौजूदगी में मॉडल का अनुमान कमजोर पड़ सकता है।
फिलहाल 42AI कुल 10 बड़े वित्तीय ब्रोकरेज संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा है। ये ब्रोकरेज इस तकनीक का इस्तेमाल नकदी प्रबंधन, मार्जिन की ज़रूरतों और हेजिंग रिस्क को संतुलित करने के लिए कर रहे हैं। कंपनी लगातार नए ग्राहक जोड़ रही है और उसका राजस्व सात अंकों यानी सेवन फिगर्स में पहुंच चुका है। ग्राहक स्टार्टअप को या तो एक तय फीस देते हैं या फिर उस मुनाफे का एक हिस्सा चुकाते हैं जो इस प्लेटफॉर्म की मदद से उन्हें मिलता है। गाल-ओर का दावा है कि उनके डायनामिक हेजिंग सिस्टम की मदद से एक ही ब्रोकरेज ने लगभग 3 करोड़ डॉलर यानी 30 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त मूल्य हासिल किया।
कंपनी को मिली 6.25 करोड़ डॉलर की सीड पूंजी पूरी तरह बाहरी निवेशकों से नहीं आई है, बल्कि संस्थापकों और इन्फिनिटी ग्रुप ने तीन वर्षों के दौरान इसे जुटाया है। इन्फिनिटी ग्रुप की स्थापना अमित गाल-ओर के पिता आमिर गाल-ओर ने की थी, जो 42AI के चेयरमैन और सह-संस्थापक भी हैं। कंपनी अब अतिरिक्त फंडिंग जुटाने की तैयारी में है। भविष्य में इस तकनीक को गेमिंग, साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकने और रोबोट्स तथा एआई एजेंट्स को इंसानी सोच समझाने के लिए इस्तेमाल करने की योजना है, जिसके लिए हर नए क्षेत्र के खास नियम सिखाने होंगे। ब्रोकरेज द्वारा ग्राहकों के व्यवहार का अपने हित में अनुचित लाभ उठाने की आशंकाओं पर सीटीओ एहुद एज्रा ने माना कि यह एक वाजिब चिंता है। संस्थापकों ने इसके लिए नियमों, निगरानी और एक आंतरिक आचार समिति का हवाला दिया है, जबकि गाल-ओर का भरोसा है कि उनकी तकनीक खुद इस समस्या के समाधान का हिस्सा बनेगी।


















