वेब ब्राउज़र कंपनी ब्रेव पर कॉपीराइट नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर कानूनी शिकंजा कस गया है। दि न्यूयॉर्क टाइम्स ने सोमवार को 11 साल पुरानी और प्राइवेसी पर जोर देने वाली कंपनी ब्रेव के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ब्रेव ने प्रकाशकों के कॉपीराइट कंटेंट को बिना अनुमति स्क्रैप किया और फिर उसे अपने ग्राहकों तक अवैध रूप से पहुंचाया। इस कानूनी दस्तावेज में ग्राहकों के तौर पर एंथ्रोपिक, परप्लेक्सिटी, मिस्ट्रल, xAI और कोहेयर जैसी नामी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों के नाम दर्ज किए गए हैं।
इसी दिन सोमवार को डेली न्यूज, शिकागो ट्रिब्यून और ऑरलैंडो सेंटिनल ने भी ऐसा ही एक साझा मुकदमा दर्ज कराया। ये दोनों कानूनी मामले मैनहट्टन की फेडरल कोर्ट में दायर किए गए हैं। दि न्यूयॉर्क टाइम्स इससे पहले ओपनएआई और परप्लेक्सिटी के खिलाफ भी ठीक इसी तरह के दावों को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर चुका है। ताजा याचिका में प्रकाशक ने ब्रेव की तुलना एआई कंपनियों के लिए चुराए गए कॉपीराइट कंटेंट के सप्लायर, डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर से की है।
सेंधमार और चोरी का माल बेचने वाले से की तुलना
दायर याचिका में कहा गया है कि ब्रेव एक तरह से सेंधमार की तरह काम करता है जो प्रकाशकों की सामग्री को अनधिकृत रूप से हथिया लेता है। इसके अलावा कंपनी को ऐसे बिचौलिए के तौर पर पेश किया गया है जो तीसरे पक्ष को यह चोरी का कंटेंट मुहैया कराता है। मुकदमे के अनुसार, ब्रेव ने एक अज्ञात वेब क्रॉलर का इस्तेमाल करके 30 अरब से अधिक वेब पेजों का एक विशाल इंडेक्स तैयार किया, जिससे प्रकाशक इसे समय रहते ब्लॉक करने में असमर्थ रहे।
पेवॉल बायपास और विज्ञापनों का विवाद
इस कानूनी लड़ाई में ब्रेव ब्राउज़र के उस फीचर को भी निशाना बनाया गया है जो वेबसाइटों के पेवॉल को बायपास कर देता है। इसके साथ ही याचिका में कंपनी की उस कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा किया गया है जिसके तहत वह प्रकाशकों के अपने विज्ञापनों को ब्लॉक कर देती है और बदले में खुद के विज्ञापनों की बिक्री करती है। साल 2015 में स्थापित हुई ब्रेव अब तक लगभग 250 मिलियन डॉलर का फंड जुटा चुकी है। इस मुकदमे के जरिए अदालत से निषेधाज्ञा जारी करने और हर्जाना दिलाने की मांग की गई है, जबकि ब्रेव की तरफ से इस मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।



















