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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटरों में पानी बचाने के लिए ओमेन एआई ने एक्वाटिक लैब्स को 16 मिलियन डॉलर में खरीदाएआई
2 नव॰ 2026, 8:50 pm (1 मिनट पहले)· 0

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटरों में पानी बचाने के लिए ओमेन एआई ने एक्वाटिक लैब्स को 16 मिलियन डॉलर में खरीदा

डेटा सेंटरों में चिप्स को ठंडा रखने वाले कूलिंग वॉटर की रियल-टाइम निगरानी को मजबूत करने के लिए ओमेन एआई ने एक्वाटिक लैब्स का 16 मिलियन डॉलर में अधिग्रहण किया है।

अमेरिकी डेटा सेंटरों में अत्यधिक गर्म होने वाले आधुनिक चिप्स को ठंडा रखने के लिए हर साल 17 से 19 अरब गैलन पानी का उपयोग किया जाता है। वाटर फाउंडेशन के अनुमान के अनुसार आने वाले पांच वर्षों में यह खपत तीन गुना तक बढ़ सकती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार में अरबों डॉलर लगा रहे निवेशकों के लिए पानी की यह भारी खपत आर्थिक रूप से बेहद महंगी और नीतिगत स्तर पर काफी संवेदनशील साबित हो रही है। इस खपत को नियंत्रित करने का एक प्रमुख उपाय कूलिंग फ्लूइड्स की बेहतर निगरानी करना है, लेकिन वर्तमान में यह प्रक्रिया बेहद धीमी है और इसके लिए पानी के नमूनों को प्रयोगशाला भेजकर जांच कराने में कई दिनों का समय लग जाता है।

ओमेन एआई और एक्वाटिक लैब्स के बीच 16 मिलियन डॉलर का सौदा

इस गंभीर समस्या का तकनीकी समाधान निकालने के लिए वर्ष 2024 में ओमेन एआई की स्थापना हुई थी। यह कंपनी ऐसे रियल-टाइम सेंसर विकसित कर रही है जो वॉल्व के खराब होने या सिस्टम में बैक्टीरिया पनपने से पानी का बहाव रुकने के जोखिम को तुरंत पकड़ सकें। जून में 31 मिलियन डॉलर की सीरीज ए फंडिंग हासिल करने के बाद, ओमेन एआई ने अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनी एक्वाटिक लैब्स के अधिग्रहण के लिए 16 मिलियन डॉलर के कैश और स्टॉक सौदे पर मुहर लगाई है।

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यह समझौता तब संभव हुआ जब फिल्ट्रेशन सेक्टर के एक निवेशक ने ओमेन एआई के संस्थापक जैक लाबर्ज की मुलाकात एक्वाटिक लैब्स के सीईओ एलन एडम्स से करवाई। दोनों ही स्टार्टअप पानी की स्थिति जांचने वाले रियल-टाइम सेंसर तैयार कर रहे थे, जिनकी तकनीकें एक-दूसरे की पूरक थीं। जहां ओमेन एआई के सेंसर पानी में विभिन्न तत्वों की उपस्थिति की पहचान करते हैं, वहीं एक्वाटिक लैब्स का सिस्टम उसकी क्षारीयता यानी अल्कलिनिटी का परीक्षण करता है।

दो अलग-अलग विशेषज्ञताओं का तकनीकी तालमेल

इन दोनों प्रौद्योगिकियों को एक ही उपकरण में शामिल करने से कूलिंग वॉटर और फ्लूइड्स की स्थिति की बेहद विस्तृत जानकारी हासिल होगी। इससे वह परीक्षण प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित हो जाएगी, जो अब तक धीमी और इंसानी दखल पर निर्भर थी। इस विलय ने दो अलग-अलग पृष्ठभूमियों के संस्थापकों को एक साथ ला खड़ा किया है।

जैक लाबर्ज ने कॉलेज छोड़कर अपनी पहली उद्यम यात्रा शुरू की थी, जहां उन्होंने हाइड्रोलिक्स पर चलने वाली बड़ी निर्माण मशीनों में तरल पदार्थों के विश्लेषण का काम किया था। दूसरी ओर, एलन एडम्स एक पेशेवर भौतिक विज्ञानी रहे हैं और उन्होंने एमआईटी में प्रोफेसर तथा वुड्स होल ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूट में शोधकर्ता के रूप में समुद्र संवेदन तकनीक के विकास में लंबा समय बिताया है।

डेटा सेंटर की सुरक्षा और बाजार में उतरने की समयसीमा

इस अधिग्रहण के बाद एलन एडम्स ओमेन एआई में मुख्य विज्ञान अधिकारी के पद पर कार्य कर रहे हैं। दोनों कंपनियों की संयुक्त टीम अब दोनों प्रणालियों को एक ही एकीकृत सेंसर में ढालने पर काम कर रही है, जिसे अगले साल की शुरुआत तक बाजार में उतारने की योजना है।

कंपनी के मौजूदा सेंसर इस वर्ष के अंत तक 250 से 300 मेगावाट बिजली खींचने वाले कंप्यूटर चिप्स की निगरानी करेंगे, जिनकी कुल लागत 5 से 7 अरब डॉलर आंकी गई है। इसके साथ ही, कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2027 के अंत तक लगभग 1 गीगावाट क्षमता वाले चिप्स पर अपने सेंसर तैनात करने का है।

डेटा सेंटर संचालकों के लिए इस निगरानी तकनीक का सबसे बड़ा लाभ उनके सिस्टम के निर्बाध रूप से चालू रहने में है। जब कूलिंग फ्लूइड सिस्टम में कोई खराबी आती है, तो ऑपरेटर अपने महंगे हार्डवेयर को नुकसान से बचाने के लिए पूरे पानी को बहा देते हैं। ऐसा करने पर सिस्टम की बहाली होने तक डेटा सेंटर का संचालन पूरी तरह बंद करना पड़ता है, जिससे भारी वित्तीय नुकसान होता है। रियल-टाइम निगरानी की मदद से ऑपरेटर एक ही फ्लूइड को लंबे समय तक सुरक्षित इस्तेमाल कर सकते हैं और साफ-सफाई पर होने वाले अनावश्यक खर्च को टाल सकते हैं।

पर्यावरणीय प्रभाव और बुनियादी ढांचे में निवेश का रुख

एलन एडम्स का मानना है कि इस संवेदन तकनीक का लाभ केवल डेटा सेंटरों की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहेगा। उनका कहना है कि जो पानी डेटा सेंटरों के भीतर प्रवेश करता है, वह बाद में बाहर निकलकर नगर निगम की जल प्रणालियों में छोड़ा जाता है। इसलिए इस समूची प्रक्रिया को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और सुरक्षित बनाने के लिए तरल पदार्थों का सटीक मापन बेहद जरूरी है।

उद्योग जगत में कभी यह अनुमान लगाया गया था कि वर्ष 2030 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े बुनियादी ढांचे पर 4 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए जाएंगे। हालांकि हाल के दिनों में कई निवेशकों ने बुनियादी ढांचे के इस भारी भरकम खर्च पर संशय जताना शुरू किया है, जिससे बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट भी दर्ज की गई है। इसके बावजूद ओमेन एआई का नेतृत्व बाजार के इस बदलते रुख को लेकर चिंतित नहीं है, क्योंकि उनका काम डेटा सेंटर का निर्माण पूरा होने के बाद शुरू होता है।

जैक लाबर्ज के अनुसार, वे उन परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं जो या तो पहले से बन चुकी हैं या जिनका निर्माण आज जारी है। इन सभी परियोजनाओं का वित्तीय आवंटन लगभग 12 महीने पहले ही तय हो चुका था। उनका मानना है कि यदि बाजार में कुछ सुस्ती भी आती है, तब भी यह क्षेत्र मानव इतिहास के सबसे बड़े व्यापारिक अवसरों में से एक बना रहेगा।

सवाल-जवाब

ओमेन एआई ने एक्वाटिक लैब्स को कितने में खरीदा है?
ओमेन एआई ने एक्वाटिक लैब्स को 16 मिलियन डॉलर के कैश और स्टॉक सौदे में खरीदा है।
अमेरिकी डेटा सेंटर सालाना कितना पानी इस्तेमाल करते हैं?
अमेरिकी डेटा सेंटर अपने चिप्स को ठंडा रखने के लिए हर साल 17 से 19 अरब गैलन पानी खर्च करते हैं।
ओमेन एआई और एक्वाटिक लैब्स की तकनीकों में क्या अंतर था?
ओमेन एआई के सेंसर पानी में रासायनिक तत्वों की जांच करते हैं, जबकि एक्वाटिक लैब्स के सेंसर पानी की क्षारीयता यानी अल्कलिनिटी मापते हैं।
संयुक्त तकनीक से बना नया सेंसर बाजार में कब आएगा?
दोनों कंपनियों द्वारा विकसित एकीकृत सेंसर को अगले साल की शुरुआत तक बाजार में उतारने की योजना है।
इस साल के अंत तक ओमेन एआई के सेंसर कितने चिप्स की निगरानी करेंगे?
कंपनी के सेंसर इस साल के अंत तक 250 से 300 मेगावाट बिजली खपत वाले चिप्स की निगरानी करेंगे, जिनकी कीमत लगभग 5 से 7 अरब डॉलर है।
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