भविष्य के जानकारों का एक वर्ग ऐसा मानता है कि हम कंप्यूटर की कीबोर्ड वाली संस्कृति के अंत के करीब पहुंच रहे हैं, जहां दफ्तरों में काम करने वाले लोग टाइप करने के बजाय अपने डेस्क माइक पर धीरे-धीरे फुसफुसाकर काम चलाएंगे। यद्यपि इस बात पर मतभेद हो सकते हैं कि कीबोर्ड पूरी तरह गायब होंगे या नहीं, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ग्राहक किस तरह अपनी प्रतिक्रियाएं दर्ज कराते हैं, यह तरीका जरूर बदल रहा है।
ज्यादातर लोग कस्टमर सपोर्ट को ईमेल तब ही करते हैं जब कोई बहुत बड़ी परेशानी सामने आ जाए और पैसे रिफंड कराने की जरूरत हो। इसके विपरीत, फोन पर बीस सेकंड तक अपनी बात बोलकर प्रतिक्रिया देना, चाहे वह अच्छी हो या बुरी, काफी आसान लगता है, बजाय इसके कि घंटों फोन पर होल्ड पर रहकर किसी के जवाब का इंतजार किया जाए।
वॉइसबॉक्स के सीईओ करण गुप्ता का कहना है कि पिछले दो वर्षों में इस तकनीक में एक बड़ा बदलाव आया है और अब आवाज पर आधारित यह प्रक्रिया तेज और सटीक दोनों हो गई है। उनका यह स्टार्टअप मुख्य रूप से आवाज के जरिए ग्राहकों की प्रतिक्रियाएं इकट्ठा करने का काम करता है, और इससे पहले वे एलिस नाम के एक सुरक्षित ट्रांसक्रिप्शन ऐप पर भी काम कर चुके हैं।
वॉइसबॉक्स कैसे काम करता है और कहां हो रहा है इस्तेमाल
इस प्लेटफॉर्म के जरिए प्रतिक्रिया देना बेहद आसान है। कोई भी खरीदार स्टोर में लगे क्यूआर कोड को स्कैन कर सकता है या अपने फोन को एनएफसी चिप से टैप करके अपनी बात रिकॉर्ड करा सकता है। इसके बाद वह संदेश अपने आप टेक्स्ट में बदल जाता है और विश्लेषण के बाद कंपनी के डैशबोर्ड पर पहुंच जाता है, जहां जरूरत पड़ने पर कंपनियां ईमेल के जरिए संपर्क भी कर सकती हैं।
इस तकनीक का दायरा केवल दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार एयरपोर्ट टर्मिनलों तक भी किया गया है। हवाई अड्डों पर यात्री वॉशरूम की साफ-सफाई या गेट की दिशाओं से जुड़ी अपनी शिकायतें या सुझाव आसानी से दे सकते हैं।
व्यापार से परे संस्कृति और सार्वजनिक मंचों तक विस्तार
करण गुप्ता इस माध्यम को कॉर्पोरेट दायरों से आगे ले जाना चाहते हैं। इसी वर्ष सैन फ्रांसिस्को में अपनी पुस्तक फेमसिक के प्रचार के दौरान लेना डनहम ने एक इवेंट में इस सेवा का क्यूआर कोड स्क्रीन पर दिखाया था। वहां मौजूद कई लोगों ने उनके स्वास्थ्य सफर के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अपने भावनात्मक संदेश रिकॉर्ड किए थे।
इस विजन को आगे बढ़ाते हुए इस स्टार्टअप ने हाल ही में अपनी डायरेक्टरी लॉन्च की है, जिससे दुनिया में कहीं से भी प्रतिक्रियाएं भेजी जा सकती हैं। आने वाले समय में इसके जरिए लोग यह भी देख सकेंगे कि किसी विशेष व्यवसाय के बारे में अन्य लोग क्या सार्वजनिक राय रख रहे हैं।
पारंपरिक टाइपिंग की जगह लेती आवाज की तकनीक
नाई की दुकान से बाहर निकलते समय अपने बाल कटवाने के अनुभव पर राय देनी हो या किसी अस्पताल की पार्किंग व्यवस्था के बारे में आने वाले आगंतुकों को सलाह देनी हो, फोन में फुसफुसाकर यह काम पलक झपकते किया जा सकता है। यह डायरेक्टरी इस सेवा को केवल शिकायतों तक सीमित न रखकर गूगल मैप्स की तरह क्राउड-स्पोकन समीक्षाओं के एक बड़े मंच में बदल देती है।
यह पूरा बदलाव तकनीक की उन अन्य आधुनिक धाराओं से मेल खाता है, जहां डिक्टेशन इतना सहज हो गया है कि स्मार्टफोन की छोटी स्क्रीन पर अंगूठों से टाइप करना बोझिल और पुराना लगने लगा है।



















