अजमेर की 162 साल पुरानी ऐतिहासिक धरोहर सोनी जी की नसियां अपनी बेजोड़ कारीगरी से आज भी है कायममुरादाबाद के भुवनेश कुमार ने रचा इतिहास, चपरासी परीक्षा में फेल होने के बाद बने एसएससी सीजीएल अधिकारीअनुपमा का बिल्डर फ्रॉड पर पलटवार, मोहनलाल ने काटी शाह हाउस और कैफे की बिजली-पानीरोहतास के अर्जुन ने तंदूरी चाय के बिजनेस से बदली किस्मत, शुरुआती निवेश के बाद अब रोजाना बिक रहे सैकड़ों कपराणा प्रताप सागर बांध के पास 14 फीट लंबे अजगर ने कुत्ते को निगला, वन विभाग ने किया रेस्क्यूप्रतापगढ़ का देवाक माता मंदिर: जहां त्रिशूल पर चढ़ाई जाती हैं लोहे की जंजीरें और हथकड़ियांक्रोमा की फेस्टिव सेल में iPhone 17 Pro पर भारी बचत, ऐसे पाएं ₹40,000 तक की छूटमहाराष्ट्र के बीड में दर्दनाक सड़क हादसा, बस और कार की भिड़ंत में पांच की मौतश्रीगंगानगर में 39वें दिन उग्र हुआ किसान आंदोलन, डब्बर मोड़ पर जाम और बिरधवाल हेड कब्जे की चेतावनीमेजर गरिमा यादव बनीं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल की पहली महिला एडीसी, जानिए मॉडलिंग से सेना तक का सफर
अमेरिका के स्कूलों में छोटी गलतियों पर बच्चों पर दर्ज हो रहे क्रिमिनल केस, टेक्सास में हालात गंभीरअमेरिका
18 अक्तू॰ 2026, 12:51 pm (39 मिनट पहले)· 0

अमेरिका के स्कूलों में छोटी गलतियों पर बच्चों पर दर्ज हो रहे क्रिमिनल केस, टेक्सास में हालात गंभीर

अमेरिका में स्कूलों के भीतर मामूली अनुशासनहीनता और बच्चों की छोटी-मोटी शरारतों पर पुलिस कार्रवाई के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। टेक्सास में साल 2014 के बाद से स्कूली बच्चों पर 47 हजार से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

अमेरिका में स्कूलों की सुरक्षा के लिए लागू की गई सख्त नीतियां अब मासूम बच्चों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छोटी-मोटी हरकतों और बचकानी शरारतों पर भी पुलिस बच्चों को हथकड़ी लगाकर जेल भेजने से नहीं चूक रही है। खिलौने फेंकने, मोबाइल फोन छीनने पर शिक्षकों से बहस करने या सामान्य बोलचाल की नोकझोंक जैसे मामलों में भी छात्रों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। साल 2014 के बाद से अकेले टेक्सास राज्य में ही स्कूली बच्चों के खिलाफ 47 हजार से ज्यादा क्रिमिनल केस दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है।

महज चार सेकंड की चेतावनी और हाथों में हथकड़ी

टेक्सास के एक स्कूल परिसर की घटना इस कठोर प्रशासनिक रवैये की बानगी पेश करती है। एक 12 साल की बच्ची अपने कंधे पर बस्ता टांगे हुए स्कूल की लॉबी में खड़ी थी। कुछ ही समय पहले विद्यालय के प्रिंसिपल ने उसे वहीं खड़े होकर अपनी मां का इंतजार करने का निर्देश दिया था। जब बच्ची अपनी जगह से नहीं हिली, तो वहां एक पुलिस अधिकारी आ गया। अधिकारी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए महज चार सेकंड की उल्टी गिनती शुरू कर दी और चेतावनी दी कि बात न मानने पर उसे हथकड़ी लगाकर बाल सुधार गृह भेज दिया जाएगा। बच्ची इस पूरी स्थिति को समझ भी नहीं पाई थी कि अधिकारी ने उसका बैग उतारकर उसके छोटे हाथों में हथकड़ी कस दी।

ये भी पढ़ें

उवाल्डे गोलीबारी के बाद बदले गए थे सुरक्षा नियम

इस तरह के कड़े प्रावधानों के पीछे साल 2022 में उवाल्डे स्कूल में हुई गोलीबारी की घटना का बड़ा हाथ है, जिसके बाद सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए हर सरकारी स्कूल में पुलिसकर्मियों की तैनाती अनिवार्य कर दी गई थी। इस नीति का मुख्य उद्देश्य किसी भी बाहरी खतरे या हमलावर से निपटना था, लेकिन इसका दायरा बढ़कर स्कूल के अंदरूनी अनुशासन मामलों तक फैल गया। नतीजा यह हुआ कि छोटी-मोटी गलतियों पर भी छात्रों की गिरफ्तारियां होने लगीं। केवल शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के दौरान ही लगभग 4,800 बच्चों को पुलिस के सुपुर्द किया गया, जो कि एक दशक पहले के आंकड़ों की तुलना में एक-तिहाई अधिक है। इन मामलों में फंसने वाले अधिकांश बच्चों की उम्र 10 से 13 वर्ष के बीच है।

साधारण शरारतों पर लग रही हैं गंभीर धाराएं

पूर्व पुलिस डिटेक्टिव फिलिप लायंस का इस बारे में कहना है कि पुलिस बलों को बच्चों के साथ सही ढंग से पेश आने की कोई विशेष या बुनियादी ट्रेनिंग नहीं दी जाती है। जिन मुद्दों को स्कूल के प्रिंसिपल की डांट, आपसी समझाइश या माता-पिता को स्कूल बुलाकर आसानी से सुलझाया जा सकता था, उनमें पुलिस सीधे तौर पर दखल देने लगी है। खेल के मैदान पर होने वाली आम बहसों और लड़ाइयों को भी ‘आतंकी धमकी’ जैसे गंभीर अपराधों की श्रेणी में रख दिया जाता है। कई कम उम्र के बच्चों को पुलिस थाने की हवालात में रातें गुजारनी पड़ी हैं, उनके फिंगरप्रिंट लिए गए हैं और अदालतों के चक्कर काटने पड़े हैं, जिससे उनके कोमल मन में पुलिस का भारी खौफ बैठ गया है और वे गंभीर मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय में काउंसलिंग है बेहतर विकल्प

मनोवैज्ञानिक कैथलीन ओ’कॉनर का मानना है कि 10 से 13 वर्ष की आयु वह दौर होती है जब बच्चों के मस्तिष्क का तेजी से विकास हो रहा होता है। ऐसे संवेदनशील पड़ाव पर उनके प्रति दंडात्मक और क्रूर रवैया अपनाने से उनमें हीनभावना घर कर जाती है और वे भविष्य में खतरनाक व जोखिम भरे व्यवहार की तरफ बढ़ सकते हैं। हालांकि, कुछ जिलों ने इस पुरानी व्यवस्था में बदलाव भी किए हैं। विचिटा फॉल्स जिले के सुपरिंटेंडेंट डॉनी ली ने स्कूलों से पुलिस अफसरों को हटाकर बच्चों के लिए काउंसलिंग और सकारात्मक अनुशासन पर जोर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप वहां गिरफ्तारियों में भारी कमी आई है। उनका साफ कहना है कि उनका काम जुर्म और सजा का कारोबार चलाना नहीं, बल्कि शिक्षा देना है।

सवाल-जवाब

अमेरिका के किस राज्य में बच्चों पर सबसे ज्यादा क्रिमिनल केस दर्ज हुए हैं?
साल 2014 के बाद से अकेले टेक्सास राज्य में स्कूली बच्चों पर 47 हजार से ज्यादा क्रिमिनल केस दर्ज किए गए हैं।
किस घटना के बाद स्कूलों में पुलिस अफसरों की तैनाती अनिवार्य की गई थी?
वर्ष 2022 में हुई उवाल्डे स्कूल शूटिंग की घटना के बाद टेक्सास के सरकारी स्कूलों में पुलिस अफसरों की तैनाती अनिवार्य कर दी गई थी।
किन उम्र के बच्चों को सबसे ज्यादा पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है?
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी का सामना करने वाले अधिकांश बच्चे 10 से 13 वर्ष की आयु के हैं।
मामूली मामलों में बच्चों पर किस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं?
स्कूल के गलियारों और खेल के मैदान की सामान्य नोकझोंक पर भी कई बार 'आतंकी धमकी' जैसी गंभीर धाराएं लगाई जा रही हैं।
किन जिलों ने इस दंडात्मक व्यवस्था में सुधार किया है?
विचिटा फॉल्स जिले के सुपरिंटेंडेंट डॉनी ली ने स्कूलों से पुलिस अफसरों को हटाकर काउंसलिंग और अनुशासन को प्राथमिकता दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp