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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तबाही की चेतावनियों को डोनाल्ड ट्रंप ने बताया छलावा, बोले आर्थिक ताकत बनेगा AIअमेरिका
19 सित॰ 2026, 8:09 pm (40 दिन पहले)· 1

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तबाही की चेतावनियों को डोनाल्ड ट्रंप ने बताया छलावा, बोले आर्थिक ताकत बनेगा AI

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मानवता के विनाश के दावों को खारिज करते हुए इसे सबसे बड़ा आर्थिक इंजन बताया है। साथ ही गूगल के फिनलैंड में 15 अरब डॉलर के निवेश पर नाराजगी जताते हुए अमेरिकी परमिट प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दिया।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक को लेकर वैश्विक स्तर पर जारी चिंताओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। तकनीकी जगत के कई जानकारों और शोधकर्ताओं की उस चेतावनी को उन्होंने पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि भविष्य में यह तकनीक इंसानी सभ्यता के लिए भारी जोखिम बन सकती है। उन्होंने इस पूरी बहस और डर के माहौल को केवल एक छलावा करार दिया है। उनका स्पष्ट मानना है कि तकनीक को लेकर बनाई जा रही खौफ की यह धारणा निराधार है और इस पर सख्त नियामक बंदिशें लगाना विकास के पहिए को रोकने जैसा होगा।

चिंताओं को बताया राजनीतिक हथकंडा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक के दुनिया पर हावी होने या इंसानों को मिटा देने जैसी बातें केवल भय पैदा करने के लिए गढ़ी गई हैं। उन्होंने इन आशंकाओं की तुलना पूर्व में अपने खिलाफ चली रूस जांच और यूक्रेन विवाद से जुड़े महाभियोग के मामलों से की। उनके अनुसार जैसे वे तमाम विवाद राजनीति से प्रेरित थे, वैसे ही यह डर भी केवल विकास को थामने के इरादे से खड़ा किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने इस पूरी चर्चा की तुलना जलवायु परिवर्तन से जुड़े विवादों से भी की और इसे अनावश्यक हो-हल्ला बताया।

अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा विकास इंजन

उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि आधुनिक डेटा सेंटर और यह नई तकनीक भविष्य में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने इसे आधुनिक इतिहास का सबसे शक्तिशाली आर्थिक विकास इंजन करार दिया। उनके मुताबिक इस नई डिजिटल क्रांति का आर्थिक प्रभाव तेल, सोना, हीरा और शुरुआती दौर के इंटरनेट से भी कहीं अधिक व्यापक साबित हो सकता है। उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका इस तकनीकी होड़ में पूरी दुनिया का नेतृत्व करे। विशेष रूप से चीन के साथ जारी कड़े तकनीकी मुकाबले में वे किसी भी हाल में अमेरिका की पकड़ कमजोर नहीं होने देना चाहते। इसी वजह से वे सुरक्षा के नाम पर कड़े नियमों और पाबंदियों को देश की प्रगति में सबसे बड़ा रोड़ा मानते हैं।

गूगल के फिनलैंड प्रोजेक्ट पर जताई आपत्ति

अमेरिकी कंपनियों द्वारा देश से बाहर पूंजी लगाने पर भी उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया। तकनीकी दिग्गज गूगल ने फिनलैंड में आधुनिक डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए कम से कम 15 अरब डॉलर के बड़े निवेश की योजना सामने रखी है। इस पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका के भीतर विनियामक मंजूरियां और परमिट हासिल करने की जटिल प्रक्रिया कंपनियों को बाहर जाने पर मजबूर करती है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर गूगल को अपनी इस रणनीति की दोबारा समीक्षा करने और घरेलू जमीन पर संसाधन लगाने की सलाह दी है।

विशेषज्ञों की राय और रणनीतिक मुकाबला

दूसरी तरफ दुनिया भर के कई प्रमुख तकनीकी वैज्ञानिक लगातार इस बात की वकालत कर रहे हैं कि सिस्टम को और ज्यादा ताकतवर बनाने से पहले सुरक्षा के पुख्ता मानक तय किए जाने चाहिए। इन विशेषज्ञों का कहना है कि अनियंत्रित प्रणालियों से जैविक हथियारों के निर्माण और परमाणु सुरक्षा में सेंधमारी जैसे अपूरणीय संकट खड़े हो सकते हैं, इसलिए शोध की रफ्तार थोड़ी धीमी रखी जानी चाहिए। बहरहाल, अमेरिकी राष्ट्रपति इन आपत्तियों को गंभीरता से लेने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। उनका स्पष्ट संदेश है कि वैश्विक दौड़ में बढ़त बनाए रखना ही सबसे बड़ा लक्ष्य है, क्योंकि आने वाले समय में यह तकनीक मात्र एक कंप्यूटर प्रोग्राम नहीं बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक और रणनीतिक शक्ति साबित होगी।

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सवाल-जवाब

डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर क्या रुख अपनाया है?
उन्होंने इस तकनीक से इंसानों को खतरे या दुनिया पर कब्जे के दावों को पूरी तरह छलावा बताते हुए सख्त नियमों का विरोध किया है।
ट्रंप ने AI की तुलना किन प्राकृतिक संसाधनों से की?
उन्होंने कहा कि इसका आर्थिक असर तेल, सोना, हीरा और यहां तक कि शुरुआती दौर के इंटरनेट से भी काफी बड़ा हो सकता है।
गूगल के किस कदम पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाराजगी जताई?
गूगल ने फिनलैंड में डेटा सेंटर और डिजिटल ढांचे के लिए कम से कम 15 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा की है, जिस पर ट्रंप ने पुनर्विचार की बात कही।
कंपनियां अमेरिका से बाहर डेटा सेंटर क्यों बना रही हैं?
ट्रंप के अनुसार अमेरिका में निर्माण और पर्यावरण से जुड़े परमिट लेने की प्रक्रिया काफी जटिल और कठिन है, जिससे कंपनियां दूसरे देशों का रुख करती हैं।
वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की क्या चिंता है?
विशेषज्ञों का तर्क है कि अनियंत्रित प्रणालियों से भविष्य में जैविक हथियारों और परमाणु सुरक्षा जैसे गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं, इसलिए विकास की रफ्तार नियंत्रित होनी चाहिए।
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