अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले तीन कारोबारी सत्रों से जारी सोने की तेजी पर ब्रेक लग गया है। अमेरिकी डॉलर के अपने अहम समर्थन स्तर पर संभलने और अमेरिका के महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े जारी होने से पहले सर्राफा बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली है। बहुमूल्य धातु हाजिर बाजार में 0.65 प्रतिशत फिसलकर 4,040 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई। वित्तीय बाजारों में निवेशक अब अमेरिका के तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के अग्रिम आंकड़ों और सितंबर महीने के व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई मुद्रास्फीति सूचकांक का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इन आंकड़ों के आने से पहले बड़े सटोरियों और संस्थागत निवेशकों ने अपनी आक्रामक पोजीशन हल्की की है, जिससे पीली धातु पर दबाव बढ़ गया है।
डॉलर इंडेक्स में स्थिरता और बॉन्ड बाजार का मिजाज
सोने की कीमतों में आई इस ताजा कमजोरी का सीधा संबंध अमेरिकी मुद्रा की मजबूती से जुड़ा हुआ है। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 102.10 के अपने अहम तकनीकी सपोर्ट को बचाने में कामयाब रहा है। जब भी डॉलर में स्थिरता या मजबूती आती है, तब विदेशी खरीदारों के लिए डॉलर में मूल्यांकित सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी भौतिक मांग पर असर पड़ता है। अमेरिकी डॉलर और सोने के बीच ऐतिहासिक रूप से विपरीत संबंध देखा गया है। जब अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर संभलते हैं, तब बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने में निवेश का आकर्षण अस्थायी तौर पर घट जाता है। फिलहाल विदेशी मुद्रा बाजार में ट्रेडर रक्षात्मक रुख अपनाए हुए हैं और किसी भी बड़े दांव से पहले आधिकारिक आर्थिक रिपोर्ट की दिशा परखना चाहते हैं।
फेडरल रिजर्व के भीतर मतभेद और नीतिगत बैठकों पर नई योजना
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर नीति निर्माताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। हालिया चर्चाओं में फेड गवर्नर लीसा कुक और क्लीवलैंड फेड बैंक की प्रेसिडेंट बेथ हैमैक ने ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के पक्ष में अपनी असहमति दर्ज कराई थी। इन दोनों नीति निर्माताओं का तर्क था कि ऊर्जा आपूर्ति में आने वाले झटकों के कारण महंगाई लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रह सकती है, इसलिए मौद्रिक सख्ती में नरमी बरतना जल्दबाजी होगी। दूसरी तरफ, फेड चेयरमैन वॉर्श की ओर से एक अनोखा प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसके तहत साल में होने वाली ब्याज दर निर्धारण बैठकों की संख्या को आठ से घटाकर छह किया जा सकता है। वर्ष 2028 से लागू होने वाली इस योजना के अनुसार, फेड प्रतिवर्ष दो बैठकें केवल दीर्घकालिक रणनीति पर चर्चा के लिए आयोजित करेगा, जबकि बाकी छह बैठकें ब्याज दरों और नीति निर्धारण पर केंद्रित रहेंगी। इस संभावित बदलाव ने भी बाजार सहभागियों को चकित किया है।
अहम मैक्रो डेटा पर टिकी बाजार की निगाहें
कमोडिटी और मुद्रा बाजार के कारोबारी 12:30 जीएमटी पर जारी होने वाले अमेरिकी आर्थिक संकेतकों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। प्रारंभिक तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े यह दर्शाएंगे कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में वृद्धि की गति कितनी मजबूत है। इसके साथ ही सितंबर का कोर पीसीई प्राइस इंडेक्स फेडरल रिजर्व के लिए मुद्रास्फीति का सबसे पसंदीदा पैमाना माना जाता है। यदि महंगाई के आंकड़े उम्मीद से अधिक गर्म आते हैं, तो फेडरल रिजर्व को निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती टालनी पड़ सकती है या दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखना पड़ सकता है। उच्च ब्याज दरें गैर-उपज वाले सोने के लिए पारंपरिक रूप से प्रतिकूल साबित होती हैं। यही वजह है कि कारोबारी नए सौदे बनाने से बच रहे हैं और आंकड़े जारी होने तक बाजार में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
सोने का तकनीकी ढांचा और प्रमुख स्तर
दैनिक तकनीकी चार्ट पर एक्सएयू/यूएसडी का परिदृश्य निकट अवधि में मंदी का संकेत दे रहा है। सोना अपने 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी ईएमए से नीचे 4,040 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है, जो 4,115.80 डॉलर के स्तर पर स्थित है। जब तक हाजिर भाव इस अल्पकालिक ट्रेंड इंडिकेटर के नीचे बने रहते हैं, तब तक बिकवाल बाजार पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रख सकते हैं। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 39 अंक के करीब पहुंच गया है, जो किसी चरम ओवरसोल्ड स्थिति के बजाय कमजोर होती तेजी की रफ्तार को दर्शाता है। तेजी की स्थिति में सोने के लिए पहला बड़ा अवरोध 20-दिवसीय ईएमए 4,115.80 डॉलर पर है, और इस स्तर से ऊपर दैनिक क्लोजिंग मिलने पर ही मंदी का दबाव कम होगा। गिरावट की तरफ, जून का निचला स्तर 3,941.76 डॉलर सबसे महत्वपूर्ण समर्थन बना हुआ है। इसके अतिरिक्त पिवट बिंदु 4,051 डॉलर पर है, जबकि तात्कालिक रेजिस्टेंस 4,068 डॉलर व 4,099 डॉलर तथा सपोर्ट 4,020 डॉलर व 4,003 डॉलर पर स्थित हैं।
वैश्विक मुद्राओं का रुख और केंद्रीय बैंकों की भूमिका
विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य जोड़ियों में भी हलचल तेज रही है। एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 0.7055 के करीब पहुंच गया। ऑस्ट्रेलिया में महंगाई के मजबूत आंकड़ों ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को बल दिया है। वहीं दूसरी ओर, यूएसडी/जेपीवाई की जोड़ी ने एशियाई सत्र में गिरावट पर खरीदारी आकर्षित की और 158.00 के स्तर को पार कर लिया। जापानी येन के ट्रेडर अब शुक्रवार को होने वाले बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जहां दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। व्यापक स्तर पर सोने को एक सुरक्षित निवेश और मूल्य के संचय के रूप में देखा जाता है। केंद्रीय बैंक अशांत समय में अपनी मुद्राओं की साख बनाए रखने के लिए लगातार सोने की खरीदारी कर रहे हैं। वर्ष 2022 में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड 1,136 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा था, जिसकी कीमत करीब 70 अरब डॉलर थी। चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते देशों के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए लगातार सोना खरीद रहे हैं। जब भी भू-राजनीतिक अस्थिरता या आर्थिक मंदी की आशंकाएं गहराती हैं, तब सुरक्षित ठिकाने के रूप में सोने की पूछ बढ़ जाती है।



















