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फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले के बाद चांदी 53.50 डॉलर से नीचे फिसली, एक साल के निचले स्तर के करीब पहुंचीबाज़ार
29 अक्तू॰ 2026, 12:25 pm (3 मिनट पहले)· 1

फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले के बाद चांदी 53.50 डॉलर से नीचे फिसली, एक साल के निचले स्तर के करीब पहुंची

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को 3.75% से 4.00% पर स्थिर रखने और सीमित भविष्य मार्गदर्शन देने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय नरमी देखी जा रही है, जिससे यह कीमती धातु अपने एक साल के निचले स्तर के करीब पहुंच गई है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीति की समीक्षा में प्रमुख उधारी दरों को बिना किसी बदलाव के 3.75% से 4.00% के दायरे में बरकरार रखने के फैसले के बाद यह दबाव बना। नीति निर्माताओं की ओर से भविष्य में दरों में कटौती को लेकर कोई स्पष्ट या आक्रामक संकेत न मिलने के कारण डॉलर को समर्थन मिला, जिसका सीधा असर डॉलर में कारोबार होने वाली चांदी पर पड़ा और यह फिसलकर 53.50 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे आ गई।

फेडरल रिजर्व का नीतिगत रुख और आर्थिक आकलन

फेडरल रिजर्व ने अपनी नीतिगत समीक्षा बैठक के समापन पर अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद का हवाला देते हुए नीतिगत दरों को स्थिर रखा। केंद्रीय बैंक के आधिकारिक बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि समग्र आर्थिक गतिविधियों में लगातार विस्तार हो रहा है। घरेलू स्तर पर उपभोक्ता खर्च मजबूत बना हुआ है, व्यापारिक पूंजी निवेश ठोस स्थिति में है और उत्पादकता वृद्धि में भी उल्लेखनीय मजबूती दर्ज की जा रही है।

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रोजगार संबंधी अपने मुख्य दायित्व के संदर्भ में नीति निर्माताओं ने संतोष व्यक्त किया। बैंक ने पाया कि श्रम बाजार में नौकरियों की वृद्धि दर कार्यबल के विस्तार की गति के पूरी तरह अनुरूप बनी हुई है, जबकि बेरोजगारी दर में बहुत कम बदलाव देखने को मिला है। इन सभी कारकों ने यह दर्शाया कि अर्थव्यवस्था किसी गंभीर मंदी के दबाव में नहीं है, जिससे ब्याज दरों को ऊंचा रखने की केंद्रीय बैंक की रणनीति को बल मिला।

अध्यक्ष केविन वॉर्श का मुद्रास्फीति और स्थिरता पर जोर

फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श ने बैठक के बाद फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से दोहराया कि नीति निर्धारण समिति कीमतों में स्थिरता बहाल करने और मुद्रास्फीति को 2% के अनिवार्य लक्ष्य तक वापस लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वॉर्श ने बल देकर कहा कि देश की बुनियादी अर्थव्यवस्था काफी मजबूत बनी हुई है और उसे किसी तात्कालिक कृत्रिम प्रोत्साहन की आवश्यकता नहीं दिखती।

मौद्रिक नीति की भविष्य की समय-सारणी पर प्रकाश डालते हुए केविन वॉर्श ने आगे की योजना भी साझा की। उन्होंने बताया कि केंद्रीय बैंक अगले वर्ष कुल आठ बैठकें आयोजित करेगा, जिसमें एक बैठक बिना किसी औपचारिक मतदान के संपन्न होगी। इसके साथ ही उन्होंने यह अनुमान भी जताया कि वर्ष 2028 में नीति-निर्धारक संस्था की छह बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बयानों ने बाजार को यह संदेश दिया कि नीति निर्माता किसी भी जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय दीर्घकालिक स्थिरता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

पीसीई मुद्रास्फीति सूचकांक पर टिकीं निवेशकों की निगाहें

फेडरल रिजर्व के इस फैसले के बाद वित्तीय बाजारों के प्रतिभागियों का पूरा ध्यान अब आगामी अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई मूल्य सूचकांक पर टिक गया है। यह सूचकांक फेडरल रिजर्व का पसंदीदा मुद्रास्फीति पैमाना माना जाता है और मौद्रिक नीति की भावी दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कारोबारी यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि मुद्रास्फीति के दबाव में किस हद तक कमी आ रही है, ताकि अगली तिमाहियों में ब्याज दरों की चाल का सटीक अनुमान लगाया जा सके।

कमोडिटी ट्रेडिंग एडवाइजर्स की बिकवाली और धातुओं का रुख

कीमती धातुओं के बाजार में व्यवस्थित प्रवाह की स्थिति का विश्लेषण करते हुए टीडी सिक्योरिटीज ने संस्थागत निवेशकों के कदमों पर महत्वपूर्ण विवरण साझा किया है। संस्थान के अनुसार, हालिया तकनीकी गतिविधियों में कमोडिटी ट्रेडिंग एडवाइजर्स (सीटीए) ने धातु खंड में अपनी स्थिति को नए सिरे से समायोजित किया है। इस संदर्भ में उल्लेख किया गया कि धातु बाजारों में सीटीए सक्रिय रूप से चांदी के विक्रेता बने हुए हैं, जबकि दूसरी ओर वे जिंक और लेड जैसी औद्योगिक धातुओं की खरीदारी कर रहे हैं।

यह प्रवाह कीमती धातुओं और बुनियादी औद्योगिक धातुओं के बीच के स्पष्ट विभाजन को उजागर करता है। जहां एक ओर उच्च ब्याज दरों के बने रहने की संभावनाओं के बीच निवेशक चांदी में अपनी मौजूदा होल्डिंग्स को कम कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विनिर्माण चक्र से जुड़ी जिंक और लेड जैसी धातुओं में चुनिंदा रूप से नई स्थिति बना रहे हैं।

निवेश परिसंपत्ति के रूप में चांदी की बुनियादी भूमिका

चांदी विश्वभर के वित्तीय बाजारों में अत्यधिक कारोबार की जाने वाली प्रमुख कीमती धातु है। मानव इतिहास में इसका उपयोग मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में सदियों से होता आया है। हालांकि वैश्विक लोकप्रियता और केंद्रीय बैंकों के प्राथमिक भंडार के संदर्भ में यह सोने की तुलना में दूसरे स्थान पर आती है, फिर भी निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने, इसके आंतरिक मूल्य का लाभ उठाने और उच्च मुद्रास्फीति के दौर में संभावित सुरक्षा कवच के रूप में चांदी का व्यापक उपयोग करते हैं।

बाजार में निवेशक विभिन्न तरीकों से इसमें पूंजी लगाते हैं। पारंपरिक निवेशक सिक्कों अथवा सिल्लियों के रूप में भौतिक चांदी की सीधी खरीद करते हैं। वहीं आधुनिक वित्तीय साधनों में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) अत्यंत लोकप्रिय हैं, जो अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजारों में धातु के मूल्य की गतिविधियों को सीधे ट्रैक करते हैं और बिना भंडारण के जोखिम के लिक्विडिटी प्रदान करते हैं।

मूल्य निर्धारण को प्रभावित करने वाले व्यापक कारक

चांदी के भाव अनेक जटिल वित्तीय और आर्थिक कारकों के संतुलन पर निर्भर करते हैं। जब भी विश्व में भू-राजनीतिक अस्थिरता पैदा होती है या किसी गहरी आर्थिक मंदी का भय सताता है, तो सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में चांदी की मांग और कीमतों में तेजी देखी जाती है, हालांकि यह तेजी सोने के मुकाबले सामान्यतः सीमित रहती है। इसके अलावा, चूंकि चांदी एक ऐसी परिसंपत्ति है जिस पर कोई ब्याज या लाभांश नहीं मिलता, इसलिए कम ब्याज दरों के माहौल में इसकी आकर्षण क्षमता बढ़ती है और उच्च ब्याज दरों में इस पर बिकवाली का दबाव आता है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर का व्यवहार भी चांदी की दिशा तय करने में बेहद निर्णायक होता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर इसका मूल्य डॉलर में (XAG/USD) निर्धारित होता है। जब भी अमेरिकी डॉलर में मजबूती आती है, विदेशी खरीदारों के लिए यह महंगी हो जाती है जिससे कीमतों पर लगाम लगती है। इसके विपरीत, डॉलर के कमजोर होने पर चांदी में जोरदार उछाल देखने को मिलता है। खनन आपूर्ति, रीसाइक्लिंग की दरें और निवेश मांग भी इसकी कीमतों को प्रभावित करती हैं, खासकर यह देखते हुए कि भूगर्भीय रूप से चांदी की उपलब्धता सोने की तुलना में कहीं अधिक प्रचुर है।

औद्योगिक उपयोगिता और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की मांग

चांदी केवल एक वित्तीय संपत्ति ही नहीं है, बल्कि आधुनिक विनिर्माण में इसकी भारी औद्योगिक मांग है। इसकी विद्युत चालकता सभी धातुओं में सबसे अधिक है, जो तांबे और सोने से भी श्रेष्ठ मानी जाती है। इसी अद्वितीय गुण के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग और तेजी से बढ़ते सौर ऊर्जा क्षेत्र में फोटोवोल्टिक पैनल बनाने के लिए चांदी का बड़े पैमाने पर उपभोग किया जाता है। जब इन आधुनिक उद्योगों में मांग तेज होती है तो कीमतें उछलती हैं, जबकि औद्योगिक सुस्ती इसके भाव को नीचे खींचती है।

अमेरिका, चीन और भारत की अर्थव्यवस्थाओं की घरेलू गतिविधियां भी चांदी के मूल्य निर्धारण में भारी भूमिका निभाती हैं। अमेरिका और विशेष रूप से चीन के विशाल विनिर्माण क्षेत्र विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं में चांदी की भारी मात्रा का उपयोग करते हैं। दूसरी ओर, भारत में आभूषणों, कलाकृतियों और घरेलू निवेश के लिए उपभोक्ताओं की गहरी मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल्य संतुलन को मजबूती प्रदान करने में केंद्रीय कारक का काम करती है।

गोल्ड-सिल्वर अनुपात और संबंधित परिसंपत्तियों का हाल

ऐतिहासिक रूप से चांदी की चाल काफी हद तक सोने की दिशा का अनुसरण करती है। जब सुरक्षित निवेश मांग के चलते सोने के भाव चढ़ते हैं, तो चांदी भी उसी राह पर आगे बढ़ती है। बाजार विश्लेषक इन दोनों की तुलना के लिए गोल्ड-सिल्वर अनुपात का उपयोग करते हैं, जो यह दर्शाता है कि एक औंस सोने का मूल्य चुकाने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी। यदि यह अनुपात बहुत अधिक हो जाता है, तो कुछ विश्लेषक इसे चांदी के अवमूल्यन या सोने के अत्यधिक महंगे होने का संकेत मानते हैं। इसके विपरीत, अनुपात में गिरावट यह दर्शाती है कि चांदी की तुलना में सोना सस्ता हो रहा है।

अन्य परिसंपत्तियों की बात करें तो बुधवार को फेडरल रिजर्व के मौद्रिक नीति वक्तव्य के बाद अमेरिकी डॉलर ने सुधारात्मक गिरावट से उबरते हुए वापसी की, जिससे सोने पर दबाव बना। सोना 0.65% गिरकर लगभग 4,040 डॉलर के स्तर पर आ गया, जिससे उसकी लगातार तीन सत्रों की बढ़त का सिलसिला थम गया।

विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले मजबूती दिखाई और एयूडी/यूएसडी जोड़ी चढ़कर लगभग 0.7055 के स्तर पर पहुंच गई। ऑस्ट्रेलिया में आए उच्च मुद्रास्फीति आंकड़ों ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को हवा दी है। इस बीच, जापानी मुद्रा के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (यूएसडी/जेपीवाई) 158.00 के पार निकल गया। डॉलर में निचले स्तरों से खरीदारी देखी गई, हालांकि निवेशक तीसरी तिमाही के शुरुआती जीडीपी आंकड़ों, पीसीई मुद्रास्फीति रिपोर्ट और शुक्रवार को आने वाली बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, जहां दिसंबर में संभावित दर वृद्धि की उम्मीदें बढ़ रही हैं।

सवाल-जवाब

फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों पर क्या फैसला लिया?
फेडरल रिजर्व ने अपनी मौद्रिक नीति बैठक में प्रमुख ब्याज दरों को बिना किसी बदलाव के 3.75% से 4.00% के दायरे में स्थिर रखा है।
चांदी की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
ब्याज दरों का ऊंचा बना रहना, फेड द्वारा जल्द कटौती के संकेत न देना और कमोडिटी फंड्स (सीटीए) द्वारा चांदी की बिकवाली इसकी मुख्य वजहें हैं।
फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श ने आगे की क्या योजना बताई?
केविन वॉर्श ने बताया कि अगले वर्ष केंद्रीय बैंक की आठ बैठकें होंगी, जिनमें एक बिना मतदान के होगी, और 2028 में छह नीतिगत बैठकें आयोजित की जाएंगी।
बाजार प्रतिभागी अब किस महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े का इंतजार कर रहे हैं?
ट्रेडर्स और विश्लेषक अब आगामी अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय (पीसीई) मूल्य सूचकांक का इंतजार कर रहे हैं, जो फेड का पसंदीदा मुद्रास्फीति पैमाना है।
सोने और अन्य मुद्राओं का इस फैसले पर क्या असर पड़ा?
सोना 0.65% गिरकर लगभग 4,040 डॉलर पर आ गया, जबकि डॉलर मजबूत होकर जापानी येन के मुकाबले 158.00 के पार निकल गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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