पश्चिम एशिया के अशांत क्षेत्र में सैन्य संघर्ष का दायरा एक बार फिर तेजी से पैर पसार रहा है। सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोही लगातार एक-दूसरे के अहम ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाने में लगे हैं। इस सैन्य तनातनी में हूती लड़ाके सऊदी अरब के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के साथ-साथ लाल सागर से गुजरने वाले मालवाहक और व्यापारिक समुद्री जहाजों को भी निशाना बना रहे हैं। रणनीति के तहत हूतियों ने इस जलक्षेत्र में बेहद अहम माने जाने वाले बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के कई रणनीतिक द्वीपों पर अपना कब्जा जमा लिया है। इन आक्रामक गतिविधियों के बीच यह गंभीर सवाल उठ रहा था कि वाशिंगटन अपने पुराने सहयोगी रियाद के बचाव में सीधे तौर पर क्यों नहीं उतर रहा है।
सऊदी क्राउन प्रिंस के अनुरोध पर तैयार हुआ था हमला
इस पूरे घटनाक्रम पर सामने आई नई जानकारी से साफ हुआ है कि अमेरिकी सेना ने यमन में मौजूद हूती विद्रोहियों के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान की पूरी तैयारी कर ली थी। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के विशेष आग्रह के बाद अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने यमन के भीतर हूती विद्रोहियों के कई रणनीतिक और सैन्य ठिकानों की पहचान कर ली थी। अमेरिकी सशस्त्र बल इन ठिकानों पर तुरंत हमला बोलने के लिए पूरी तरह तैयार खड़े थे। हालांकि, बिल्कुल आखिरी वक्त पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना रुख बदल लिया और हूतियों पर होने वाले इन प्रस्तावित हमलों पर तुरंत रोक लगाने का आदेश दे दिया।
निर्णय बदलने की अंदरूनी प्रक्रिया
इस सैन्य फैसले से जुड़े घटनाक्रम के ब्योरे के मुताबिक, 16 सितंबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सुरक्षा सलाहकारों के साथ बैठक में यह स्पष्ट कहा था कि वह हूती विद्रोहियों पर प्रत्यक्ष हमला करने के समर्थन में बिल्कुल नहीं हैं। इसके कुछ ही समय बाद राष्ट्रपति ट्रंप और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच सीधी उच्चस्तरीय बातचीत हुई। इस अहम चर्चा के उपरांत ट्रंप अपने पहले के रुख से हटे और उन्होंने हूतियों पर सीधा हमला करने का औपचारिक निर्देश जारी कर दिया। आदेश मिलते ही पेंटागन ने लक्ष्यों की रूपरेखा अंतिम रूप से तय कर दी और सैन्य इकाइयां हमले के लिए मुस्तैद हो गईं। लेकिन सैन्य कार्रवाई शुरू होने से ऐन पहले ट्रंप ने एक बार फिर अचानक अपना मन बदल लिया और प्रस्तावित हमले की योजना को पूरी तरह निरस्त कर दिया।
नया सैन्य मोर्चा खोलने से परहेज कर रहा अमेरिका
सऊदी अरब और हूतियों के इस मौजूदा संघर्ष में वाशिंगटन सीधे जमीनी या हवाई टकराव से दूरी बनाए रखने की नीति पर चल रहा है। हाल ही में अमेरिका ने सऊदी अरब को 24.3 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के भारी हथियारों और सैन्य साजो-सामान की बिक्री को हरी झंडी दिखाई है। इस बड़े रक्षा सौदे में 48 आधुनिक F-35 लड़ाकू विमान और उनसे जुड़े उन्नत उपकरण शामिल हैं। इसके बावजूद अमेरिका इस क्षेत्रीय जंग में अपनी सेना को प्रत्यक्ष रूप से झोंकने के पक्ष में नहीं दिख रहा है। शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि वे हूतियों के खिलाफ कोई नया सैन्य मोर्चा नहीं खोलना चाहते, क्योंकि उनकी मौजूदा प्राथमिकताएं पहले से ही ईरान के साथ जारी गतिरोध और चुनौतियों से निपटने पर केंद्रित हैं। हालांकि, अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह सऊदी अरब को सुरक्षा प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक सामरिक मदद देना आगे भी जारी रखेगा।





















