वाशिंगटन स्थित अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बुधवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत और तुर्किये से जुड़े कई कारोबारियों तथा व्यापारिक इकाइयों पर आर्थिक पाबंदियां लगा दी हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन लोगों और संस्थाओं ने अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों को दरकिनार करते हुए ईरान को तेल का अवैध व्यापार जारी रखने में सीधी मदद पहुंचाई है. इस पूरी कार्रवाई का मुख्य निशाना भारतीय कारोबारी सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद, उनके साथ जुड़े दो अन्य भारतीय नागरिक और उनसे जुड़ी नौ व्यापारिक कंपनियां और संस्थाएं बनी हैं. अमेरिकी जांचकर्ताओं के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क ने फर्जी दस्तावेजों और जहाजों के गैरकानूनी पंजीकरण के जरिए ईरानी तेल को वैश्विक बाजारों में पहुंचाने का काम किया है.
'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत हुई कार्रवाई
अमेरिकी वित्त मंत्रालय की यह ताजा कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के विशेष अभियान 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के हिस्से के रूप में सामने आई है. इस अभियान की मूल रणनीति ईरान के तेल निर्यात से होने वाले राजस्व को पूरी तरह समाप्त करना और उसके आर्थिक तंत्र पर अत्यधिक दबाव कायम करना है. अमेरिकी अधिकारियों का स्पष्ट आरोप है कि सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद इस पूरे अंतरराष्ट्रीय मददगार गिरोह का नेतृत्व कर रहे थे. इन दोनों के अतिरिक्त नेटवर्क में शामिल दो अन्य भारतीय नागरिकों के नाम भी पाबंदियों की सूची में दर्ज किए गए हैं, साथ ही शर्मा के नियंत्रण वाली नौ कंपनियों पर भी तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं.
फर्जी कागजातों और झंडों के जरिए छिपाई गई जहाजों की पहचान
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के विवरण के मुताबिक, शर्मा और उनके साझेदारों ने कई विदेशी सरकारों के नाम का दुरुपयोग करते हुए समुद्री आवागमन के फर्जी रजिस्ट्रेशन और प्रमाण पत्र तैयार किए. इस धोखाधड़ी का इस्तेमाल उन प्रतिबंधित जहाजों की पहचान छिपाने के लिए किया जाता था, जो ईरानी तेल को लेकर समुद्र के रास्ते अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचा रहे थे. जांच में यह सामने आया कि इस नेटवर्क ने गयाना, इस्वातिनी और लाओस जैसे देशों के झूठे झंडे और जाली तकनीकी प्रमाण पत्र जहाजों को मुहैया कराए. ऐसे जहाजों में कई ऐसे पोत भी शामिल पाए गए जो सीधे तौर पर ईरानी सेना और उससे जुड़े विंगों के लिए काम कर रहे थे. इस छल के जरिए ईरान अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचकर अपने कच्चे तेल को दुनिया के बाजारों में बेचने में सफल हो रहा था.
तुर्किये की विमानन सेवा कंपनी पर भी गाज गिरी
अमेरिकी प्रशासन की यह कार्रवाई केवल भारत की समुद्री कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें तुर्किये की एक प्रमुख ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी फुगो ग्राउंड सर्विसेज इंक को भी घेरे में लिया गया है. अमेरिका का कहना है कि तुर्किये की यह कंपनी प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइंस को एयरपोर्ट पर नियमित ग्राउंड हैंडलिंग और जरूरी तकनीकी सेवाएं दे रही थी. इस कंपनी पर प्रतिबंध लगाकर वाशिंगटन ने संकेत दिया है कि हवाई क्षेत्र में भी ईरान के साथ व्यापारिक सहयोग करने वाली अंतरराष्ट्रीय इकाइयों को बख्शा नहीं जाएगा.
ईरान की मुद्रा रिकॉर्ड निचले स्तर पर और महंगाई 90 प्रतिशत के करीब
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इन पाबंदियों पर बात करते हुए स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति या व्यापारिक संस्था ईरान को वित्तीय या तकनीकी सहारा देगी, उसके खिलाफ दंडात्मक कदम आगे भी जारी रहेंगे. उन्होंने साफ चेतावनी दी कि चाहे जमीन का रास्ता हो, समुद्री मार्ग हो या फिर हवाई क्षेत्र, किसी भी माध्यम से ईरान की मदद करने वालों पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे. अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इस चौतरफा आर्थिक दबाव के कारण ईरानी अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा गई है. ईरान की राष्ट्रीय मुद्रा रियाल ऐतिहासिक रूप से अपने सबसे निचले स्तर तक लुढ़क चुकी है, जबकि देश में महंगाई का स्तर लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है.
प्रतिबंधों का दायरा कंपनियों तक, सरकार से टकराव नहीं
ट्रंप प्रशासन के इस कदम से स्पष्ट संकेत मिलता है कि अमेरिका अब अपना शिकंजा केवल ईरान के घरेलू संस्थानों तक सीमित रखने के बजाय दुनिया के अन्य देशों में फैले उसके सहायक नेटवर्क तक बढ़ा चुका है. हालांकि, राजनीतिक और कूटनीतिक जानकारों के अनुसार इन पाबंदियों को भारत सरकार के खिलाफ उठाया गया कदम नहीं माना जा सकता. अमेरिका का ध्यान पूरी तरह उन खास व्यक्तियों और निजी कारोबारी फर्मों पर केंद्रित है, जिन पर नियमों का उल्लंघन कर ईरान के तेल सिंडिकेट की सहायता करने के ठोस आरोप पाए गए हैं.


















