अमेरिकी राज्य टेक्सास में सीनेट की चुनावी जंग दिन-ब-दिन और दिलचस्प होती जा रही है। राजनीतिक रैलियों, जोशीले नारों और कड़े बयानों के बीच डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जेम्स टालारिको ने मतदाताओं तक पहुंचने के लिए एक बिल्कुल अनूठा रास्ता चुना है। टालारिको ने पारंपरिक प्रचार के ढर्रे से इतर अपनी रसोई कला और सादगी भरे अंदाज से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। टेक्सास के इरविंग शहर में स्थित एक लोकप्रिय भारतीय भोजनालय में पहुंचकर उन्होंने गर्म तवे पर खुद अपने हाथों से बेहतरीन और कुरकुरा मसाला डोसा तैयार किया, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस अनोखी पहल को अब चुनावी गलियारों में सांस्कृतिक जुड़ाव की एक प्रभावी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
इरविंग के भोजनालय में डेमोक्रेट नेता की रसोई कला
चुनावी अभियान की भागदौड़ के बीच जेम्स टालारिको हाल ही में इरविंग स्थित प्रसिद्ध रेस्टोरेंट मदिरा एन मसाला पहुंचे। वहां उनका इरादा केवल एक ग्राहक के तौर पर बैठकर खाना खाने का नहीं था, बल्कि उन्होंने सीधे भोजनालय के रसोईघर में प्रवेश किया। भारतीय व्यंजनों के प्रति अपने विशेष आकर्षण को दर्शाते हुए उन्होंने खुद खाना पकाने की इच्छा जताई। उनके इस कदम ने वहां काम कर रहे कर्मचारियों और मौजूद ग्राहकों दोनों को हैरान कर दिया।
वायरल फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि टालारिको बेहद ध्यान और गंभीरता के साथ तवे के सामने खड़े हैं। उनके बगल में मौजूद एक महिला उन्हें समझा रही थी कि डोसे के घोल यानी बैटर को तवे पर कैसे गोल घुमाते हुए फैलाना है और उसे सही तापमान पर कैसे क्रिस्पी बनाना है। हैरान करने वाली बात यह रही कि किसी पेशेवर रसोइए की तरह पहली ही कोशिश में टालारिको ने एक गोल, पतला और बेहद कुरकुरा मसाला डोसा बनाकर तैयार कर दिया। वहां मौजूद लोगों ने उनकी इस पहली कोशिश की जमकर सराहना की।
इंटरनेट पर छाया अनूठा देसी अंदाज
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया मंचों पर आते ही चर्चा का विषय बन गया और लोगों की प्रतिक्रियाएं उमड़ पड़ीं। आम तौर पर पश्चिमी देशों और खास तौर पर अमेरिका में राजनेताओं की छवि काफी औपचारिक, सख्त और आम नागरिकों की सामान्य दिनचर्या से कटी हुई मानी जाती है। ऐसे माहौल में किसी प्रमुख अमेरिकी उम्मीदवार का भारतीय रसोई में जाना, तवे पर डोसा फैलाना और उस संस्कृति का सम्मान करना लोगों को बेहद भा रहा है।
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने उत्साह जताते हुए लिखा कि उन्हें यह शख्स बहुत पसंद आया, जबकि एक अन्य यूजर ने कहा कि इस तरह का दृश्य देखकर उन्हें बेहद खुशी हुई। वहीं तीसरे यूजर ने तैयार किए गए डोसे के रंग-रूप की तारीफ करते हुए लिखा कि यह दिखने में बेहद स्वादिष्ट लग रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक वीडियो नहीं है, बल्कि भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के मतदाताओं के साथ सीधा भावनात्मक नाता जोड़ने का एक बेहतरीन कदम साबित हो रहा है।
सर्वे में दक्षिण एशियाई मतदाताओं का भारी समर्थन
टालारिको का यह अंदाज ऐसे समय में सामने आया है जब हालिया जनसांख्यिकीय सर्वेक्षणों में दक्षिण एशियाई समुदाय की राजनीतिक प्राथमिकताओं पर अहम आंकड़े सामने आए हैं। साउथ एशियन अमेरिकन वोटर एम्पावरमेंट ऑफ टेक्सस और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो द्वारा संयुक्त रूप से जारी किए गए एक नए विस्तृत सर्वेक्षण में पाया गया कि टेक्सास के दक्षिण एशियाई मतदाता भारी संख्या में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में खड़े हैं।
इस सर्वेक्षण के अनुसार, अमेरिकी सीनेट की दौड़ में पंजीकृत दक्षिण एशियाई मतदाताओं में से 66 प्रतिशत लोग डेमोक्रेट जेम्स टालारिको का पुरजोर समर्थन कर रहे हैं। इसके विपरीत, रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन को इस समुदाय के केवल 21 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन हासिल हुआ है। यह अंतर दिखाता है कि इस महत्वपूर्ण जनसांख्यिकी के बीच टालारिको की पकड़ कितनी मजबूत है।
इसी तरह गवर्नर पद की चुनावी दौड़ में भी यही रुझान नजर आया। सर्वेक्षण में 63 प्रतिशत दक्षिण एशियाई मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार गीना हिनोजोसा का समर्थन किया, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवार ग्रेग एबॉट को सिर्फ 27 प्रतिशत लोगों का साथ मिल सका। इसके अलावा, सर्वेक्षण ने समुदाय की सुरक्षा से जुड़ी एक गहरी चिंता को भी उजागर किया है। आंकड़ों के मुताबिक, 58 प्रतिशत दक्षिण एशियाई लोगों ने पिछले एक साल के दौरान नस्ल, धर्म अथवा विदेशी मूल के आधार पर ऑनलाइन उत्पीड़न, धमकियों और नफरत का सामना किया है। ऐसे में समुदाय ऐसे जनप्रतिनिधियों की तलाश में है जो उनकी पहचान और सुरक्षा के प्रति संवेदनशील हों।
केन पैक्सटन के खिलाफ कांटे की टक्कर
जेम्स टालारिको जिस चुनावी मुकाबले में उतरे हैं, वह इस समय पूरे अमेरिका की सबसे चर्चित और कठिन राजनीतिक लड़ाइयों में गिना जा रहा है। उनका सीधा मुकाबला रिपब्लिकन पार्टी के कद्दावर नेता और टेक्सास के अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन से है। टेक्सास की यह सीनेट सीट दोनों ही प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा का बड़ा प्रश्न बनी हुई है और राष्ट्रीय स्तर पर इस पर नजर रखी जा रही है।
टेक्सास सदर्न यूनिवर्सिटी द्वारा हाल ही में जारी एक ताजा जनमत सर्वेक्षण के अनुसार, टालारिको अपने प्रतिद्वंद्वी केन पैक्सटन के मुकाबले 2 प्रतिशत अंकों की मामूली बढ़त बनाए हुए हैं। इस सर्वेक्षण में 49 प्रतिशत संभावित मतदाताओं ने टालारिको के पक्ष में अपनी राय दी, जबकि 47 प्रतिशत मतदाता पैक्सटन के साथ खड़े दिखाई दिए। पैक्सटन के लिए सबसे बड़ी चुनौती सत्ता विरोधी लहर है, जहां 57 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने उनके प्रति असंतोष व्यक्त किया है। मतदाताओं की इस नाराजगी से टालारिको की चुनावी स्थिति को मजबूती मिलती दिख रही है।
क्या रंग लाएगी चुनावी थाली की यह राजनीति
आधुनिक राजनीति में मतदाताओं का विश्वास जीतने के लिए केवल मंचों से दिए जाने वाले लंबे भाषण पर्याप्त नहीं होते, बल्कि उनके सांस्कृतिक परिवेश में सहजता से ढलना भी उतना ही असरदार साबित होता है। दक्षिण एशियाई समुदाय जहां एक तरफ सामाजिक भेदभाव और असुरक्षा के खिलाफ बदलाव की उम्मीद कर रहा है, वहीं टालारिको का यह सरल, सहज और खानपान के प्रति आदर दिखाने वाला रूप उन्हें स्थानीय प्रवासियों के और करीब ला रहा है। अब चुनावी नतीजों के आने पर ही यह साफ हो पाएगा कि भारतीय भोजनालय के तवे से निकला यह गर्म डोसा टालारिको को अमेरिकी संसद की दहलीज तक पहुंचाने में कितना मददगार साबित होता है।
























