अमेरिकी वित्तीय तंत्र में मूल्य वृद्धि का संकट केवल कच्चे तेल या ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक आर्थिक गतिविधियों में इसकी जड़ें गहरी बनी हुई हैं। फेडरल रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारी काशकारी ने आर्थिक परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि मुद्रास्फीति वर्तमान में भी काफी ऊंचे पायदान पर टिकी है। इसके साथ ही उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक संघर्षों और विपरीत परिस्थितियों के बीच भी घरेलू उत्पादन क्षमता जुझारू बनी हुई है, कार्यबल की मांग सशक्त है और उत्पादकता के मोर्चे पर कुछ उत्साहजनक संकेत दिखाई देने लगे हैं। इस पृष्ठभूमि के बीच मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जहां अमेरिकी डॉलर सूचकांक शून्य दशमलव शून्य सात प्रतिशत की बढ़त के साथ एक सौ दशमलव तीन शून्य के स्तर पर दर्ज किया गया।
मूल्य दबाव और वास्तविक अर्थव्यवस्था का संतुलन
नीतिगत प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए काशकारी ने यह उम्मीद जताई कि केवल केंद्रीय बैंक के उपायों के बजाय शासन तंत्र के अन्य अंगों तथा वास्तविक अर्थव्यवस्था से भी मूल्य स्थिरता बहाल करने में ठोस सहयोग मिलेगा। उन्होंने इस तथ्य पर विशेष बल दिया कि लागत में वृद्धि का फैलाव ऊर्जा लागतों के दायरे से बाहर निकल चुका है। एक ओर जहां आर्थिक विस्तार की गति खासी सुदृढ़ बनी हुई है, वहीं उम्मीद की जा रही है कि निरंतर उत्पादन वृद्धि आगे चलकर कीमतों को नीचे लाने में सहायक सिद्ध हो सकती है। वित्तीय बाजारों की संरचना का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि बॉन्ड बाजार की संपूर्ण निगरानी और प्रबंधन ट्रेजरी का दायित्व है, जबकि केंद्रीय बैंक का ध्यान अपने प्राथमिक उद्देश्यों पर केंद्रित बना हुआ है।
विश्लेषणात्मक आकलनों के अनुसार काशकारी की टिप्पणियों से मौद्रिक नीति में किसी बड़े बदलाव के बजाय सख्त रुख के निरंतर बने रहने का संकेत मिलता है। भाषण विश्लेषण के पैमाने पर छह दशमलव दो अंक दर्ज किए गए, जो छह दशमलव तीन के ऐतिहासिक औसत के बेहद करीब है। यह स्थिति दर्शाती है कि नीति निर्माताओं का दृष्टिकोण संतुलित लेकिन सतर्क बना हुआ है। इसके अतिरिक्त फेड भावना सूचकांक एक दशमलव चार सात अंक गिरकर एक सौ पचास दशमलव छह एक पर आ गया। इस आंशिक नरमी के बाद भी यह सूचकांक तटस्थ स्तर सौ से काफी ऊपर टिका हुआ है। यह आंकड़ा सिद्ध करता है कि नीति निर्माता दरों में कटौती या ढील देने की जल्दबाजी में कतई नहीं हैं और मौजूदा आर्थिक मजबूती उन्हें दबावों की समीक्षा के लिए पर्याप्त समय प्रदान कर रही है।
फेडरल रिजर्व की दोहरी जिम्मेदारी और ब्याज दरों का तंत्र
संयुक्त राज्य अमेरिका में समग्र मौद्रिक दिशानिर्देशों का निर्धारण फेडरल रिजर्व द्वारा संचालित किया जाता है। केंद्रीय बैंक को दो प्रमुख वैधानिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिनमें कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करना और पूर्ण रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना शामिल है। इन दोनों लक्ष्यों को साधने के लिए केंद्रीय बैंक का मुख्य साधन अल्पकालिक ब्याज दरों में फेरबदल करना है। जब उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें अत्यधिक तेजी से बढ़ने लगती हैं और वार्षिक मुद्रास्फीति बैंक के निर्धारित दो प्रतिशत के लक्ष्य को पार कर जाती है, तब नीति निर्माता उधार की दरों में बढ़ोतरी कर देते हैं। ऋण लागत महंगी होने से बाजार में खर्च की रफ्तार धीमी पड़ती है। साथ ही ऊंची प्रतिफल दरों के आकर्षण से विदेशी निवेशक अमेरिकी बाजार का रुख करते हैं, जिससे अमेरिकी मुद्रा डॉलर को स्वाभाविक मजबूती मिलती है।
इसके विपरीत जब आर्थिक रफ्तार सुस्त पड़ जाती है, मुद्रास्फीति दो प्रतिशत से नीचे फिसलती है अथवा बेरोजगारी की दर चिंताजनक स्तर तक पहुंच जाती है, तब बैंक उधार की लागत घटाने का मार्ग चुनता है। दरों में कटौती से ऋण लेना सुगम हो जाता है, वाणिज्यिक निवेश को गति मिलती है, हालांकि यह प्रक्रिया डॉलर के मूल्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। इन सभी रणनीतिक निर्णयों को अमली जामा पहनाने के लिए वर्ष भर में आठ नियमित नीतिगत बैठकें आयोजित की जाती हैं। यह दायित्व फेडरल ओपन मार्केट कमेटी संभालती है, जिसमें कुल बारह अधिकारी मतदान करते हैं। इनमें बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात स्थायी सदस्य, न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक के प्रमुख और बाकी ग्यारह क्षेत्रीय बैंकों में से बारी-बारी से एक-एक वर्ष के लिए चुने जाने वाले चार अध्यक्ष शामिल होते हैं।
असामान्य मौद्रिक उपाय और विदेशी मुद्रा परिदृश्य
गंभीर आर्थिक संकट या असाधारण मंदी के दौर में केंद्रीय बैंक मात्रात्मक सहजता जैसी गैर-पारंपरिक नीति का सहारा लेता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में नकदी का भारी प्रवाह सुनिश्चित किया जाता है। वर्ष दो हजार आठ के वैश्विक वित्तीय संकट के समय इस उपाय का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था, जिसके तहत नए डॉलर जारी कर वित्तीय संस्थाओं से उच्च गुणवत्ता वाले सुरक्षित बॉन्ड खरीदे जाते हैं। यह प्रक्रिया सामान्य तौर पर डॉलर की क्रय शक्ति को कमजोर करती है। इसके ठीक उलट जब केंद्रीय बैंक को बाजार से अतिरिक्त नकदी समेटनी होती है, तो मात्रात्मक सख्ती की व्यवस्था लागू की जाती है। इसमें परिपक्व होने वाले बॉन्ड के मूलधन का पुनर्निवेश बंद कर दिया जाता है, जिससे डॉलर को आंतरिक मजबूती प्राप्त होती है।
वैश्विक विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में भी इस नीतिगत रुख की स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनाई दे रही है। एशियाई कारोबारी सत्र में शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे कारोबारी दिन बढ़त बनाए रखते हुए शून्य दशमलव सात एक शून्य शून्य से ऊपर टिका रहा। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर बुलॉक के कड़े बयानों ने दरों में बढ़ोतरी के अनुमानों को हवा दी, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को संबल मिला, हालांकि अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी के बावजूद फेड के कड़े रुख और भू-राजनीतिक तनावों ने डॉलर की गिरावट को सीमित रखा। दूसरी तरफ यूरोपीय सत्र में डॉलर के मुकाबले जापानी येन में तेज गिरावट देखी गई और यह दो सप्ताह के नए शिखर के करीब एक सौ अट्ठावन के स्तर तक पहुंच गया।
बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को एक दशमलव शून्य शून्य प्रतिशत से बढ़ाकर एक दशमलव दो पांच प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय सात के मुकाबले दो मतों से लिया गया, जहां गवर्नर काजुओ उएदा ने स्पष्ट किया कि नीतिगत चरण में बदलाव आ चुका है। इसके बावजूद दो सदस्यों की असहमति के कारण येन पर बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। सुरक्षित निवेश के मोर्चे पर सोने की चमक बरकरार रही, जहां प्रति ट्रॉय औंस भाव चवालीस सौ डॉलर के स्तर के बिल्कुल निकट मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। कच्चे तेल की गिरती कीमतों और डॉलर में आई ताजा बिकवाली ने बहुमूल्य धातुओं में खरीदारी को लगातार समर्थन दिया है।

















