तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के समापन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा से जुड़ा एक अति-संवेदनशील मामला सामने आया। इंटेलिजेंस एजेंसियों को सूचना मिली थी कि जमीनी सतह से कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइल के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति के मुख्य विमान को निशाना बनाया जा सकता है। इस गंभीर खतरे की सूचना मिलते ही अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने तुरंत मोर्चा संभाला और राष्ट्रपति की यात्रा योजना में आख़िरी समय पर बड़ा बदलाव किया। सुरक्षा एजेंसियों ने राष्ट्रपति के लिए निर्धारित भव्य और आधुनिक विमान एयर फोर्स वन को छोड़ एक छोटे सैन्य विमान C-32A का चयन किया, ताकि डोनाल्ड ट्रंप को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
नाटो सम्मेलन के दौरान अंकारा में उपजा सुरक्षा संकट
जुलाई के महीने में जब तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन चल रहा था, उस वक्त मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव चरम सीमा पर पहुंच चुका था। इस वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति की तुर्की यात्रा के दौरान सुरक्षा खतरे की आशंका बेहद बढ़ गई थी। अंकारा दौरे के अंतिम दिन सीक्रेट सर्विस के पास एक बेहद गंभीर और तात्कालिक इनपुट आया, जिसमें यह संकेत दिया गया था कि राष्ट्रपति के विमान पर दागे जा सकने वाले कंधे वाली मिसाइल (MANPADS) का खतरा मंडरा रहा है। खतरे की प्रकृति इतनी गंभीर थी कि सुरक्षा अधिकारियों के पास वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने के लिए बहुत ही कम समय बचा था, जिसके कारण उन्हें एक आपातकालीन रणनीति लागू करनी पड़ी।
फूड ट्रक का सहारा लेकर चुपचाप बदला गया राष्ट्रपति का विमान
8 जुलाई को तुर्की से वापसी की उड़ान भरने से पहले सुरक्षा दल ने एक गोपनीय ऑपरेशन को अंजाम दिया। डोनाल्ड ट्रंप और उनके नजदीकी सहयोगियों ने गुप्त रूप से एयर फोर्स वन में सवार न होने का फैसला किया। राष्ट्रपति को हवाई अड्डे पर बिना किसी का ध्यान आकर्षित किए छोटे जेट C-32A तक पहुंचाने के लिए एक कैटरिंग वाले फूड ट्रक का इस्तेमाल किया गया। इस चालाकी से डोनाल्ड ट्रंप को छोटे विमान में सुरक्षित बैठा दिया गया। वहीं दूसरी ओर, वीआईपी उपस्थिति का भ्रम बनाए रखने के लिए एयर फोर्स वन को अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों, व्हाइट हाउस के कर्मचारियों और प्रेस प्रतिनिधियों के साथ अपने निर्धारित समय पर अलग से रवाना किया गया।
हमले के इरादे की पुष्टि और डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया
सुरक्षा से जुड़ी जानकारियों के अनुसार, हालांकि हमलावरों द्वारा किसी स्पष्ट या पूर्ण रूप से तैयार की गई हमले की योजना की जानकारी नहीं मिली थी, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लक्षित करने की ठोस मंशा के स्पष्ट संकेत मिले थे। इसी खतरे के आकलन के आधार पर दोनों विमानों को अपनी-अपनी उड़ान भरने की अनुमति दी गई, लेकिन राष्ट्रपति की मौजूदगी वाले विमान को बदल दिया गया। इस पूरे मामले पर मंगलवार को खुद डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया व्यक्त की और सीक्रेट सर्विस द्वारा विमान बदले जाने के सुझाव की पुष्टि की। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि उन्हें लगता है कि जिस छोटे विमान से उन्होंने उड़ान भरी थी, उस पर वास्तव में ज्यादा खतरा था, क्योंकि विरोधी तत्व उसी विमान को निशाना बनाने की अधिक कोशिश करते जिसमें राष्ट्रपति मौजूद थे।



















