अक्टूबर में शुक्र, बुध और सूर्य की बदलेगी चाल, 8 और 11 तारीख को बनेंगे खास योगरांची के किसान मुकेश ने आंगन में उगाई ग्वार फली, स्वाद और कमाई दोनों में निकली अव्वलबेकार प्लास्टिक बाल्टी और रस्सी से बनाएं रिंग टेक्सचर वाला शानदार सीमेंट प्लांटरबढ़ते बीपी और शुगर के बीच डॉक्टर ओंकार स्वामी ने समझाया सेहतमंद थाली का सही नियमट्रैक्टिव कैट 6 मिनी स्मार्ट कॉलर बिल्लियों की सेहत और लोकेशन ट्रैकिंग में कितना खरावेस्टइंडीज टी20 सीरीज से वॉशिंगटन सुंदर हुए रिलीज, नमन धीर को मिला मौकागोविंदा और करिश्मा कपूर के रोमांटिक ट्रैक ‘तुमसे कोई प्यारा’ का जादू तीन दशक बाद भी बरकरारईंधन संकट से घिरे अमेरिका का यूरोप पर भारी दबाव, फ्रांस और जर्मनी से मांगा आपातकालीन डीजल भंडारईटीएफ से निकासी और मुनाफावसूली के बीच बिटकॉइन, एथेरियम और एक्सआरपी में सुस्ती, अहम सपोर्ट पर टिकी नजरेंसिलचर घटना के बाद असम में मुख्यमंत्री के काफिले पर सख्त नियम, एंबुलेंस को प्राथमिकता देने का आदेश
ईंधन संकट से घिरे अमेरिका का यूरोप पर भारी दबाव, फ्रांस और जर्मनी से मांगा आपातकालीन डीजल भंडारअमेरिका
1 अक्तू॰ 2026, 6:01 pm (17 मिनट पहले)· 0

ईंधन संकट से घिरे अमेरिका का यूरोप पर भारी दबाव, फ्रांस और जर्मनी से मांगा आपातकालीन डीजल भंडार

घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों से जूझ रहे अमेरिका ने फ्रांस और जर्मनी से अपने आपातकालीन डीजल भंडार का एक बड़ा हिस्सा बाजार में उतारने को कहा है। अमेरिकी प्रशासन ने सहयोग न मिलने पर डीजल निर्यात रोकने का संकेत भी दिया है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और ईरान के साथ टकराव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और ईंधन बाजार पर बहुत गहरा दिखने लगा है। खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के चलते जहां तेल आपूर्ति बाधित हुई है, वहीं अमेरिका खुद अपने घरेलू मोर्चे पर ईंधन की अभूतपूर्व महंगाई का सामना कर रहा है। हूतियों द्वारा किए गए हमलों के कारण दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल निर्यातक सऊदी अरब से होने वाली सप्लाई काफी हद तक प्रभावित हुई है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुका है। इसका सीधा असर अमेरिकी खुदरा बाजार पर पड़ा है, जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतें 40 से 50 फीसदी तक उछल चुकी हैं। इस भारी मूल्यवृद्धि के कारण अमेरिका में राजनीतिक दबाव तेजी से बढ़ रहा है और इसी स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अपने करीबी यूरोपीय सहयोगियों की ओर रुख किया है।

सर्दियों का मौसम करीब आने के साथ ही अमेरिका में ऊर्जा की खपत और बढ़ने वाली है। आगामी मिड टर्म चुनावों के मद्देनजर ईंधन की महंगाई डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुकी है। घरेलू बाजार को राहत देने और अंतरराष्ट्रीय कीमतों को नीचे लाने के मकसद से अमेरिकी प्रशासन ने फ्रांस और जर्मनी से अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का उपयोग करने का आह्वान किया है। अमेरिका चाहता है कि दोनों यूरोपीय देश अपने आपातकालीन डिस्टिलेट और डीजल रिजर्व से भारी मात्रा में ईंधन बाजार में जारी करें, ताकि वैश्विक स्तर पर मची अफरा-तफरी को नियंत्रित किया जा सके।

ये भी पढ़ें

यूरोपीय संघ से 12 करोड़ बैरल डीजल जारी करने की मांग

अमेरिकी प्रशासन ने फ्रांस और जर्मनी के सामने एक बहुत बड़ी मांग रखी है। योजना के तहत यूरोपीय संघ से अगले छह महीनों के भीतर लगभग 120 मिलियन बैरल यानी 12 करोड़ बैरल डीजल खुले बाजार में उपलब्ध कराने को कहा गया है। यह मात्रा इतनी विशाल है कि यह पूरे यूरोपीय संघ के आपातकालीन डीजल और गैसोइल भंडार के 40 प्रतिशत से भी अधिक हिस्से के बराबर बैठती है। पूरे यूरोप में सामरिक भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा इन्हीं दो देशों के पास सुरक्षित है, जिसमें जर्मनी के पास करीब 56 लाख टन और फ्रांस के पास लगभग 82 लाख टन का डीजल भंडार मौजूद है।

सिर्फ अनुरोध करने के बजाय अमेरिका ने इस मामले में कड़ा रुख भी दिखाया है। अमेरिकी प्रशासन ने यह संकेत दिया है कि यदि यूरोपीय देश इस दिशा में सहयोग नहीं करते हैं, तो अमेरिका यूरोप को किए जाने वाले अपने डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने या उसे सीमित करने जैसे कड़े कदम उठा सकता है। यानी अमेरिका अपने स्वयं के निर्यात को रोकने की चेतावनी देकर सहयोगियों को उनके रणनीतिक रिजर्व खोलने के लिए विवश करने की रणनीति अपना रहा है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची अमेरिकी डीजल कीमतें

अमेरिका की इस आक्रामक कूटनीति के पीछे वहां की वास्तविक आर्थिक मजबूरी छिपी हुई है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी EIA के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि देश में डीजल की खुदरा कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। 28 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान अमेरिका में औसत खुदरा डीजल की कीमत 6.382 डॉलर प्रति गैलन दर्ज की गई। इससे ठीक एक सप्ताह पहले 21 सितंबर को यह आंकड़ा 6.529 डॉलर प्रति गैलन तक जा पहुंचा था। पूरे सितंबर महीने में खुदरा दरें अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तरों के इर्द-गिर्द बनी रहीं।

EIA के विश्लेषण के अनुसार, वैश्विक रिफाइनिंग नेटवर्क में व्यवधान और आपूर्ति की कमी ने अमेरिकी बाजार पर यह दबाव बनाया है। रूस, चीन और पश्चिम एशिया में रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने और आपूर्ति शृंखला टूटने का सीधा नुकसान अंतरराष्ट्रीय बाजार को उठाना पड़ा है। इसका सीधा असर अमेरिकी घरेलू इन्वेंट्री पर पड़ा है, जहां स्टॉक लगातार घट रहा है। आने वाले महीनों में सर्दियां शुरू होने पर कृषि कार्यों, भारी माल ढुलाई और विशेष रूप से अमेरिका के उत्तर-पूर्वी राज्यों में हीटिंग के लिए भारी मात्रा में डीजल की आवश्यकता होगी। EIA का अनुमान है कि 2026 की शेष अवधि में अमेरिकी डिस्टिलेट इन्वेंट्री अपने पांच साल के औसत स्तर से काफी नीचे ही बनी रहेगी।

उत्पादक होने के बावजूद अमेरिका में क्यों गहराया संकट?

यह एक विरोधाभास लग सकता है कि अमेरिका स्वयं दुनिया में डीजल का एक प्रमुख उत्पादक और बड़ा निर्यातक है, फिर भी वह गंभीर कमी से जूझ रहा है। इसकी मुख्य वजह वैश्विक बाजार में पैदा हुआ भारी मुनाफा और आपूर्ति अंतर है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डीजल की भारी किल्लत हुई, तो अमेरिकी रिफाइनरियों और उत्पादक कंपनियों को विदेशी खरीदारों से अत्यधिक ऊंची कीमतें मिलने लगीं। नतीजतन, अधिक लाभ कमाने के लिए बड़े पैमाने पर ईंधन बाहर भेजा गया।

EIA के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के दौरान कई महीनों में अमेरिकी डिस्टिलेट का शुद्ध निर्यात पिछले पांच वर्षों के उच्चतम स्तर पर या उससे भी ऊपर पहुंच गया। इस अंधाधुंध निर्यात के कारण अमेरिका के अपने घरेलू डिपो खाली होते चले गए। अब स्थिति यह बन गई है कि यदि ट्रंप प्रशासन घरेलू कीमतें घटाने के लिए निर्यात पर रोक लगाता है, तो विश्व बाजार में भारी तबाही मचेगी और मित्र देशों में ईंधन का हाहाकार मच जाएगा। दूसरी तरफ, यदि निर्यात पहले की तरह जारी रखा जाता है, तो अमेरिका की जनता को महंगाई से राहत दिलाना असंभव हो जाएगा। इसी दोराहे पर फंसे होने के कारण ट्रंप प्रशासन यूरोप के भंडारों का सहारा तलाश रहा है।

फ्रांस और जर्मनी के सामने क्या हैं चुनौतियां?

यूरोपीय संघ के लिए अपने रणनीतिक और आपातकालीन भंडारों को खोलना आसान निर्णय नहीं है। अंतरराष्ट्रीय नियमों और राष्ट्रीय नीतियों के तहत ये भंडार सामान्य व्यापारिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि युद्ध या गंभीर प्राकृतिक आपदा जैसी अप्रत्याशित आपात स्थितियों के लिए बचाकर रखे जाते हैं। यूरोपीय आयोग ने 29 सितंबर को अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि यूरोप में डीजल और जेट ईंधन की कीमतें पहले से ऊंची हैं और बाजार में आपूर्ति की तंगी बनी हुई है।

हालांकि आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि यूरोपीय संघ के रणनीतिक भंडार वर्तमान में मजबूत स्तर पर हैं और यदि बाजार में कोई गंभीर आपूर्ति बाधा उत्पन्न होती है तो उनका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बावजूद, यूरोपीय नीति नियंता इस बात को लेकर बेहद सतर्क हैं कि इन भंडारों को कब, किस मात्रा में और किन शर्तों के तहत बाजार में उतारा जाए। अपनी सुरक्षा कवच को अमेरिकी राजनीतिक दबाव के चलते इस तरह खाली कर देना यूरोपीय देशों के लिए एक बड़ा जोखिम भरा कदम साबित हो सकता है।

फ्रांस और जर्मनी ही निशाने पर क्यों?

अमेरिकी प्रशासन का खास तौर पर फ्रांस और जर्मनी पर ध्यान केंद्रित करने का एक ऐतिहासिक कारण भी है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इन दोनों देशों ने अतीत में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के तहत आपातकालीन तेल और पेट्रोलियम भंडार बाजार में जारी करने के अपने पुराने वादों को पूरी तरह से नहीं निभाया था। इसी अविश्वास और असंतोष के चलते अमेरिका अब उन पर सीधा और आक्रामक दबाव बना रहा है। इस पूरी खींचतान के बीच यूरोपीय आयोग, फ्रांस और जर्मनी की सरकारों के सामने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बचाने और अमेरिकी गठबंधन के दबाव को संभालने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।

सवाल-जवाब

अमेरिका ने फ्रांस और जर्मनी से क्या मांग की है?
अमेरिका ने फ्रांस और जर्मनी से अपने आपातकालीन डीजल भंडार में से अगले छह महीने में करीब 120 मिलियन बैरल डीजल बाजार में जारी करने को कहा है।
अमेरिका में खुदरा डीजल की कीमतें किस स्तर पर पहुंच गई हैं?
ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, 28 सितंबर को समाप्त सप्ताह में अमेरिका में औसत डीजल कीमत 6.382 डॉलर प्रति गैलन थी, जो 21 सितंबर को 6.529 डॉलर तक पहुंची थी।
यदि यूरोपीय देश सहयोग नहीं करते हैं तो अमेरिका ने क्या चेतावनी दी है?
अमेरिका ने संकेत दिया है कि यदि यूरोपीय देश रणनीतिक भंडार जारी नहीं करते हैं, तो वह यूरोप को होने वाले अपने डीजल निर्यात पर रोक लगाने पर विचार कर सकता है।
फ्रांस और जर्मनी के पास कितना आपातकालीन डीजल भंडार है?
आंकड़ों के अनुसार जर्मनी के पास करीब 56 लाख टन और फ्रांस के पास लगभग 82 लाख टन का आपातकालीन ईंधन भंडार मौजूद है।
अमेरिका स्वयं डीजल निर्यातक होने के बावजूद कमी क्यों झेल रहा है?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतें मिलने के कारण अमेरिकी कंपनियों ने भारी निर्यात किया, जिससे देश के घरेलू भंडार पांच साल के औसत से नीचे चले गए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp