वाशिंगटन और तेहरान के मध्य जारी राजनयिक संपर्कों के नाजुक दौर में पश्चिमी एशिया के सुरक्षा समीकरणों को लेकर भारी खींचतान सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तथा इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 31 अक्टूबर को एक उच्चस्तरीय टेलीफोन वार्ता की, जिसमें ईरान के साथ चल रहे कूटनीतिक संवाद और भविष्य की साझा कार्ययोजना पर आमने-सामने रुख साफ किया गया। दोनों रणनीतिक साझेदारों के बीच आगामी कदमों को लेकर सोच का स्पष्ट अंतर इस बातचीत में उभरकर सामने आया।
इजरायली नेतृत्व का मुख्य जोर इस बात पर है कि 3 नवंबर के अमेरिकी मध्यावधि मतदान के फौरन पश्चात तेहरान के विरुद्ध नए सिरे से रक्षा अभियान शुरू कर दिया जाए। यरुशलम को आशंका है कि चल रहे कूटनीतिक प्रयासों के नतीजे में कोई ऐसा अधकचरा समझौता हो सकता है, जिससे उसकी प्राथमिक सुरक्षा चिंताएं अनसुलझी रह जाएं। इसके विपरीत व्हाइट हाउस फिलहाल जारी कूटनीतिक बातचीत को समय देने का पक्षधर है और इस नाजुक प्रक्रिया में इजरायल की सीधी रुकावट से बचना चाहता है। अगर बातचीत किसी मुकाम पर नहीं पहुंचती, तो समीकरण पूरी तरह बदल भी सकते हैं। इस गोपनीय टेलीफोन संवाद पर दोनों देशों के आधिकारिक कार्यालयों ने कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है।
वार्ता की मेज के साथ सैन्य प्रहार की तैयारी
ट्रंप प्रशासन की कार्यशैली वार्ता के साथ सैन्य दबाव बनाए रखने की दोहरी नीति पर टिकी दिखती है। वे एक तरफ तेहरान के साथ किसी समझौते की संभावना तलाश रहे हैं, तो दूसरी तरफ हथियारों के इस्तेमाल की तैयारी को भी टेबल से नहीं हटाया गया है। कूटनीतिक प्रयासों और सैन्य दबाव का ऐसा ही मिला-जुला संतुलन जून 2025 के ऑपरेशन मिडनाइट हैमर तथा गत फरवरी में चलाए गए ऑपरेशन फियर्स फ्यूरी के समय भी देखने को मिला था।
कूटनीतिक चैनलों को सक्रिय करने की कड़ी में पिछले हफ्ते अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ रणनीतिकार मोहसेन रेजाई के नाम एक महत्वपूर्ण पत्र प्रेषित किया था। इस पत्र में ठप पड़े संवाद को पटरी पर लाने की संभावनाओं पर बल दिया गया था, जिसे बीते कई महीनों में वाशिंगटन द्वारा तेहरान को भेजा गया सर्वोच्च स्तर का कूटनीतिक संदेश माना गया।
परमाणु ठिकानों को लेकर ट्रंप की चेतावनी
सार्वजनिक मंच पर ट्रंप ने तेहरान के साथ हो रही प्रगति पर संतोष जताया है। 31 अक्टूबर को संवाददाताओं से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और उन्हें समझौते के लिए कोई हड़बड़ी नहीं है। हालांकि ट्रंप ने तेहरान के पिछले रिकॉर्ड का हवाला देते हुए भरोसा करने के प्रति सतर्कता भी जताई। उनके अनुसार तेहरान अक्सर पहले सहमति जताने के बाद अपनी प्रतिबद्धताओं से मुकर जाता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि ईरान की जमीन पर मौजूद एक या दो परमाणु ठिकानों का पेंच अभी फंसा हुआ है। भूमिगत पर्वतीय गुफाओं में बने परमाणु केंद्रों का संकेत देते हुए ट्रंप ने दावा किया कि पेंटागन के पास इन संदिग्ध ठिकानों को ध्वस्त करने की अचूक योजना पूरी तरह तैयार है, जिसे चंद घंटों के भीतर अमल में लाया जा सकता है।
कतर की मध्यस्थता और ईरान की सतर्क प्रतिक्रिया
खाड़ी क्षेत्र में तनाव थामने के उद्देश्य से कतर के राजनयिक लगातार तीसरे दिन ईरानी तंत्र से सक्रिय बातचीत में जुटे रहे। दोहा का उद्देश्य दोनों विरोधी देशों को सीधी मेज पर लाना है ताकि चुनाव बीतने के बाद इलाके में किसी नए खूनी सैन्य टकराव की नौबत न आए। कतर दोनों पक्षों को एक व्यावहारिक समझौते की ओर मोड़ना चाहता है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि अभी तक किसी औपचारिक समझौते पर दस्तखत नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि भावी बातचीत का स्वरूप इस बात पर निर्भर करेगा कि वाशिंगटन उनके उठाए गए बिंदुओं पर क्या रुख अपनाता है। ईरानी विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि उनका मुल्क कूटनीति के जरिए समाधान चाहता है और उम्मीद करता है कि अमेरिका युद्ध के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देगा। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच संवाद का चैनल खुला है, लेकिन परमाणु मसलों और संभावित हमलों की आशंका पर गतिरोध बरकरार है।



















