आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित एक शांत बस्ती में अंधेरा घिरते ही अजीबोगरीब दहशत फैल जाती है। पिमडी मंडल के अप्पाजीपेटा गांव में पिछले एक सप्ताह से अजीब संकट खड़ा हो गया है। हर रोज रात के ठीक 10 बजते ही अचानक रिहायशी मकानों की छतों पर भारी पत्थर गिरने लगते हैं। रात के सन्नाटे में छतों पर पत्थरों की तेज आवाज गूंजते ही लोग सहम जाते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चारों तरफ सतर्क पहरा होने के बावजूद पत्थर फेंकने वाले का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। इस अज्ञात उपद्रव ने ग्रामीणों के मन में भारी खौफ पैदा कर दिया है और लोग शाम ढलते ही खुद को कमरों में बंद कर लेने को मजबूर हैं।
टॉर्च और लाठियों से लैस पहरेदारों के सामने भी नहीं थमी पत्थरबाजी
लगातार हो रहे हमलों से परेशान होकर जब ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई, तो सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। गांव में चार पुलिस कांस्टेबलों की विशेष तैनाती की गई। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए गांव के 20 मजबूत युवाओं की टोली भी आगे आई। यह पूरा दल हाथों में तेज रोशनी वाली टॉर्च और लाठियां लेकर रातभर गलियों, खुले रास्तों और पास में मौजूद पहाड़ी इलाके पर लगातार निगरानी करता रहा। पूरी रात चौकसी बरतने के बावजूद रात 10 बजे के बाद पत्थरों की बारिश बदस्तूर जारी रही। सुरक्षाकर्मियों और पहरेदारों की मौजूदगी में भी हमलावर की परछाई तक नजर नहीं आई, जिससे सभी हैरान और परेशान हैं।
एस्बेस्टस की चादरें चकनाचूर, चोट और दहशत से उड़ी नींद
अप्पाजीपेटा गांव के अधिकतर मकानों पर एस्बेस्टस की शीट वाली छतें डली हुई हैं। लगातार गिर रहे भारी पत्थरों के प्रभाव से ये छतें टूटकर बिखर रही हैं। मलबे और पत्थरों के गिरने से कुछ ग्रामीणों को हल्की चोटें भी आई हैं। जानमाल के खतरे को देखते हुए ग्रामीण रातभर सो नहीं पा रहे हैं। मानसिक तनाव और अनहोनी के डर से कई परिवार इतने सहम गए हैं कि वे इसे किसी इंसान की शरारत मानने के बजाय भूत-प्रेत या किसी अदृश्य साए की हरकत समझने लगे हैं।
अतीत की अनसुलझी गुत्थियां और गहराता रहस्य
छतों पर इस प्रकार के रहस्यमय हमलों की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। तमिलनाडु के तिरुप्पुर और उसके नजदीकी क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की पत्थरबाजी से लंबे समय तक लोग आतंकित रहे थे, जिसका स्थायी खुलासा पुलिस आज तक पूरी तरह नहीं कर सकी है। अप्पाजीपेटा में भी यह सवाल जस का तस बना हुआ है कि क्या यह किसी असामाजिक तत्व की बेहद शातिर साजिश है या फिर इसके पीछे कोई और वजह है। फिलहाल पुलिस और ग्रामीण दोनों इस पहेली को सुलझाने की जद्दोजहद में जुटे हैं।
























