पाकिस्तान में संघीय सरकार और विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी पीटीआई के बीच कई दौर की बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म होने के बाद राजनीतिक टकराव गहरा गया है। वार्ता बेनतीजा रहने के तत्काल बाद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ने रविवार को राजधानी इस्लामाबाद की दिशा में अपना बहुप्रतीक्षित लॉन्ग मार्च शुरू कर दिया। इस आंदोलन की शुरुआत खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मरवत स्थित गांदी चौक से हुई, जहां से विशाल वाहनों का काफिला आगे के पड़ाव के लिए रवाना हुआ। इस मार्च की अगुवाई प्रांतीय मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और पार्टी की खैबर पख्तूनख्वा इकाई के अध्यक्ष जुनैद अकबर खान कर रहे हैं। काफिले के आगे बढ़ने के साथ ही इस्लामाबाद और खैबर पख्तूनख्वा की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है।
वार्ता का गतिरोध और प्रमुख मांगें
सरकार और पीटीआई के प्रतिनिधियों के बीच राजनीतिक तनातनी कम करने के मकसद से दो चरणों में विस्तृत बैठकें आयोजित की गई थीं। बातचीत का पहला दौर शुक्रवार को हुआ था, जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी बातें रखीं और चर्चा आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी। इसके बाद शनिवार शाम करीब 5 बजे दूसरे दौर की बैठक शुरू हुई। दोनों पक्षों के बीच शनिवार देर रात से लेकर रविवार तड़के तक कई घंटों तक मंथन चला, लेकिन अंततः यह संवाद पूरी तरह विफल हो गया। पीटीआई की मुख्य मांगों में रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद 73 वर्षीय इमरान खान से तत्काल व्यक्तिगत मुलाकात की अनुमति देना और उन्हें किसी उपयुक्त निजी अस्पताल में स्थानांतरित करना शामिल था, ताकि उनके निजी चिकित्सक उनकी स्वास्थ्य जांच और उपचार कर सकें।
पार्टी की अन्य प्राथमिक शर्तों में हालिया विरोध प्रदर्शनों से पहले हिरासत में ली गईं इमरान खान की बहनों और पार्टी कार्यकर्ताओं की तुरंत रिहाई शामिल थी। इसके साथ ही पीटीआई ने पूर्व प्रधानमंत्री की पत्नी बुशरा बीबी की उचित चिकित्सीय जांच कराने और उनके अदालती मामलों की सुनवाई बिना किसी प्रशासनिक या राजनीतिक दखलअंदाजी के निष्पक्ष ढंग से सुनिश्चित करने की मांग भी वार्ता की मेज पर रखी थी। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच किसी भी बिंदु पर आम सहमति नहीं बन सकी और बातचीत बेनतीजा समाप्त हो गई।
खैराबाद पहुंचने का लक्ष्य और आंदोलन की कार्ययोजना
मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने रविवार दोपहर एक बजे गांदी चौक से मार्च शुरू करने की रूपरेखा सार्वजनिक की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मार्च का प्राथमिक पड़ाव खैराबाद होगा, जहां 8 अक्टूबर को पहुंचने के बाद आंदोलन के अगले और अंतिम चरण की घोषणा की जाएगी। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, इस काफिले में टैंक, डेरा इस्माइल खान, दक्षिण वजीरिस्तान, उत्तर वजीरिस्तान, बन्नू और लक्की मरवत से आने वाले हजारों स्थानीय समर्थक शामिल हो रहे हैं।
लक्की मरवत में सभा को संबोधित करते हुए सोहेल अफरीदी ने प्रांतीय स्वायत्तता और पार्टी के रुख को मजबूती से सामने रखा। उन्होंने कहा कि उनकी प्रांतीय सरकार पश्तून समुदाय के हितों के प्रतिकूल किसी भी केंद्रीय नीति को स्वीकार नहीं करेगी। अफरीदी ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि खैबर पख्तूनख्वा में केवल इमरान खान का शासन चलेगा और यहां उन्हीं की सोच और नीतियों का पालन किया जाएगा। उन्होंने इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए स्थानीय जनता का आभार भी व्यक्त किया।
प्रांतीय सरकार का केंद्र पर तीखा हमला
सोहेल अफरीदी ने आरोप लगाया कि देश में एक खास मानसिकता वाला समूह सक्रिय है, जो बंद दरवाजों के पीछे फैसले लेकर जनता पर थोपने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि पीटीआई ऐसे किसी भी अलोकतांत्रिक कदम का सड़क पर उतरकर विरोध करेगी। उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन या आपातकाल लागू करने की किसी भी प्रशासनिक संभावना को सिरे से खारिज कर दिया।
सुरक्षा नीति और आतंकवाद के मुद्दे पर बोलते हुए अफरीदी ने कहा कि पिछले 79 वर्षों से जो सोच देश पर थोपी गई है, वही सोच अब प्रांत के लोगों पर एक नए सैन्य अभियान का बोझ डालना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि प्रांतीय सरकार ने केंद्र के समक्ष शांति बहाली की एक व्यावहारिक और स्पष्ट योजना पेश की है, जिसे लागू करने पर केवल 100 दिनों के भीतर इलाके में शांति लौट सकती है। केंद्र की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष वास्तव में शांति नहीं चाहता, बल्कि पीटीआई को राजनीतिक रूप से खत्म करने की कोशिश कर रहा है। अफरीदी ने जोर देकर कहा कि करक में जनसैलाब जुटेगा और स्वाबी पहुंचते-पहुंचते लाखों नागरिक इस वास्तविक आजादी के आंदोलन का हिस्सा बन जाएंगे।
तारीखों में बदलाव और बढ़ता आर्थिक दबाव
पीटीआई ने शुरुआत में इस लॉन्ग मार्च की तारीख 27 सितंबर तय की थी। हालांकि, प्रशासनिक रुकावटों और टकराव टालने के प्रयासों के बीच इसे स्थगित कर 4 अक्टूबर कर दिया गया था। बार-बार सड़कों को बंद किए जाने और भारी सुरक्षा बंदोबस्त के चलते देश के खजाने पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी पड़ा है।
गौरतलब है कि पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और राजनीतिज्ञ इमरान खान साल 2023 से जेल में बंद हैं। उनके ऊपर वित्तीय भ्रष्टाचार और हिंसा भड़काने समेत 100 से ज्यादा आपराधिक व राजनीतिक मुकदमे चल रहे हैं। 18 अगस्त को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उनकी आंखों की रोशनी से जुड़ी शारीरिक समस्याओं और गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए इस्लामाबाद के एक निजी अस्पताल में उपचार कराने का आदेश दिया था। संघीय सरकार ने इस अदालती निर्देश का विरोध करते हुए इसके खिलाफ समीक्षा याचिका दायर की थी, जिसे लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश बना हुआ है।
वार्ता विफलता पर केंद्र का अलग तर्क
दूसरी तरफ, संघीय सरकार ने वार्ता टूटने के लिए पीटीआई के प्रांतीय नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है। गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री तलाल चौधरी, जो वार्ता में सरकारी दल का हिस्सा थे, ने रविवार को कहा कि वार्ता मुख्य रूप से इसलिए विफल रही क्योंकि खैबर पख्तूनख्वा सरकार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में केंद्र को सहयोग का पक्का भरोसा नहीं दे सकी। उत्तर-पश्चिमी सीमावर्ती प्रांत खैबर पख्तूनख्वा लंबे समय से उग्रवादी हिंसा का सामना करता रहा है, जहां तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़े उग्रवादियों की सक्रियता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है।
दिन-प्रतिदिन का तय रूट और पड़ाव
पीटीआई नेतृत्व द्वारा जारी आधिकारिक यात्रा कार्यक्रम के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का काफिला चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा
- 4 अक्टूबर: काफिला पहले दिन का सफर तय कर रात में करक के निकट विश्राम करेगा।
- 5 अक्टूबर: दोपहर 12:30 बजे यह जत्था करक से रवाना होगा और रात में कोहाट के पास ठहरेगा।
- 6 अक्टूबर: दोपहर 12 बजे कोहाट, हंगू, कुर्रम और ओरकजई से आने वाले प्रदर्शनकारी इसमें शामिल होंगे। इसके बाद काफिला पेशावर की ओर बढ़ेगा और रात मत्तानी में गुजारेगा।
- 7 अक्टूबर: दोपहर में काफिला पेशावर के बुध बैर से रवाना होगा। कोहाट रोड ब्रिज और मोटरवे टोल प्लाजा पर पेशावर के अन्य हिस्सों से लोग जुड़ेंगे। रात में पड़ाव चरसद्दा इंटरचेंज पर होगा।
- 8 अक्टूबर: दोपहर 12:30 बजे चरसद्दा और मोहम्मद क्षेत्रों के लोग जुड़ेंगे और सभी खैराबाद पहुंचेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 8 अक्टूबर को खैबर पख्तूनख्वा के सभी हिस्सों से लोग खैराबाद में एकत्रित होंगे, जिसके बाद इस्लामाबाद कूच के अंतिम पड़ाव की घोषणा की जाएगी।
संघीय सरकार की सख्त चेतावनी और किलेबंदी
पीटीआई के राजधानी की ओर कूच करने के फैसले पर संघीय सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदर्शनकारियों को किसी भी सूरत में इस्लामाबाद में घुसने की इजाजत नहीं दी जाएगी। राजधानी की सभी प्रमुख सड़कों पर भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी गई है तथा मुख्य प्रवेश मार्गों को भारी शिपिंग कंटेनर रखकर पूरी तरह सील कर दिया गया है।
उधर लाहौर में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान संघीय गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को खुली चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि इस राजनीतिक टकराव और राजधानी में जबरन घुसने की कोशिश के दौरान किसी भी व्यक्ति की जान जाती है, तो उसकी पूरी जवाबदेही और कानूनी जिम्मेदारी सीधे सोहेल अफरीदी की होगी।



















