प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर के पवित्र लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी को लेकर चल रही जांच में एक बड़ा कदम सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने इस मामले में सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि गाय के शुद्ध देसी घी के नाम पर तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को ऐसा पदार्थ भेजा गया, जिसे वनस्पति तेलों और रासायनिक तत्वों की मदद से तैयार किया गया था। इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बहुत अधिक है क्योंकि तिरुमला मंदिर में हर रोज लाखों श्रद्धालु शीश नवाते हैं और लड्डू प्रसाद को गहरी श्रद्धा एवं पवित्रता का प्रतीक मानते हैं।
ईडी की जांच के मुताबिक, यह कथित फर्जीवाड़ा वर्ष 2019 से वर्ष 2024 के बीच हुआ। इस पांच साल के समय में टीटीडी को लगभग 230 करोड़ रुपये की संदिग्ध और कथित तौर पर मिलावटी घी की आपूर्ति की गई थी। एजेंसी का दावा है कि इस कुल आपूर्ति में से करीब 96 करोड़ रुपये मूल्य का कथित मिलावटी घी अकेले कैलाश चंद मंगला की कंपनी सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया था। यह मामला केवल सामान्य स्तर की खाद्य मिलावट तक सीमित नहीं है, बल्कि एक अत्यंत बड़े वित्तीय और संस्थागत आपूर्ति नेटवर्क से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। हालांकि, ये सभी बिंदु जांच एजेंसी के आरोप हैं और अदालत में कानूनी साक्ष्यों के आधार पर ही इन पर अंतिम फैसला होना बाकी है।
देसी घी के स्थान पर पाम तेल और रासायनिक मिश्रण का आरोप
जांच एजेंसी द्वारा दर्ज किए गए विवरण के अनुसार, गाय के दूध की मलाई से बनने वाले वास्तविक घी की जगह सस्ते वनस्पति तेलों का बड़ा घालमेल किया गया। कथित मिलावटी उत्पाद को बनाने के लिए रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और पामोलीन का सहारा लिया गया। ये सभी तेल पूरी तरह से वनस्पति स्रोतों से आते हैं और पारंपरिक देसी घी के मानकों से बिल्कुल अलग होते हैं। एजेंसी का कहना है कि इन तेलों के मिश्रण को कुछ खास प्रक्रियाओं के जरिए ऐसा रूप दिया गया ताकि देखने और छूने में यह असली देसी घी जैसा प्रतीत हो सके।
ईडी ने अपनी जांच में यह भी स्पष्ट किया है कि केवल वनस्पति तेलों को मिलाने से ही बात खत्म नहीं हुई, बल्कि मिश्रण को घी की तरह ठोस, चमकदार और स्थिर बनाने के लिए रासायनिक तत्वों का उपयोग भी किया गया। एजेंसी के आरोपों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में एमजी-90, मोनोग्लिसराइड्स, मायवेसिट सॉफ्ट 400 और एसीटिक एसिड एस्टर जैसे रसायनों को मिलाया गया। इन रासायनिक घटकों और पाम आधारित तेलों के सटीक अनुपात से ऐसा कथित घी तैयार किया जाता था, जिसे टीटीडी के खरीद तंत्र तक नियमित रूप से पहुंचाया गया।
सुकृति फूड्स के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला की गिरफ्तारी
सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला की गिरफ्तारी के बाद से इस पूरे मामले से जुड़े कारोबारी गलियारों और धार्मिक न्यासों में काफी हलचल मच गई है। एजेंसी अब इस बात की कड़ियों को जोड़ रही है कि यह कथित मिलावटी घी किस कारखाने में तैयार होता था, कच्चे माल की खरीद कहां से की गई और आपूर्ति के लिए किस तरह के ट्रांसपोर्ट और बिलिंग नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। जांचकर्ता यह भी खंगाल रहे हैं कि 96 करोड़ रुपये की आपूर्ति के लिए कंपनी ने किन दस्तावेजों और प्रयोगशाला रिपोर्टों का सहारा लिया था।
कैलाश चंद मंगला की हिरासत के बाद अब कंपनी के वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और कच्चे माल के आपूर्तिकर्ताओं की भी गहन पड़ताल की जा रही है। एजेंसी यह जानना चाहती है कि क्या इस निर्माण प्रक्रिया में कोई अन्य साझेदार या सलाहकार भी शामिल थे, जिन्होंने रासायनिक फार्मूले तैयार करने में मदद की। इस गिरफ्तारी को जांच का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, हालांकि मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं और साक्ष्यों की पुष्टि न्यायिक मंच पर ही साबित की जाएगी।
2019 से 2024 तक चली 230 करोड़ रुपये की संदिग्ध आपूर्ति व्यवस्था
प्रवर्तन निदेशालय की जांच के केंद्र में 2019 से 2024 तक का पांच साल का समय है। इस समयावधि में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को दी गई कुल आपूर्ति में से करीब 230 करोड़ रुपये के घी को संदिग्ध और मिलावटी माना गया है। जांचकर्ताओं के लिए यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण बन गया है कि इतने लंबे समय तक इतनी विशाल मात्रा में कथित मिलावटी घी की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के कैसे जारी रही। किसी भी बड़े धार्मिक न्यास में सामग्री की खरीद से लेकर भंडारण तक कई चरण होते हैं, जिनमें निविदा प्रक्रिया, भौतिक सत्यापन, प्रयोगशाला परीक्षण और अंतिम भुगतान शामिल हैं।
अब जांच इस बात पर केंद्रित हो रही है कि निगरानी की यह पूरी व्यवस्था किस स्तर पर विफल हुई या उसमें क्या कमियां रह गईं। क्या गुणवत्ता जांच के लिए तय मानकों को दरकिनार किया गया, या फिर इस्तेमाल किए गए रसायनों की वजह से सामान्य परीक्षणों में यह मिलावट पकड़ में नहीं आ सकी। ईडी अब सुकृति फूड्स के अलावा आपूर्ति श्रृंखला में शामिल अन्य संभावित व्यक्तियों, बिचौलियों और संबंधित इकाइयों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है ताकि 230 करोड़ रुपये के पूरे चक्र का सच सामने आ सके।
श्रद्धालुओं की आस्था और गुणवत्ता मानकों से जुड़े बुनियादी सवाल
तिरुपति का लड्डू प्रसाद सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि समूचे विश्व में रहने वाले करोड़ों हिंदुओं के लिए अगाध श्रद्धा का केंद्र है। तिरुमला पहाड़ी पर स्थित भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के उपरांत इस प्रसाद को ग्रहण करना हर श्रद्धालु के लिए परम आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है। ऐसे में जब इस महाप्रसाद के मुख्य घटक देसी घी की शुद्धता पर इतने गंभीर आरोप लगते हैं, तो यह सीधे तौर पर जनमानस की धार्मिक भावनाओं और खाद्य सुरक्षा के विश्वास को झकझोर देता है।
इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद कई बुनियादी सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसी को यह तय करना होगा कि प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता जांच के दौरान यह रासायनिक मिश्रण पकड़ में क्यों नहीं आया और किन-किन स्तरों पर प्रमाणीकरण की चूक हुई। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि इस आपूर्ति नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की जिम्मेदारी किस हद तक तय होती है। 2019 से 2024 के बीच हुए इस कथित 230 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में कैलाश चंद मंगला की गिरफ्तारी पहली बड़ी कार्रवाई है, और आने वाले समय में कानूनी प्रक्रिया के जरिए ही इस मामले के सभी तथ्य पूरी तरह से साफ हो पाएंगे।
























