राजस्थान के दौसा जिले में स्थित श्यालावास सेंट्रल जेल परिसर में सुरक्षा इंतजामों को धता बताकर प्रतिबंधित सामग्री पहुंचाने का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। पुलिस की एक विशेष टीम ने जेल परिसर में औचक दबिश देकर व्यापक सर्च अभियान चलाया। इस सघन तलाशी के दौरान जेल के एक बाथरूम में जमीन खोदकर प्लास्टिक के डिब्बे व थैली में दबाकर रखी गई नशीली सामग्री, स्मोकिंग रोल और एक चालू हालत वाला मोबाइल फोन बरामद किया गया है। भारी मात्रा में नशीला पदार्थ मिलने के बाद जेल की आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
150 पुलिसकर्मियों के दल ने चलाया सघन सर्च ऑपरेशन
इस तलाशी अभियान का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विनोद सीपा ने किया। करीब 150 पुलिसकर्मियों का भारी भरकम दस्ता अचानक सेंट्रल जेल श्यालावास के मुख्य द्वार पर पहुंचा और प्रवेश करते ही विभिन्न बैरकों को चारों तरफ से घेर लिया। पुलिस टीम ने एक-एक बैरक की बारीकी से जांच शुरू की। तलाशी की प्रक्रिया जब शौचालयों और स्नानागारों तक पहुंची, तो वहां जमीन के एक हिस्से पर मिट्टी में असामान्य हलचल दिखाई दी। संदेह के आधार पर जब बाथरूम के फर्श की खुदाई कराई गई, तो जमीन के अंदर छिपाकर रखा गया एक डिब्बा बाहर निकला। डिब्बे को खोलने पर उसमें लगभग 650 ग्राम गांजा बरामद हुआ। इसके अलावा पास में ही एक थैली में सुरक्षित रखा गया मोबाइल फोन और स्मोकिंग रोल भी दबा मिला, जिसे जब्त कर लिया गया।
पापड़दा थाने में प्राथमिकी दर्ज, सप्लाई नेटवर्क की जांच
जेल की चारदीवारी के भीतर नशीली खेप और संचार उपकरण मिलने के तुरंत बाद कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। स्थानीय पापड़दा थाने में इस सिलसिले में बाकायदा एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। स्थानीय पुलिस अब तकनीकी जांच और जेल के रिकॉर्ड्स के जरिए यह कड़ी जोड़ने में जुटी है कि इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, मेटल डिटेक्टरों और संतरी पहरे के बावजूद प्रतिबंधित चीजें अंदर कैसे लाई गईं। इस सामग्री को वहां किसने छिपाया और किन बंदियों के पास इसकी पहुंच थी, इसका पता लगाने के लिए कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
उच्चाधिकारियों ने दिए जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश
घटना के सामने आने के बाद कारागार महानिरीक्षक विक्रम सिंह ने मामले की विस्तृत प्रशासनिक जांच कराने का आदेश जारी किया है। विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा घेरा तोड़कर प्रतिबंधित सामग्री जेल में पहुंचने के पूरे घटनाक्रम की गहन पड़ताल की जाएगी। यदि जांच में जेल के किसी भी कार्मिक की लापरवाही अथवा बंदियों के साथ मिलीभगत सामने आती है, तो दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विनोद सीपा का कहना है कि संपूर्ण तफ्तीश पूरी होने के उपरांत ही यह तथ्य पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा कि जेल के भीतर इस अवैध नशे की खेप पहुंचाने के पीछे कौन से लोग सक्रिय थे।
सुरक्षा पर फिर उठे सवाल, पहले भी आ चुके हैं मामले
श्यालावास जेल में सुरक्षा में चूक का यह पहला वाकया नहीं है। पूर्व में भी इस कारागार से अवैध मादक पदार्थ और मोबाइल फोन मिलने के प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। बार-बार दोहराई जा रही इन घटनाओं के चलते जेल की वर्तमान निगरानी प्रणाली और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर पुनर्विचार की जरूरत महसूस की जा रही है। वर्तमान में पुलिस और जेल प्रशासन दोनों ही अपने-अपने स्तर पर अलग-अलग जांच में जुटे हुए हैं ताकि इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचा जा सके।
























