आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में राजमहेंद्रवरम के निकट बसा कडियम आज पूरे भारत में पेड़-पौधों और हरियाली की सबसे बड़ी राजधानी के रूप में पहचान बना चुका है। इसे आमतौर पर भारत का सबसे बड़ा नर्सरी केंद्र या प्लांट कैपिटल कहा जाता है। यह कोई एकल बाज़ार या एक-दो दुकानों तक सीमित इलाका नहीं है, बल्कि आसपास के कई गांवों को जोड़कर बना एक बहुत बड़ा उत्पादक नेटवर्क है। कडियापुलंका, बुर्रिलंका और वीरवरम समेत दर्जनों गांवों के किसान और बागवान पूरी तरह से इस हरियाली उद्योग को संभाल रहे हैं। लगभग 10,000 एकड़ के विशाल भूभाग पर फैली सैकड़ों नर्सरियों के कारण इस पूरे क्षेत्र में चारों ओर विविध रंगों के फूल, सजावटी वनस्पति और बड़े छांवदार पेड़ ही नजर आते हैं।
गोदावरी की उपजाऊ मिट्टी और एक सदी पुराना इतिहास
इस हरित क्षेत्र की सबसे बड़ी मजबूती गोदावरी नदी के कछार की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी तथा साल भर मिलने वाला प्रचुर जल संसाधन है। लगभग 100 वर्ष पहले स्थानीय किसानों ने अपनी सामान्य पारंपरिक फसलों की खेती के साथ पौधों की कलम बांधने और सजावटी पौधों को तैयार करने की साधारण शुरुआत की थी। धीरे-धीरे किसानों की यह रुचि और तकनीकी कौशल एक विशाल व्यावसायिक तंत्र में बदल गया। वर्तमान में यहां आम फलदार वृक्षों से लेकर विदेशी इनडोर पौधे, बोनसाई, कैक्टस, ऑर्किड और राजमार्गों के किनारे रोपे जाने वाले छायादार विशालकाय पेड़ों की हजारों किस्में तैयार की जाती हैं। नर्सरी की कर्मचारी रंगा गुलकांती के मुताबिक कडियम की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि यहां सामान्य खरीदारों के लिए 10 से 20 रुपये के किफायती पौधे भी उपलब्ध हैं और शौकीनों के लिए लाखों रुपये मूल्य के दुर्लभ बोनसाई तथा दशकों पुराने सजावटी वृक्ष भी मिल जाते हैं।
मेट्रो, एयरपोर्ट से लेकर खाड़ी देशों तक पौधों की मांग
भारत के प्रमुख महानगरों में बन रहे आधुनिक बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में कडियम की वनस्पति को पहली प्राथमिकता दी जाती है। नए हवाई अड्डों, मेट्रो स्टेशनों, राष्ट्रीय राजमार्गों, कॉर्पोरेट आईटी पार्कों और आलीशान होटलों के लैंडस्केपिंग कार्यों के लिए भारी मात्रा में पौधे सीधे इसी इलाके से ऑर्डर किए जाते हैं। घरेलू मांग के अतिरिक्त खाड़ी देशों तक इस नर्सरी हब के सजावटी व विशेष पौधों का निर्यात किया जाता है। पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ यह इलाका स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी मुख्य आधार बन गया है।
50 हजार से अधिक कामगारों को प्रत्यक्ष रोजगार
कडियम का यह हरा-भरा ताना-बाना क्षेत्र के हजारों परिवारों के जीवनयापन का साधन है। स्थानीय स्तर पर 50 हजार से अधिक लोग पौधों की कलम तैयार करने, खेतों की सिंचाई, पौधों की सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स तथा परिवहन जैसे दैनिक कार्यों से आजीविका कमाते हैं। पौधों के इस विस्तृत कारोबार के सहारे इलाके में गमला निर्माण, जैविक खाद, मिट्टी की तैयारी और पैकेजिंग का भी एक बड़ा सहायक बाजार विकसित हो चुका है, जिससे यह क्लस्टर प्राकृतिक संपदा और मानव श्रम के तालमेल का प्रमुख उदाहरण बन गया है।



















