स्मार्टफोन की स्क्रीन पर बार-बार उंगलियां चलाकर अलग-अलग ऐप्स खोलने का चलन आने वाले समय में पूरी तरह बदल सकता है। अमेज़न डिवाइसेज के प्रमुख पैनोस पनाय ने पर्सनल कंप्यूटिंग के भविष्य को लेकर एक नया दृष्टिकोण सामने रखा है। उनका मानना है कि आने वाला युग एंबिएंट कंप्यूटिंग का होगा, जहां यूजर को हर छोटे-बड़े काम के लिए अलग से एप्लिकेशन तलाशने या कमांड देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके बजाय बैकग्राउंड में सक्रिय रहने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपकरण सेंसर की मदद से यूजर की जरूरतों को खुद-ब-खुद भांप लेंगे।
वर्तमान में स्मार्टफोन का उपयोग काफी हद तक सचेत प्रयासों पर टिका हुआ है। किसी भी काम के लिए यूजर को पहले याद रखना पड़ता है कि उसे किस टूल या ऐप की जरूरत है, फिर वह ऐप खोलता है, निर्देश देता है और नतीजे का इंतजार करता है। पनाय ने इस पारंपरिक प्रक्रिया को पॉइंट, शूट और रिटर्न जैसा करार दिया। इसके उलट, एंबिएंट डिवाइसेज यूजर के रोजमर्रा के जीवन में बिना किसी रुकावट के घुल-मिल जाते हैं। यूजर को तकनीक के हिसाब से खुद को ढालने के बजाय तकनीक यूजर की जीवनशैली के अनुसार काम करने लगती है।
बैकग्राउंड में रहकर काम आसान बनाएंगे नए स्मार्ट गैजेट्स
अमेज़न ने इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए गुरुवार को अपने नए बी डिवाइसेज पेश किए हैं। इन उत्पादों में एक ऐसा स्मार्ट बैंड शामिल है जिसे कलाई पर पहना जा सकता है या अलग करके लॉकेट की तरह गले में लटकाया जा सकता है। इसके अलावा एक क्रेडिट कार्ड के आकार का पतला गैजेट भी पेश किया गया है, जो मैग्नेट की मदद से सीधे स्मार्टफोन के पिछले हिस्से पर चिपक जाता है। ये दोनों ही उत्पाद इस तरह तैयार किए गए हैं कि वे यूजर के आसपास रहकर बिना ध्यान भटकाए अपना काम करते रहें।
पनाय का कहना है कि जब कोई डिवाइस बैकग्राउंड में चुपचाप काम करता है, तो इंसान अपने आसपास के माहौल और लोगों के साथ ज्यादा समय बिता पाता है। यूजर को हर वक्त यह डर नहीं सताता कि वह कोई जरूरी बात, मीटिंग या काम भूल जाएगा। बी सीरीज के ये गैजेट्स यूजर की दिनचर्या के दौरान बातचीत का ऑडियो निष्क्रिय रूप से सुनते हैं और महत्वपूर्ण नोट्स तैयार करते हैं। वे दिनभर की गतिविधियों में से जरूरी काम, टू-डू लिस्ट, रिमाइंडर और ऐसे मुख्य बिंदु छांट लेते हैं जिनकी जरूरत भविष्य में पड़ सकती है।
प्राइवेसी और ऑडियो डेटा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
लगातार ऑडियो सुनने वाले गैजेट्स के साथ प्राइवेसी की चिंता सबसे अहम होती है, और पनाय ने स्पष्ट किया कि इन उत्पादों के विकास में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्राहकों के हाथ में नियंत्रण देना अनिवार्य है। इसी वजह से बी डिवाइसेज यूजर की बातचीत का कच्चा ऑडियो अपने पास स्टोर करके नहीं रखते। डिवाइस रियल टाइम में बातचीत को प्रोसेस करता है और जरूरी जानकारी दर्ज करते ही मूल ऑडियो फाइल को हमेशा के लिए हटा देता है।
इसके साथ ही तैयार किए गए टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्ट को सुरक्षित रखने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। हर ट्रांसक्रिप्ट को एक ऐसी डिजिटल एन्क्रिप्शन की से लॉक किया जाता है जिसे केवल यूजर का अपना डिवाइस तैयार और नियंत्रित करता है। इसका सीधा मतलब यह है कि जब तक यूजर खुद जानबूझकर उन फाइलों को किसी के साथ साझा न करे, तब तक अमेज़न का कोई भी कर्मचारी या कोई अन्य बाहरी व्यक्ति उन ट्रांसक्रिप्ट्स को बिल्कुल नहीं पढ़ सकता।
माइक्रोसॉफ्ट से अमेज़न तक का अनुभव और ऐप-रहित भविष्य की राह
अमेज़न से जुड़ने से पहले पनाय ने 19 साल माइक्रोसॉफ्ट में बिताए थे, जहां उन्होंने सरफेस डिवाइसेज के विकास और विस्तार की सीधी निगरानी की थी। अपने करियर का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने पर्सनल कंप्यूटिंग के विकास और हार्डवेयर नवाचारों पर विचार करते हुए बिताया है। बी सीरीज और एंबिएंट कंप्यूटिंग के जरिए वह ऐसी पीढ़ी देख रहे हैं जो हर जरूरत के लिए ऐप डाउनलोड करने की मांग नहीं करेगी, बल्कि यह उम्मीद रखेगी कि उसका सिस्टम बिना कहे ही सब कुछ समझ जाए।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा स्मार्टफोन पूरी तरह गायब हो जाएंगे। पनाय ने साफ किया कि वह किसी एक फॉर्म फैक्टर द्वारा दूसरे फॉर्म फैक्टर को पूरी तरह खत्म करने के पक्षधर नहीं हैं। उनका मानना है कि स्मार्टफोन निजी कंप्यूटिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा, लेकिन उसके इर्द-गिर्द स्मार्ट सेंसर्स और इंटेलिजेंस की एक ऐसी परत जुड़ जाएगी जो सभी उपकरणों को आपस में जोड़कर ज्यादा उपयोगी बना देगी।


















