स्मार्टफोन यूज़र्स अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार की गई अपनी व्यक्तिगत एप्लिकेशन्स को बिना किसी सार्वजनिक रिलीज के सीधे एंड्रॉयड डिवाइस पर चला सकेंगे। तकनीकी कंपनी गूगल ने मंगलवार को इस नई कार्यप्रणाली की घोषणा की है। इस व्यवस्था के तहत लोग अपने सामान्य गूगल अकाउंट का उपयोग करके गूगल प्ले के जरिए व्यक्तिगत ऐप्स अपने फोन में शुरू कर सकेंगे, और वे एप्लिकेशन्स पूरी तरह से गोपनीय बनी रहेंगी।
यह नया विकल्प उन यूज़र्स के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है जो अपनी दैनिक ज़रूरतों या शौक के लिए खुद सॉफ्टवेयर तैयार कर रहे हैं। इन निजी ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर के सामान्य सर्च परिणामों या लिस्टिंग पेजों में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, ऐप बनाने वाले व्यक्ति के अलावा कोई अन्य बाहरी यूज़र इन्हें न तो देख सकेगा और न ही डाउनलोड कर पाएगा।
व्यक्तिगत सॉफ्टवेयर और वाइब कोडिंग की बढ़ती मांग
हाल के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स की मदद से आम लोग भी अपनी विशिष्ट ज़रूरतों के मुताबिक सॉफ्टवेयर तैयार करने के प्रयोग कर रहे हैं। इसे तकनीकी जगत में वाइब कोडिंग कहा जाता है। अब तक किसी भी एंड्रॉयड डिवाइस पर अपनी बनाई ऐप को इस्तेमाल करने के लिए उसे सीधे गूगल प्ले पर पब्लिश करना पड़ता था। ऐसा करने से वह ऐप प्ले स्टोर के लगभग 3 अरब यूज़र्स के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो जाती थी।
इसी सार्वजनिक प्रक्रिया के दबाव के कारण बहुत से यूज़र्स अपने प्रयोगों को केवल वेब ऐप्स तक ही सीमित रख रहे थे, ताकि उन्हें किसी भी ब्राउज़र में चलाया जा सके। वे सीधे एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए नेटिव सॉफ्टवेयर बनाने से हिचकिचाते थे। अब इस समस्या का समाधान करते हुए यह सुविधा दी गई है कि एंड्रॉयड डिवाइस धारक सीधे गूगल एआई स्टूडियो का उपयोग करके एक ऐप तैयार कर सकते हैं और फिर बिना किसी झंझट के उसे अपने निजी उपयोग के लिए लॉन्च कर सकते हैं।
हालांकि इन निजी एप्लिकेशन्स को अपने डिवाइस पर चलाने के लिए भी यूज़र्स को गूगल प्ले की मौजूदा सुरक्षा नीतियों का पूरी तरह पालन करना होगा। यह व्यवस्था लोगों को एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर ऐप निर्माण से जुड़े सीधे प्रयोग करने की आज़ादी देती है। शुरुआती चरण में यह सुविधा केवल अमेरिका में रहने वाले 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के यूज़र्स के लिए उपलब्ध कराई जा रही है।
निजी ऐप्स से लेकर सार्वजनिक स्टोर तक का सफर
गूगल में गूगल प्ले और डेवलपर इकोसिस्टम के वीपी और जीएम सैम ब्राइट ने मंगलवार के लॉन्च से पहले एक प्रेस ब्रीफिंग में इस बदलाव के उद्देश्य को स्पष्ट किया। सैम ब्राइट के अनुसार, प्ले स्टोर अब केवल ऐप्स खोजने की जगह नहीं रहा, बल्कि यह हर किसी के लिए व्यक्तिगत, सुरक्षित और खुद के द्वारा निर्मित ऐप्स के नए युग की शुरुआत कर रहा है।
कंपनी ने यह भी साझा किया है कि आने वाले महीनों में इस प्रणाली का और विस्तार किया जाएगा। इसके तहत यूज़र्स अपनी वाइब-कोडेड ऐप्स को अपने भरोसेमंद दोस्तों या परिचितों के एक सीमित समूह के साथ साझा करने में सक्षम होंगे। इसका अर्थ यह है कि अगर किसी ने अपने परिवार, दोस्तों या बच्चों की टी-बॉल लीग जैसी स्थानीय गतिविधियों के लिए कोई विशेष ऐप बनाई है, तो उसे प्ले स्टोर पर सार्वजनिक किए बिना एक छोटे समूह के बीच चलाया जा सकेगा। इसके अलावा, यदि कोई निजी ऐप आगे चलकर बहुत लोकप्रिय हो जाती है या यूज़र उसे बड़े पैमाने पर वितरित करना चाहता है, तो सुरक्षा और विश्वास से जुड़े सभी ज़रूरी रिव्यू पूरे करने के बाद उसे सामान्य गूगल प्ले स्टोर पर सभी यूज़र्स के लिए पब्लिश करने का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाएगा।
गेमिंग और एआई आधारित नए प्ले स्टोर फीचर्स
ऐप निर्माण के अलावा गूगल प्ले स्टोर के समग्र अनुभव को बेहतर बनाने के लिए भी कई नए एआई फीचर्स जोड़े जा रहे हैं। कंपनी ने एक व्यक्तिगत गेम रिकमेंडेशन इंजन पेश किया है, जिसे गेम फाइंडर नाम दिया गया है। यह सुविधा शुरुआत में अमेरिका में अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध होगी। यह सिस्टम यूज़र की अपनी गेमिंग पसंद और प्लेटफॉर्म के 1.2 अरब गेमर्स के डेटा व ज्ञान के आधार पर नए गेम्स का सुझाव देगा।
इसके साथ ही यूज़र्स को अपनी पसंदीदा गेम्स की लिस्ट तैयार करने, नए कम्युनिटी पोस्ट्स सेक्शन में गेम्स से जुड़े सवाल पूछने और स्प्रिंट्स नाम की 48 घंटे की नई गेमिंग चुनौतियों में भाग लेने की सुविधा भी मिलेगी। प्ले स्टोर के इन-बिल्ट एआई असिस्टेंट, आस्क प्ले, को भी अपडेट किया जा रहा है। अब यह असिस्टेंट एक जैसी कई ऐप्स के बीच मुख्य अंतर दिखाने और उनकी आपस में तुलना करने में सक्षम होगा। इसके अतिरिक्त, गूगल प्ले की ऐप्स और गेम्स को जेमिनी की बातचीत में और गहराई से इंटीग्रेट किया जाएगा।
इन सभी बदलावों के साथ गूगल प्ले में एक नया आयु सीमा फीचर भी शामिल किया गया है। यह सुविधा माता-पिता को अपने बच्चे की सटीक जन्मतिथि बताए बिना केवल उनकी उम्र का दायरा डेवलपर्स के साथ साझा करने की अनुमति देती है, ताकि बच्चों को उनकी उम्र के अनुकूल सुरक्षित डिजिटल अनुभव प्राप्त हो सके।


















