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उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर आनंद दुबे ने थामा एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामनमहाराष्ट्र
16 अक्तू॰ 2026, 11:38 pm (1 घंटे पहले)· 1

उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर आनंद दुबे ने थामा एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन

शिवसेना यूबीटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने वाले आनंद दुबे शुक्रवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल हो गए।

महाराष्ट्र की राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है, जहां शिवसेना यूबीटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने अपनी पुरानी पार्टी को छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। आनंद दुबे ने कुछ समय पहले ही उद्धव ठाकरे के गुट से अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद से ही उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। शुक्रवार को उन्होंने आधिकारिक रूप से भगवा झंडा थाम लिया और एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता स्वीकार कर ली।

हिंदुत्व के रास्ते से भटकने का लगाया था आरोप

पार्टी छोड़ने के दौरान आनंद दुबे ने उद्धव गुट पर तीखे हमले किए थे और खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उनका कहना था कि पार्टी अपने मूल हिंदुत्व के विचारों और बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से पूरी तरह भटक चुकी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि उन्हें कांग्रेस और सीजेपी के साथ मिलकर किसी भी प्रकार का आंदोलन करना बिल्कुल मंजूर नहीं है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए यह भी कहा था कि इन लोगों के पास वोट की नहीं बल्कि दिमाग की चोरी जैसी स्थिति है। आनंद दुबे ने ध्रुव राठी, सरजील इमाम और उमर खालिद जैसे नामों का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया था कि वह ऐसे लोगों को अपना आदर्श नहीं मान सकते और न ही उनके साथ काम करना जारी रख सकते हैं। अपने इस्तीफे के पीछे का कारण बताते हुए उन्होंने एक दिलचस्प ट्रेन का उदाहरण दिया था और कहा था कि जिस ट्रेन में वह सफर कर रहे थे, उसमें कॉकरोच घुस चुके थे, इसलिए उनके लिए प्लेटफॉर्म पर उतरना ही बेहतर फैसला था।

अपने कई समर्थकों के साथ हुए शामिल

शुक्रवार को हुए इस मिलन समारोह के दौरान आनंद दुबे अकेले नहीं आए, बल्कि उनके साथ कई प्रमुख समर्थक और युवा नेता भी शिवसेना में शामिल हुए। पार्टी की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस अवसर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आनंद दुबे और उनके साथियों का पार्टी में गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। आनंद दुबे के साथ जिन अन्य प्रमुख चेहरों ने शिवसेना की सदस्यता ली, उनमें गुलाबचंद दुबे, सुनील चौबे, बृजेश मौर्य, दशरथ प्रजापति, प्रवीण दुबे और धनंजय गुप्ता शामिल रहे। इसके अलावा शिवसेना यूबीटी की युवा सेना से जुड़े इमरान शेख, सलाउद्दीन, इरफान शेख, शिरान शेख और अलीम शेख ने भी पुरानी पार्टी का साथ छोड़कर आधिकारिक रूप से शिवसेना का दामन थाम लिया।

बालासाहेब और आनंद दिघे की विचारधारा पर जोर

पार्टी में नए सदस्यों का स्वागत करते हुए शिवसेना ने इस बात पर जोर दिया कि आनंद दुबे आज उस पार्टी का हिस्सा बने हैं जो हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे और धर्मवीर आनंद दिघे साहब के बताए हुए मार्ग और विचारों पर चलती है। 'राष्ट्र सर्वोपरि' यानी नेशन फर्स्ट के मूल सिद्धांत को रेखांकित करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि पार्टी इसी मजबूत वैचारिक नींव को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी इस दौरान पूरी उम्मीद जताई कि आनंद दुबे अब शिवसेना की असली और मूल विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने और उसे आगे बढ़ाने की दिशा में पूरी निष्ठा के साथ काम करेंगे।

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सवाल-जवाब

आनंद दुबे ने किस पार्टी को छोड़ा है?
आनंद दुबे ने शिवसेना यूबीटी (उद्धव ठाकरे गुट) को छोड़ा है।
आनंद दुबे ने किस नई पार्टी को ज्वाइन किया है?
उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की सदस्यता ली है।
आनंद दुबे पार्टी में किस पद पर थे?
वह शिवसेना यूबीटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद पर कार्यरत थे।
उनके साथ कौन-से युवा नेता पार्टी में शामिल हुए?
युवा सेना से इमरान शेख, सलाउद्दीन, इरफान शेख, शिरान शेख और अलीम शेख शामिल हुए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·24 मिनट पहले

बालासाहेब के ज़माने से शिवसेना को देखने वाले हर पुराने कार्यकर्ता के लिए यह दृश्य बहुत जाना-पहचाना सा है। जब घर के विचार बदलने लगते हैं, तो लोग ट्रेन बदलने जैसा बड़ा फैसला ले ही लेते हैं, जैसा आनंद दुबे ने किया।

Ravikash Gupta@ravikash·44 मिनट पहले

नेता तो पार्टी बदलते रहते हैं, पर लगता नहीं कि इससे जमीन पर कोई बड़ा असर पड़ेगा।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·43 मिनट पहले

रविकश जी, बात सही है आपकी। पिछले साल जब मैं मुंबई गई थी, तो शिवसेना के दफ्तर के बाहर ऐसे ही नेताओं की भीड़ देखी थी जो पाला बदल रहे थे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

आनंद दुबे जी ने पार्टी छोड़ने की वजह तो बड़ी दमदार बताई, पर राजनीति में कोई भी सिर्फ वैचारिक मतभेद के लिए इतना बड़ा कदम नहीं उठाता। लगता है अंदर खाने कुछ और ही सौदेबाजी हुई होगी, जिसका खुलासा चुनाव के वक्त होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, सौदेबाजी हो या विचारधारा की बात, मुंबई और ठाणे की राजनीति में अब यूबीटी के लिए मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं।

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