लोकप्रिय डिजाइन प्लेटफॉर्म फिगमा ने सॉफ्टवेयर टीमों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई एजेंट्स के काम करने के तरीके को नया रूप देने के उद्देश्य से कई बड़े फीचर्स की घोषणा की है। भारत में आयोजित कंपनी के पहले कॉन्फिग कार्यक्रम के दौरान पेश किए गए इन नए टूल्स में मार्कडाउन आधारित नया एडिटर, कोड लेयर्स का व्यापक विस्तार और हेडलेस कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम पेलोड का इंटीग्रेशन शामिल है। इन सभी बदलावों का मुख्य मकसद यह तय करना है कि फिगमा के अपने एजेंट्स और थर्ड पार्टी एआई बॉट्स किसी भी ब्रांड के डिजाइन नियमों, कोड लाइब्रेरी और दिशा-निर्देशों का सटीक पालन करते हुए काम कर सकें।
डिजाइन सिस्टम को अनुशासित करेगा फिगमा स्पेक्स
कंपनी ने 'फिगमा स्पेक्स' नाम से एक नया फीचर पेश किया है। यह एक मार्कडाउन एडिटर है जो डिजाइनरों और सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को अपनी डिजाइन भाषा को बेहद सरल तरीके से परिभाषित करने की सुविधा देता है। यह दस्तावेज पूरी टीम के साथ-साथ स्वचालित एजेंट्स के लिए एक केंद्रीय संदर्भ बिंदु के रूप में काम करता है। फिगमा स्पेक्स को कैनवस के भीतर एक अलग फाइल के रूप में रखा जा सकता है या फिर इसे मुख्य कैनवस पर ही साथ-साथ चलाया जा सकता है।
केवल एक सामान्य टेक्स्ट एडिटर बनने से इतर यह टूल कई तरह के डिजाइन तत्वों को सीधे जोड़ने की क्षमता देता है। उपयोगकर्ता कैनवस पर मौजूद किसी भी घटक का संदर्भ दे सकते हैं, साथ ही फिजजैम डायग्राम, कोड लेयर्स और पूरे डिजाइन को इस दस्तावेज में एम्बेड कर सकते हैं। इसके माध्यम से टीमें डिजाइन लाइब्रेरी, कोड लाइब्रेरी और ब्रांड गाइडलाइंस को एक ही सिस्टम में लाकर संदर्भ को नियंत्रित कर सकती हैं। एआई की अनिश्चित प्रकृति को देखते हुए यह ढांचा मॉडल को तय नियमों में बांधकर अधिक सटीक और अनुमानित परिणाम देने में मदद करता है।
कोड लेयर्स अब सभी के लिए ओपन बीटा में उपलब्ध
फिगमा ने अपने 'कोड लेयर्स' फीचर को सार्वजनिक तौर पर ओपन बीटा में जारी कर दिया है। यह फीचर कैनवस पर सीधे डिजाइन के साथ कोडिंग जोड़ने की अनुमति देता है, जिससे टीमें बेहद इंटरैक्टिव और वास्तविक प्रोटोटाइप तैयार कर सकती हैं। कंपनी ने इस टूल को जून के महीने में प्राइवेट बीटा के तहत पेश किया था, जिसे अब भारत में आयोजित इस सम्मेलन के जरिए व्यापक यूजर बेस के लिए खोल दिया गया है।
इस सुविधा की मदद से उपयोगकर्ता अब एआई एजेंट से किसी डिजाइन को सीधे कोड में बदलने का अनुरोध कर सकते हैं। इसके अलावा प्रोटोटाइप पर तेजी से काम करने के लिए कोड के किसी खास हिस्से में बदलाव करने का निर्देश भी एजेंट को दिया जा सकता है। फिगमा के चीफ डिजाइन ऑफिसर लोरडाना क्रिज़न के अनुसार, सॉफ्टवेयर टीमें फिगमा का उपयोग यह तय करने के लिए करती हैं कि उन्हें क्या बनाना और जारी करना है। लोरडाना क्रिज़न ने कहा, "There are 17-times more lines of code being produced today than in the past. But when you’re looking at releases, only 1.3-times more releases." उन्होंने स्पष्ट किया कि इनमें से अधिकांश कोड तुरंत लॉन्च करने के लिए नहीं, बल्कि उत्पाद के डिजाइन और उसकी उपयोगिता को समझने के लिए लिखा जा रहा है।
एमसीपी टूल्स का विस्तार और पेलोड इंटीग्रेशन
प्लेटफॉर्म ने अपने मॉडल कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल यानी एमसीपी के साथ 20 से अधिक नए टूल्स को जोड़ने की घोषणा की है। इनमें ओपन कोड, डिया, ग्रॉक बॉट और भारतीय एआई स्टार्टअप सर्वम शामिल हैं। इन टूल्स के जुड़ने से डेवलपर्स को अपने मौजूदा वर्कफ़्लो में विभिन्न एआई क्षमताओं को जोड़ने में काफी आसानी होगी।
इसके साथ ही पिछले वर्ष अधिग्रहित किए गए ओपन सोर्स हेडलेस सीएमएस पेलोड का इंटीग्रेशन अब 'फिगमा मेक' के साथ कर दिया गया है। इसकी मदद से टीमें सीधे प्लेटफॉर्म के अंदर से डायनामिक वेबसाइट बना सकती हैं और कंटेंट का लाइव प्रबंधन कर सकती हैं। कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 महीनों में पेलोड के डाउनलोड में छह गुना की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
भारतीय बाजार में फिगमा का तेजी से बढ़ता नेटवर्क
फिगमा के लिए भारतीय बाजार रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण बन चुका है। कंपनी ने पिछले साल के अंत में भारत में अपना पहला कार्यालय खोला था, जहां से सेल्स, पार्टनरशिप, गो-टू-मार्केट और प्रोडक्ट सपोर्ट से जुड़े काम संचालित किए जाते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारत यूजर्स की संख्या के मामले में फिगमा का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। इसके अलावा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध भारत की शीर्ष 100 कंपनियों में से 40 प्रतिशत कंपनियां वर्तमान में फिगमा प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपने उत्पादों को तैयार करने के लिए कर रही हैं।


















