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टिकटॉक के कर्मचारियों ने उठाई थी बच्चों की सुरक्षा पर चिंता, शीर्ष अधिकारियों पर अनदेखी का आरोपऐप्स
21 अक्तू॰ 2026, 11:41 pm (6 दिन पहले)· 2

टिकटॉक के कर्मचारियों ने उठाई थी बच्चों की सुरक्षा पर चिंता, शीर्ष अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप

अदालत के दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि टिकटॉक के कर्मचारियों ने बाल सुरक्षा और यौन शोषण जैसे गंभीर जोखिमों को लेकर अधिकारियों को बार-बार चेतावनी दी थी, लेकिन कंपनी की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक को अपने कर्मचारियों की ओर से बार-बारी चेतावनियां मिल रही थीं कि यह ऐप बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। अदालत के रिकॉर्ड से सामने आए दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है कि कर्मचारियों ने कंपनी के भीतर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े खतरों को लेकर आवाज उठाई थी। इसमें बच्चों का यौन शोषण और आत्महत्या से जुड़ी सामग्री तक पहुंच जैसे गंभीर मुद्दे शामिल थे, लेकिन इसके बावजूद शीर्ष स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

मार्च 2026 में दायर किए गए कर्मचारियों के बयान इस सोशल मीडिया कंपनी की बाल सुरक्षा नीतियों पर एक नया प्रकाश डालते हैं। इन दस्तावेजों के अनुसार, कर्मचारियों ने आंतरिक स्तर पर चिंता जताई थी कि नाबालिग बच्चों के वीडियो और सामग्री को टिकटॉक पर पैसे देकर खरीदा जा सकता है। इससे यह आशंका जताई गई थी कि कंपनी इस संभावित अवैध गतिविधि से मुनाफा कमा रही है। इसके अलावा, यह भी सामने आया कि नाबालिग उपयोगकर्ता उम्र से जुड़ी पाबंदियों के नियमों को दरकिनार करने के लिए लूपहोल का इस्तेमाल कर रहे थे और अपनी ऑनलाइन गतिविधियों को अभिभावकों से छिपाने में सफल हो रहे थे।

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عدालत के इन दस्तावेजों से एक और चौकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि कंपनी ने अपने उपयोगकर्ताओं की सही उम्र का पता लगाने के लिए कोई सर्वे नहीं कराया था। इसके पीछे मुख्य वजह यह थी कि यदि सर्वे किया जाता, तो उसके परिणाम फेडरल ट्रेड कमीशन के साथ साझा करने पड़ते, जिससे कंपनी बचना चाहती थी। कर्मचारियों की इन तमाम चिंताओं और आंतरिक चेतावनियों के बावजूद प्रबंधन का रवैया उदासीन बना रहा, जिससे अंदरूनी स्तर पर भारी नाराजगी देखने को मिली।

इन तमाम आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए एक टिकटॉक प्रवक्ता ने कहा कि ये दावे मुकदमे के वकीलों के इशारे पर चुने गए हैं और इनका इस्तेमाल हमारे इतिहास को गलत तरीके से पेश करने के लिए किया जा रहा है। प्रवक्ता ने आगे कहा कि हमने ट्रस्ट एंड सेफ्टी विभाग में अरबों डॉलर का निवेश किया है और किशोरों के लिए परिवार पेयरिंग सहित 50 से अधिक सुरक्षा, गोपनीयता और सुरक्षा सेटिंग्स शुरू की हैं। कंपनी का दावा है कि वह अपने उपयोगकर्ताओं की भलाई के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उनके रिकॉर्ड को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।

वर्तमान में टिकटॉक के साथ-साथ मेटा, गूगल और स्नैप जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियां भी संघीय अदालत में सैकड़ों मुकदमों का सामना कर रही हैं। इन सभी मुकदमों में मुख्य आरोप यह लगाया गया है कि इन कंपनियों के प्लेटफॉर्म नाबालिगों को नुकसान पहुंचाते हैं और उन्होंने युवाओं के लिए मौजूद इन ज्ञात जोखिमों को जानबूझकर छिपाया है। इन विवादों के बीच टिकटॉक ने मुकदमे की नौबत आने से पहले ही कई मामलों में समझौते भी कर ली हैं, जबकि लॉस एंजिल्स में एक ज्यूरी ने फैसला सुनाया था कि मेटा और यूट्यूब ने अपने प्लेटफॉर्म्स को युवा उपयोगकर्ताओं के लिए जानबूझकर व्यसनकारी यानी एडिक्टिव बनाया है।

सवाल-जवाब

टिकटॉक के खिलाफ ये दस्तावेज किस अदालत या रिकॉर्ड से सामने आए हैं?
ये दस्तावेज अदालत में दायर किए गए कर्मचारियों के ब depositions से सामने आए हैं जिन्हें मार्च 2026 में फाइल किया गया था।
कर्मचारियों ने मुख्य रूप से किन खतरों की चेतावनी दी थी?
कर्मचारियों ने नाबालिगों के यौन शोषण, पैसे देकर खरीदी जाने वाली सामग्री और उम्र से जुड़ी पाबंदियों के लूपहोल का बच्चों द्वारा इस्तेमाल करने की चेतावनी दी थी।
कंपनी ने उपयोगकर्ताओं की उम्र का सर्वे क्यों नहीं करवाया था?
कंपनी को डर था कि सर्वे कराने पर उसके परिणाम फेडरल ट्रेड कमीशन के साथ साझा करने पड़ेंगे।
टिकटॉक के प्रवक्ता ने इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
प्रवक्ता ने कहा कि ये दावे वकीलों के इशारे पर चुने गए हैं और कंपनी ने ट्रस्ट एंड सेफ्टी में अरबों डॉलर का निवेश किया है।
टिकटॉक के अलावा और कौन सी कंपनियां इन मुकदमों का सामना कर रही हैं?
टिकटॉक के साथ-साथ मेटा, गूगल और स्नैप जैसी कंपनियां भी संघीय अदालत में इन मुकदमों का सामना कर रही हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Meera Joshi@meera-joshi·6 दिन पहले

बच्चों की हिफ़ाजत दांव पर लगाकर मुनाफ़ा कमाने की ऐसी खबरें दिल दहला देती हैं। जब अंदर के लोग ही बार-बार चेता रहे थे, तो फिर कंपनी के बड़े लोगों ने अपनी आँखें कैसे मूँद लीं? क्या बच्चों की मानसिक सेहत से ज्यादा जरूरी इनके लिए हमेशा सिर्फ लाइक्स और पैसा ही रहेगा?

Rohan Gupta@rohan-gupta·6 दिन पहले

बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर कंपनियों का ऐसा रवैया देखकर हैरानी होती है। जब अपने ही कर्मचारी चेतावनी दे रहे थे, तब भी सुनवाई नहीं हुई।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·6 दिन पहले

रोहन जी, बात तो आपकी बिल्कुल सही है। पर क्या कंपनी पर इतने दबाव के बाद भी बच्चों के लिए हालात सच में बदलेंगे?

Ravikash Gupta@ravikash·6 दिन पहले

मैनेजमेंट पर पूरा इल्जाम लगाना ठीक नहीं, कर्मचारी भी तो सिर्फ अपनी नौकरी बचा रहे थे उस वक्त।

Michael Anderson@michael-anderson·6 दिन पहले

रविकेश, नौकरी बचाना एक बात है, पर बच्चों की सुरक्षा पर चुप रहना कैसे सही हो सकता है? क्या सरकार अब इन अधिकारियों पर कोई सख्त आपराधिक कार्रवाई करेगी?

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