वेब ब्राउज़िंग के तौर-तरीकों को नए सिरे से डिजाइन करने वाला आर्क ब्राउज़र अब विदाई लेने जा रहा है। सॉफ्टवेयर निर्माता द ब्राउज़र कंपनी ने गुरुवार को आधिकारिक एलान करते हुए पुष्टि की है कि वह 22 दिसंबर 2026 को आर्क ब्राउज़र को बंद करने जा रही है। इसके साथ ही कंपनी अपने सभी मौजूदा यूज़र्स को अपने नए एआई केंद्रित ब्राउज़र डिया पर शिफ्ट होने की सलाह दे रही है। कंपनी का कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मौजूदा दौर में एक अलग ब्राउज़र को पूरी तरह सुरक्षित बनाए रखने के लिए भारी लागत और लगातार तकनीकी संसाधनों की ज़रूरत पड़ रही है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है।
कंपनी के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में ब्राउज़र को साइबर खतरों से सुरक्षित रखना एक निरंतर चलने वाला और चुनौतीपूर्ण काम बन चुका है। कंपनी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि डिया को शुरुआत से ही आज के कड़े सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यही वजह है कि अब कंपनी के सभी इंजीनियरिंग और साइबर सुरक्षा दल अपने पूरे प्रयास डिया को मजबूत बनाने में ही लगाएंगे।
तीन चरणों में पूरा होगा शटडाउन का प्रोसेस
आर्क ब्राउज़र को पूरी तरह बंद करने की योजना को तीन अलग-अलग चरणों में बांटा गया है। इस प्रक्रिया की शुरुआत गुरुवार से ही हो चुकी है, जिसके तहत अब नए आर्क अकाउंट बनाने की सुविधा बंद कर दी गई है। जो लोग पहली बार इसे डाउनलोड कर इस्तेमाल करना चाहते हैं, वे अब नया खाता रजिस्टर नहीं कर सकेंगे।
इसके बाद अगला चरण 23 नवंबर से प्रभावी होगा। इस तारीख को आईओएस और एंड्रॉयड पर उपलब्ध आर्क सर्च ऐप से सभी एआई फीचर्स हटा दिए जाएंगे, जिसमें चर्चित ब्राउज़ फॉर मी फीचर भी शामिल है। इसके अलावा यूज़र्स ऐप में साइन इन करने या अलग-अलग डिवाइसेज के बीच अपने खुले हुए टैब सिंक करने की सुविधा खो देंगे। हालांकि, यह मोबाइल ऐप स्थानीय स्तर पर एक बेहद बुनियादी वेब ब्राउज़र की तरह फोन में काम करना जारी रखेगा।
अंतिम चरण 22 दिसंबर को लागू होगा, जब मैक और विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम पर आर्क पूरी तरह काम करना बंद कर देगा। इस तारीख को सभी यूज़र अकाउंट्स निष्क्रिय कर दिए जाएंगे और अगले 30 दिनों के भीतर यूज़र्स का सारा पर्सनल डेटा कंपनी के सर्वर से हमेशा के लिए डिलीट कर दिया जाएगा। इसी दिन आर्क सर्च को गूगल प्ले स्टोर से भी पूरी तरह हटा लिया जाएगा।
ओपन सोर्स करने की मांग और तकनीकी अड़चन
सोशल मीडिया पर आर्क के समर्पित यूज़र्स ने इस फैसले पर तीखी निराशा जताई है। कई प्रशंसकों ने कंपनी से आग्रह किया कि यदि वह इस प्रोजेक्ट को आगे नहीं चलाना चाहती, तो आर्क के कोड को ओपन सोर्स कर दिया जाए ताकि स्वतंत्र डेवलपर्स इसे जीवित रख सकें।
हालांकि, सीईओ जोश मिलर ने पहले ही इस तरह की संभावनाओं पर तकनीकी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। मिलर के मुताबिक, आर्क का पूरा ढांचा कंपनी के आंतरिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट किट यानी आर्क डेवलपमेंट किट (ADK) पर आधारित है। यही प्रोप्रायटरी इंजन नए ब्राउज़र डिया को भी संचालित करता है। ऐसे में यदि आर्क को ओपन सोर्स किया जाता है, तो कंपनी को अपनी सबसे अहम बौद्धिक संपदा यानी ADK का कोड भी सार्वजनिक करना पड़ेगा, जो कंपनी के पूरे व्यावसायिक मूल्य का आधार है। मिलर ने पहले रेखांकित किया था कि कंपनी भविष्य में आर्क को कभी ओपन सोर्स करना पसंद करेगी, लेकिन ADK को सार्वजनिक किए बिना ऐसा कर पाना संभव नहीं है।
डिया में क्या मिलेगा आर्क यूज़र्स को
द ब्राउज़र कंपनी का दावा है कि स्पीड, स्थिरता और सुरक्षा के मामलों में डिया अब आर्क से काफी आगे निकल चुका है। जो यूज़र्स आर्क से डिया पर शिफ्ट होंगे, उन्हें कई जाने-पहचाने फीचर्स नए अवतार में मिलेंगे। उदाहरण के लिए, काम और निजी जीवन के अलग-अलग ब्राउज़िंग माहौल को बांटने वाला स्पेसेस फीचर अब प्रोफाइल्स नाम से उपलब्ध रहेगा।
आर्क की सबसे बड़ी पहचान रहे वर्टिकल टैब्स को डिया में एक वैकल्पिक साइडबार लेआउट के रूप में सुरक्षित रखा गया है। पुराने फोल्डर्स फीचर को रीब्रांड करके पिन्ड टैब ग्रुप्स नाम दिया गया है। यूज़र्स के सभी पासवर्ड्स, बुकमार्क, एक्सटेंशन और ब्राउज़िंग हिस्ट्री बिना किसी रुकावट के डिया में ट्रांसफर हो जाएंगे। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि आर्क के मुख्य फीचर्स डिया में बिल्कुल मुफ्त रहेंगे और यूज़र्स के पास एआई का इस्तेमाल करने या न करने का पूरा विकल्प मौजूद रहेगा।
अधिग्रहण और बड़े बाज़ार की चुनौतियां
इस फैसले के साथ ही उस बदलाव पर अंतिम मुहर लग गई है जिसकी नींव 2025 में रखी गई थी, जब कंपनी ने आर्क में नए फीचर्स जोड़ना बंद कर दिया था। द ब्राउज़र कंपनी को 2025 में ही एटलैसियन ने 610 मिलियन डॉलर में खरीदा था। कंपनी ने उस समय स्वीकार किया था कि भले ही शुरुआती तकनीकी उत्साही यूज़र्स ने इसके अनोखे इंटरफेस को खूब सराहा, लेकिन इसके अत्यधिक जटिल बनावट और नए प्रयोगों की वजह से यह आम लोगों के बीच बड़े पैमाने पर अपनी जगह नहीं बना पाया। आर्क तकनीकी दुनिया के एक वर्ग का बेहद पसंदीदा ब्राउज़र ज़रूर बना, लेकिन यह कभी गूगल क्रोम का वह व्यापक विकल्प नहीं बन सका जिसका सपना इसके संस्थापकों ने देखा था।



















