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अरुणाचल प्रदेश के केयी पन्योर में खोजी गई बेगोनिया की अनोखी नई प्रजाति, पूर्वोत्तर में संख्या बढ़कर 54 हुईअरुणाचल प्रदेश
25 सित॰ 2026, 3:14 pm (2 घंटे पहले)· 0

अरुणाचल प्रदेश के केयी पन्योर में खोजी गई बेगोनिया की अनोखी नई प्रजाति, पूर्वोत्तर में संख्या बढ़कर 54 हुई

अरुणाचल प्रदेश के केयी पन्योर जिले में वनस्पति विज्ञानियों ने बेगोनिया नीलमोरम नामक एक नए पौधे की पहचान की है, जिसे स्थानीय स्तर पर कोबीइरहोपु बाब्रई के नाम से जाना जाता है।

अरुणाचल प्रदेश के जंगलों की समृद्ध वनस्पति संपदा में एक और दुर्लभ कड़ी जुड़ गई है। केयी पन्योर जिले में वैज्ञानिकों के एक दल ने बेगोनिया पौधे की एक बिल्कुल नई प्रजाति की पहचान की है। इस नए पौधे को आधिकारिक तौर पर बेगोनिया नीलमोरम (Begonia neelamorum) नाम दिया गया है। इस खोज से संबंधित पूरा शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय समीक्षा प्राप्त वैज्ञानिक पत्रिका ताइवानिया (Taiwania) में प्रकाशित हुआ है। इस खोज की पुष्टि शुक्रवार को अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी में की गई।

स्थानीय समुदाय को समर्पित है नया नाम

इस वनस्पति की खोज शोधकर्ताओं की एक संयुक्त टीम ने की है, जिसमें दीपांकर बोराह, मधुसूदन खनाल, मोमांग ताराम और नीलम गैप शामिल थे। अध्ययन के अनुसार, इस नई प्रजाति का नाम नीशी समुदाय के नीलम कबीले के सम्मान में नीलमोरम रखा गया है। शोध अभियान के दौरान स्थानीय कबीले के सदस्यों ने दल को दुर्गम जंगलों में महत्वपूर्ण सहयोग और जमीनी सहायता प्रदान की थी। क्षेत्रीय स्तर पर स्थानीय लोग इस पौधे को 'कोबीइरहोपु बाब्रई' कहकर पुकारते हैं।

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पौधे की शारीरिक संरचना और अनूठी विशेषताएं

अन्वेषण के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि यह छोटा कंदयुक्त पौधा केयी नदी के किनारे स्थित अत्यंत खड़ी और नम दीवारों पर उगता है। यह क्षेत्र समुद्र तल से लगभग 1,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। देखने में इस पौधे में केवल एक ही हल्का हरा पत्ता होता है जो सीधे तने से जुड़ा रहता है और इस पर सफेद रंग के नर और मादा फूल खिलते हैं। हालांकि पहली नज़र में यह बेगोनिया प्रोलिफेरा जैसा प्रतीत होता है, लेकिन सूक्ष्म परीक्षण के बाद इसमें कई अलग लक्षण पाए गए। इनमें ग्रंथियुक्त बाल, गोल तना, दोहरे दांतेदार किनारों वाले अंडाकार पत्ते, पुष्पक्रम की अनूठी संरचना और तुलनात्मक रूप से छोटी वर्तिकाएं शामिल हैं।

सीमित दायरा और संरक्षण की वर्तमान स्थिति

वर्तमान वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, यह नई प्रजाति केयी पन्योर जिले में केवल तीन वर्ग किलोमीटर के बेहद सीमित भौगोलिक दायरे में ही दर्ज की गई है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के तय मानकों के आधार पर बेगोनिया नीलमोरम को फिलहाल डेटा डेफिशिएंट (आंकड़ों की कमी) श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि इसकी संपूर्ण आबादी और खतरे का सटीक मूल्यांकन करने के लिए अभी पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस नई खोज के साथ ही पूर्वोत्तर भारत में दर्ज बेगोनिया प्रजातियों की कुल संख्या बढ़कर 54 हो गई है। वैश्विक स्तर पर बेगोनिया वंश के तहत लगभग 2,200 स्वीकृत प्रजातियां हैं, जो मुख्य रूप से दुनिया भर के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय इलाकों में पाई जाती हैं।

सवाल-जवाब

अरुणाचल प्रदेश में खोजी गई बेगोनिया की नई प्रजाति का क्या नाम है?
इस नई प्रजाति का वैज्ञानिक नाम बेगोनिया नीलमोरम (Begonia neelamorum) रखा गया है।
इस पौधे का नाम 'नीलमोरम' क्यों रखा गया?
यह नाम नीशी समुदाय के नीलम कबीले के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने शोध दल को अभियान के दौरान सहयोग प्रदान किया था।
स्थानीय भाषा में इस पौधे को किस नाम से जाना जाता है?
स्थानीय स्तर पर इस पौधे को 'कोबीइरहोपु बाब्रई' कहा जाता है।
यह पौधा किस प्रकार के वातावरण में पाया गया है?
यह पौधा केयी नदी के किनारे लगभग 1,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खड़ी और नम चट्टानी दीवारों पर उगता है।
इस पौधे के प्रमुख शारीरिक लक्षण क्या हैं?
इसमें एक हल्का हरा पत्ता, गोल तना, सफेद नर और मादा फूल तथा ग्रंथियुक्त बाल होते हैं।
पूर्वोत्तर भारत में अब बेगोनिया की कितनी प्रजातियां दर्ज हैं?
इस नई खोज के बाद पूर्वोत्तर भारत में बेगोनिया की कुल दर्ज प्रजातियों की संख्या 54 हो गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

अरुणाचल के जंगलों में नई प्रजाति मिलना बढ़िया है, पर सिर्फ तीन वर्ग किलोमीटर में मिलने वाले पौधे पर अभी से इतनी बड़ी खोज का शोर मचाना थोड़ा जल्दबाजी लग रहा है।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·1 घंटे पहले

रविकेश जी, दायरा छोटा होने से खोज का महत्व कम नहीं होता, बल्कि ऐसे दुर्लभ पौधों को बचाने की ज़रूरत और बढ़ जाती है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

पूर्वोत्तर के ऐसे जंगलों में अभी जाने कितने अनजाने पौधे छिपे होंगे, बस स्थानीय लोगों की मदद से सही समय पर खोज हो जाए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

रोहन भाई, नीलमोरम नाम वाकई बहुत बढ़िया लगा जो स्थानीय कबीले को समर्पित किया गया।

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