अरुणाचल प्रदेश के लोअर दिबांग वैली जिले में सिक्किम के चर्चित रैपर उगेन नामग्याल भूटिया, जिन्हें संगीत की दुनिया में यूएनबी के नाम से जाना जाता है, उन पर हुए हमले की जांच में पुलिस को पहली कामयाबी मिली है। कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने इस सिलसिले में एक आरोपी को हिरासत में ले लिया है, जबकि मामले में शामिल 12 अन्य लोगों की पहचान कर ली गई है। अधिकारियों की एक विशेष टीम अब फरार आरोपियों की तलाश में अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही है।
दोइमुख से पकड़ा गया मुख्य आरोपी
जांच अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए युवक का नाम 22 वर्षीय नबाम तपांग है। वह पापुम पारे जिले के लेपोरियांग सर्कल स्थित बोबिया गांव का निवासी है। पुलिस टीम ने ईटानगर पुलिस की मदद से एक संयुक्त अभियान चलाकर बुधवार रात दोइमुख से उसे पकड़ने में सफलता हासिल की। लोअर दिबांग वैली के पुलिस अधीक्षक रिंगू न्गुपोक ने पुष्टि की कि इस पूरे घटनाक्रम में कुल 13 लोग शामिल थे। पकड़े गए आरोपी के अलावा बाकी चिन्हित किए गए सभी 12 संदिग्ध भी पापुम पारे जिले के ही रहने वाले बताए गए हैं।
कॉन्सर्ट से लौटते वक्त रास्ते में हुआ हमला
यह हिंसक घटना सोमवार शाम को तिवारी गांव के पास पेश आई थी। रैपर यूएनबी और उनके मैनेजर दिबांग वैली जिले के अनिली में एक म्यूजिकल कॉन्सर्ट पूरा करने के बाद गाड़ी से रोइंग की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान दो अन्य गाड़ियों ने लगभग एक घंटे तक उनका पीछा किया। इसके बाद रोइंग से करीब 39 किलोमीटर दूर एक सुनसान सड़क पर पीछा कर रही गाड़ियों ने उनकी कार को जबरन रुकवा लिया।
लोहे की रॉड से हमला और तोड़फोड़
अधिकारियों के विवरण के अनुसार, आरोपियों ने पहले लोहे की रॉड से रैपर की गाड़ी में जमकर तोड़फोड़ की और फिर गाड़ी में सवार यूएनबी और उनके मैनेजर पर जानलेवा हमला कर दिया। हमले में रैपर यूएनबी के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं और उनकी एक आंख के आसपास काफी सूजन आ गई। हमलावर तब तक मारपीट करते रहे जब तक कि मौके पर वहां से गुजर रहा एक ट्रक नहीं आ पहुंचा। ट्रक की रोशनी और हलचल देखकर सभी हमलावर मौके से फरार हो गए।
जांच में चुनौतियां और आगे की कार्रवाई
घटना के तुरंत बाद रोइंग पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक रिंगू न्गुपोक के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल गठित किया गया है। घटनास्थल रोइंग से 39 किलोमीटर दूर अत्यंत दुर्गम और घने इलाके में होने के कारण वहां मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी बिल्कुल नहीं थी, जिससे शुरुआती जांच में पुलिस को तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ा।
हालांकि, पुलिस ने उस गाड़ी का पता लगाने में कामयाबी पाई जिसका इस्तेमाल वारदात में किया गया था। इस सुराग से एक संदिग्ध की पहचान हुई और कड़ियां जोड़ते हुए अन्य सभी आरोपियों के नाम सामने आ गए। जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आ रहे हैं, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता के तहत प्रासंगिक धाराएं भी बढ़ा दी हैं। अब पुलिस की टीमें बाकी बचे 12 संदिग्धों को जल्द से जल्द दबोचने और हमले के पीछे के मकसद का पता लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।



















