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अरुणाचल के जीरो में पक्षी प्रेमियों को दिखा दुर्लभ रेड-कॉलर्ड डव, 15 प्रजातियां दर्जअरुणाचल प्रदेश
31 अक्तू॰ 2026, 3:40 pm (1 घंटे पहले)· 1

अरुणाचल के जीरो में पक्षी प्रेमियों को दिखा दुर्लभ रेड-कॉलर्ड डव, 15 प्रजातियां दर्ज

अरुणाचल प्रदेश की जीरो घाटी में आयोजित 35वें बर्ड वॉक के दौरान ऊंचाई वाले इलाके में असामान्य रूप से रेड-कॉलर्ड डव पक्षी देखा गया। इस आयोजन में पर्यावरणविदों ने कुल 15 पक्षी प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की।

अरुणाचल प्रदेश के निचले सुबनसिरी जिले में स्थित सुरम्य जीरो घाटी एक बार फिर पक्षी प्रेमियों और शोधकर्ताओं के आकर्षण का केंद्र बन गई। पारंपरिक कृषि भूमि पिगे अजी में संपन्न हुए जीरो बर्ड वॉक के 35वें संस्करण के दौरान कुल 15 विभिन्न पक्षी प्रजातियों की पहचान की गई। इस बार के अभियान का सबसे प्रमुख आकर्षण ऊंचाई वाले क्षेत्र में रेड-कॉलर्ड डव का अचानक नजर आना रहा। अमूमन निचले मैदानी या कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दिखने वाले इस पक्षी का इतनी ऊंचाई पर पाया जाना वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए काफी अप्रत्याशित और सुखद आश्चर्य लेकर आया।

शरदकालीन प्रवास और दुर्लभ प्रजातियों की खोज

जीरो घाटी का पिगे अजी इलाका अपनी पारंपरिक खेती के साथ-साथ मौसम बदलने पर प्रवासी पक्षियों की पसंदीदा पनाहगाह के तौर पर जाना जाता है। बदलते मौसम के इस दौर में यहां सैकड़ों परिंदे अस्थायी ठिकाना तलाशते हैं। इस बार के बर्ड वॉक के दौरान रेड-कॉलर्ड डव के अलावा अन्य महत्वपूर्ण पक्षी प्रजातियां भी कैमरे और दूरबीनों में कैद हुईं। इनमें नदर्न लैपविंग, पैसिफिक गोल्डन प्लोवर, हिमालयन बज़ार्ड और यूरेशियन स्पैरोहॉक प्रमुख रूप से शामिल रहे। पक्षी विशेषज्ञों और फील्ड गाइडों ने ऊंचाई वाले वातावरण में इन प्रजातियों की उपस्थिति पर विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता जताई है।

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प्रकृति प्रेमियों और स्थानीय समुदाय की साझी मुहिम

इस प्रकृति भ्रमण में स्थानीय प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव संरक्षणकर्ताओं और अनुभवी बर्डवॉचर्स ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी प्रतिभागियों ने घाटी के समृद्ध और विविधतापूर्ण पक्षी जीवन का जायजा लिया। साथ ही, इन परिंदों के प्राकृतिक आवासों को मानवीय दखल से सुरक्षित रखने के उपायों पर जोर दिया गया। वन्यजीव प्रेमी कोज मामा और उनके सहयोगी पर्यावरण संरक्षकों द्वारा शुरू की गई यह पहल अब एक मजबूत जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। इसका प्राथमिक उद्देश्य आम नागरिकों में स्थानीय जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन के प्रति संवेदनशीलता जगाना है।

संस्थागत सहयोग और भावी संरक्षण की उम्मीद

जीरो बर्ड वॉक के इस सफल आयोजन में अरुणाचल प्रदेश पर्यावरण एवं वन विभाग, अरुणाचल पर्यटन, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा अरुणाचल प्रदेश बर्डिंग क्लब ने स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर अपना पूरा सहयोग दिया। आयोजकों ने बताया कि यह सामुदायिक पहल देशी और प्रवासी दोनों तरह के पक्षियों के लिए जीरो घाटी के महत्व को वैश्विक पटल पर रेखांकित करती है। आयोजकों को विश्वास है कि इस तरह के प्रयासों से स्थानीय आबादी और विशेष रूप से युवा पीढ़ी पक्षी दर्शन तथा पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित होगी।

सवाल-जवाब

जीरो बर्ड वॉक का कौन सा संस्करण आयोजित किया गया था?
यह जीरो बर्ड वॉक का 35वां संस्करण था, जो शरद ऋतु के दौरान आयोजित किया गया।
इस बर्ड वॉक के दौरान कुल कितनी पक्षी प्रजातियां दर्ज की गईं?
इस आयोजन के दौरान शोधकर्ताओं और पक्षी प्रेमियों ने कुल 15 पक्षी प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की।
इस आयोजन का सबसे असामान्य और मुख्य आकर्षण क्या रहा?
निचले इलाकों में पाए जाने वाले रेड-कॉलर्ड डव पक्षी को एक ऊंचाई वाले स्थान पर असामान्य रूप से देखा जाना इसका मुख्य आकर्षण रहा।
यह बर्ड वॉक किस खास जगह पर आयोजित किया गया था?
यह अरुणाचल प्रदेश के निचले सुबनसिरी जिले में जीरो घाटी के पिगे अजी पारंपरिक कृषि क्षेत्र में आयोजित किया गया था।
रेड-कॉलर्ड डव के अलावा वहां कौन से अन्य पक्षी देखे गए?
अन्य पक्षियों में नदर्न लैपविंग, पैसिफिक गोल्डन प्लोवर, हिमालयन बज़ार्ड और यूरेशियन स्पैरोहॉक शामिल थे।
जीरो बर्ड वॉक की शुरुआत किसने की थी?
इसकी शुरुआत वन्यजीव प्रेमी कोज मामा और अन्य स्थानीय प्रकृति प्रेमियों ने मिलकर की थी।
इस आयोजन को किन सरकारी विभागों और संस्थाओं का सहयोग मिला?
इसे अरुणाचल प्रदेश पर्यावरण एवं वन विभाग, अरुणाचल पर्यटन, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा अरुणाचल प्रदेश बर्डिंग क्लब का सहयोग मिला।
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टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·14 मिनट पहले

जीरो घाटी में इतनी ऊंचाई पर रेड-कॉलर्ड डव का दिखना वाकई हैरान करने वाला है। क्या जलवायु में आ रहे बदलाव की वजह से इन परिंदों के रास्ते बदल रहे हैं?

Arjun Mehta@arjun-mehta·35 मिनट पहले

जीरो घाटी में इतनी ऊंचाई पर रेड-कॉलर्ड डव दिखना वाक़ई हैरान करने वाला है। मौसम के बदलते मिजाज का असर परिंदों की आवाजाही पर साफ़ दिख रहा है।

Meera Joshi@meera-joshi·35 मिनट पहले

अर्जुन, आपकी बात सही है। जब मैं पिछले साल जीरो गई थी, तो वहां की खामोशी और इन परिंदों को देखकर मुझे जो मानसिक शांति मिली थी, वह आज भी याद है।

Rohan Verma@rohan-verma·57 मिनट पहले

जीरो घाटी में इतनी ऊंचाई पर रेड-कॉलर्ड डव का दिखना वाकई हैरान करने वाला है। क्या जलवायु में आ रहे बदलाव की वजह से इन परिंदों के पारंपरिक रास्ते बदल रहे हैं?

Ravikash Gupta@ravikash·57 मिनट पहले

रोहन भाई, पिगे अजी जैसे खेतों में इतने सारे प्रवासी परिंदों का एक साथ दिखना सचमुच गज़ब है।

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