राजस्थान के कोटा शहर में प्रकृति और आस्था का एक अनूठा संगम देखने को मिला है, जहां एक सामान्य से फल पर ऐसी आकृति उभर आई जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। शिक्षा नगरी के नाम से मशहूर इस शहर के एक आवासीय परिसर में लगे पपीते पर भगवान गणेश के स्वरूप की झलक साफ दिखाई दे रही है। इस अजीबोगरीब और अद्भुत दृश्य के सामने आने के बाद से ही स्थानीय नागरिकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और लोग बड़ी संख्या में इस फल को देखने पहुंच रहे हैं।
बगीचे के पेड़ पर दिखा यह अनोखा नजारा
यह पूरा मामला चंबल नदी के पार कुन्हाड़ी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बालिका रोड पर स्थित आदर्श नगर का है। यहां रहने वाले गुलाबचंद बनवाड़िया के घरेलू बगीचे में एक साल पुराना पपीते का पेड़ लगा हुआ है। इस पौधे पर अन्य फल भी लदे हुए हैं, लेकिन उनमें से एक खास पपीते की बनावट ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। जब इस अनोखी आकृति पर घर के सदस्यों की नजर पड़ी, तो वे आश्चर्यचकित रह गए। देखते ही देखते इस बात की चर्चा पूरे इलाके में फैल गई और आसपास के लोग इसे देखने के लिए इकट्ठा होने लगे।
घर के मंदिर में स्थापित किया गया पपीता
इस अनूठे फल को देखने वाले गुलाबचंद बनवाड़िया और उनकी पत्नी कमल बनवाड़िया दोनों ही शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्ति प्राप्त कर चुके हैं। परिवार ने इस पपीते को बेहद पवित्र मानते हुए इसे अपने घर के मंदिर में ससम्मान स्थापित कर दिया है। मंदिर में इसकी नियमित पूजा-पासना शुरू कर दी गई है और आरती का दौर भी चल रहा है। इस परिवार के बेटे अंकित बनवाड़िया एक कला शिक्षक हैं, जो ड्राइंग की बारीकियों को भली-भांति समझते हैं। उनके लिए भी प्रकृति की यह अनूठी कारीगरी खासी कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीर
इस अनोखी घटना की जानकारी तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए फैल गई। बड़गांव के रहने वाले रामराज जो रोजाना इस घर में दूध पहुंचाने आते हैं, उन्हें जब इस आकृति के बारे में पता चला तो वे भी तुरंत दर्शन के लिए रुक गए। इसके अलावा डॉक्टर निधि को भी सोशल मीडिया के माध्यम से ही इस बात की खबर मिली और वे भी मौके पर पहुंचकर पूजा-अर्चना में शामिल हुईं। उनका ऐसा मानना है कि प्रकृति का यह रूप बेहद अलौकिक है और उन्हें इसके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
शरद पूर्णिमा पर तय किया गया विसर्जन
परिवार के सदस्यों के अनुसार यह विशेष आकृति हाल ही में सामने आई थी। धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों को ध्यान में रखते हुए अब इस फल के विसर्जन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसके लिए पंडितों से सलाह लेकर शरद पूर्णिमा के पावन और शुभ मुहूर्त का चयन किया गया है, जिसके अनुसार ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वैज्ञानिक नजरिए से भले ही यह किसी फल की प्राकृतिक बढ़त या अनोखा आकार हो सकता है, लेकिन आस्था से जुड़े लोगों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। कोटा के इस शांत इलाके में हुई इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आस्था और विश्वास लोगों के जीवन में कितना गहरा प्रभाव रखते हैं।























