अरुणाचल प्रदेश से लोकसभा सांसद तापीर गाओ ने असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच बढ़ते सीमा विवाद को शांत करने के लिए एक अहम पहल की है। उन्होंने असम के मिसिंग समुदाय के शीर्ष छात्र संगठन ताकाम मिसिंग पोरीन केबांग (TMPK) से अंतर-राज्यीय सीमा पर जारी अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी को तुरंत वापस लेने का आग्रह किया है। यह अपील बुधवार को नई दिल्ली स्थित सांसद के निजी आवास पर आयोजित एक बैठक के दौरान की गई, जहां छात्र संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने सीमावर्ती क्षेत्र में हुई हिंसा के बाद के हालात पर चर्चा की।
दिल्ली में बैठक और छात्र प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी
असम से आए छात्र प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व TMPK अध्यक्ष तिलक डोले ने किया। इस उच्च स्तरीय वार्ता में संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में उपाध्यक्ष पोंगकिल पातीर, सचिव अजय मिली और संयुक्त सचिव मिगोम डोले, बुधिन डोले तथा मोनीदीप पेगु मौजूद रहे। इस बातचीत के दौरान सांसद ने छात्र नेताओं के साथ मिलकर सीमा पर व्याप्त तनाव को कम करने और स्थिति सामान्य बनाने के तरीकों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
बैठक के बाद अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए तापीर गाओ ने सोशल मीडिया पर चर्चा का ब्योरा साझा किया और छात्र नेताओं के सहयोगात्मक रवैये की सराहना की। गाओ ने कहा, "मैं उनके सकारात्मक रुख और सहयोग की सराहना करता हूं और लोगों के व्यापक हित में सौहार्दपूर्ण समाधान को लेकर आशान्वित हूं।" उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आम जनता को परेशानी में डालने वाली नाकेबंदी के बजाय आपसी बातचीत से ही विवादों को सुलझाया जाना चाहिए।
सीमा विवाद की पृष्ठभूमि और गोलीबारी की घटना
असम के मिसिंग समुदाय के छात्र संगठन द्वारा शुरू किए गए इस आंदोलन की वजह इस हफ्ते की शुरुआत में हुई एक हिंसक झड़प है। सोमवार को असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा पर स्थित धेमाजी जिले के मिंगमांग बादाती इलाके में गोलीबारी की घटना हुई थी। अंतर-राज्यीय सीमा पर कथित भूमि कब्जे के विवाद को लेकर हुई इस हिंसा में असम के 12 लोग घायल हो गए थे। यह घटना हिमे गांव के आसपास बने तनाव से भी जुड़ी हुई है, जिसने दोनों क्षेत्रों के बीच विवाद को और बढ़ा दिया।
इस हिंसा के विरोध में TMPK ने अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी का ऐलान कर दिया था। इस नाकेबंदी के कारण दोनों पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने वाले कई प्रमुख सड़क मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है।
अवरुद्ध मार्ग और स्थानीय आबादी पर प्रभाव
आर्थिक नाकेबंदी के कारण असम और अरुणाचल प्रदेश को जोड़ने वाले कई महत्वपूर्ण रास्ते बंद पड़े हैं। प्रदर्शनकारियों ने द्वारमुख-बांदरदेवा, धेमाजी जिले के रुकसिन और लखीमपुर जिले के बांदरदेवा में यातायात रोक दिया है। इसके अलावा गोहपुर के सोलेगी और विश्वनाथ के पाभोई में भी प्रमुख मार्गों को जाम कर दिया गया है, जिससे पड़ोसी जिलों के बीच परिवहन संपर्क कट गया है।
नाकेबंदी के व्यापक असर पर चिंता जताते हुए सांसद तापीर गाओ ने चेतावनी दी कि व्यापारिक और सार्वजनिक परिवहन रुकने से सीमा के दोनों ओर रहने वाले आम नागरिकों का जीवन कठिन हो जाएगा। उन्होंने असम और अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती समुदायों के बीच वर्षों पुराने शांति और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया तथा सभी पक्षों से शांतिपूर्ण वार्ता का रास्ता चुनने का आग्रह किया।















