अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर राजधानी क्षेत्र में अचानक बढ़ने वाले बुखार के मामलों को देखते हुए प्रशासन ने स्थानीय निवासियों के लिए डेंगू का अलर्ट जारी किया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से बेहद सतर्क रहने और बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर तुरंत इलाज शुरू कराने की अपील की है ताकि इस बीमारी को फैलने से रोका जा सके।
ईटानगर राजधानी क्षेत्र की जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. सी. लोवांग मल्लो द्वारा शनिवार को यह स्वास्थ्य परामर्श जारी किया गया। इसमें उन्होंने स्थानीय नागरिकों को सलाह दी है कि यदि उन्हें तेज बुखार या उससे संबंधित कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो वे बिना किसी देरी के तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर डॉक्टरों से संपर्क करें।
डेंगू के लक्षण और पहचान
आधिकारिक परामर्श के अनुसार, डेंगू आमतौर पर एक तीव्र बुखार वाली बीमारी के रूप में सामने आता है, जो दो से सात दिनों तक बनी रह सकती है। अधिकारियों ने बताया कि इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में गंभीर सिरदर्द, शरीर और जोड़ों में तेज दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ना और आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना शामिल है। इस तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत सचेत हो जाना आवश्यक है।
बचाव और रोकथाम के उपाय
मच्छरों के पनपने पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निवासियों को अपने घरों के आसपास सफाई रखने के निर्देश दिए हैं। परामर्श में कहा गया है कि लोग अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने दें क्योंकि ठहरे हुए पानी में ही डेंगू के मच्छर पनपते हैं। इसके साथ ही घरों में मौजूद पानी के कूलर और टैंकों की नियमित रूप से सफाई की जानी चाहिए और पानी के बर्तनों को हमेशा ढककर रखना चाहिए।
व्यक्तिगत सुरक्षा के तौर पर लोगों को मच्छर भगाने वाली क्रीम या लिक्विड और मच्छरदानी का उपयोग करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, घरों की खिड़कियों पर जाली लगवाने और पूरे शरीर को ढकने वाले पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने की भी हिदायत दी गई है ताकि मच्छरों के काटने के खतरे को कम किया जा सके।
बिना डॉक्टरी सलाह के दवा लेने पर रोक
इस परामर्श में सबसे महत्वपूर्ण चेतावनी खुद से दवा लेने को लेकर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट रूप से सचेत किया है कि डेंगू का संदेह होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना खुद से कोई भी दवा न लें। विशेष रूप से एस्पिरिन, इबुप्रोफेन या स्टेरॉयड जैसी दवाओं का सेवन बिना चिकित्सकीय परामर्श के बिल्कुल न करने की सख्त हिदायत दी गई है, क्योंकि ये दवाएं मरीज की स्थिति को और अधिक गंभीर बना सकती हैं। बुखार होने पर केवल योग्य डॉक्टरों से ही सही जांच और इलाज कराने पर जोर दिया गया है।



















