अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) को लेकर जारी स्थानीय विरोध के बीच राज्य के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने मंगलवार को बोलेंग और यिंगकियोंग का दौरा किया। इस दौरे के दौरान उन्होंने साफ किया कि सरकार परियोजना के तकनीकी आकलन की दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन किसी भी नतीजे पर पहुंचने के लिए स्थानीय लोगों के साथ निरंतर बातचीत बेहद आवश्यक है।
यिंगकियोंग में एम्पावर्ड हाई-लेवल कमेटी की पहली बैठक
यिंगकियोंग पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने SUMP के लिए गठित सशक्त उच्च स्तरीय समिति (एम्पावर्ड हाई-लेवल कमेटी) की प्रारंभिक बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक में सियांग और अपर सियांग जिलों में प्रस्तावित प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (PFR) सर्वेक्षण की तैयारियों की बारीकी से समीक्षा की गई। राज्य कैबिनेट द्वारा गठित इस विशेष समिति की अगुवाई मंत्री ओजिंग तासिंग कर रहे हैं। इस समिति को दोनों जिलों में PFR सर्वे के काम का समन्वय और निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे सरकार परियोजना की व्यावहारिकता और उसके संभावित प्रभावों को समझने की पहली बुनियादी कसरत बता रही है।
सर्वे का मतलब अंतिम मंजूरी नहीं: मुख्यमंत्री
बैठक में स्थिति स्पष्ट करते हुए पेमा खांडू ने कहा कि PFR सर्वेक्षण कराने का कतई यह अर्थ नहीं है कि परियोजना को अंतिम मंजूरी मिल गई है या इसके आधार पर प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना का निर्माण खुद-ब-खुद तय हो गया है। उन्होंने अधिकारियों और समिति के सदस्यों से कहा कि यह पूरा तकनीकी मूल्यांकन पारदर्शी, निष्पक्ष और व्यापक होना चाहिए। इसमें स्थानीय समुदायों की चिंताओं के साथ-साथ क्षेत्र की भौगोलिक और पर्यावरणीय वास्तविकताओं का पूरा ध्यान रखा जाना अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री ने X पर लिखा कि उन्होंने यिंगकियोंग में सशक्त उच्च स्तरीय समिति की पहली बैठक की अध्यक्षता की है, जो सियांग और अपर सियांग में PFR सर्वे की निगरानी करेगी। संवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा,
“बातचीत बेहद मायने रखती है।”उन्होंने आगे कहा कि सियांग क्षेत्र के भविष्य को लेकर लिए जाने वाले किसी भी फैसले में निरंतर संवाद की जरूरत है। आज सरकार को पूरी जिम्मेदारी के साथ कदम उठाने होंगे, क्योंकि वर्तमान में लिए गए निर्णयों का सीधा असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।
18 साल से लंबित है 11,000 मेगावाट की परियोजना
प्रस्तावित SUMP एक विशाल जलविद्युत और जल प्रबंधन योजना है, जिसकी अनुमानित स्थापित क्षमता लगभग 11,000 मेगावाट आंकी गई है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना को वर्ष 2008 में ही राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दे दिया था। इसके बावजूद विभिन्न कारणों और स्थानीय विरोध की वजह से यह योजना पिछले करीब 18 वर्षों से अटकी हुई है।
राज्य सरकार के मुताबिक इस महत्वाकांक्षी परियोजना में ऊर्जा और जल सुरक्षा को मजबूती देने, सियांग-ब्रह्मपुत्र बेसिन में बाढ़ नियंत्रण करने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास को गति देने की अपार क्षमता है। हालांकि, निर्माण कार्य से पहले सरकार जमीनी हकीकत और जनता के भरोसे को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रही है।



















