जयपुर के शहरी इलाकों में सड़क, परिवहन, साफ-सफाई, जल निकासी और अन्य जरूरी नागरिक सुविधाओं को नए सिरे से संवारने की पुख्ता तैयारी शुरू हो गई है। विश्व बैंक ने इसके लिए ‘सस्टेनेबल अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन इन राजस्थान एक्सीलरेटेड’ यानी सूत्रा परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया है। इस पूरी योजना की अनुमानित लागत 38 करोड़ 57 लाख अमेरिकी डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 3,500 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य उद्देश्य शहरों के बुनियादी ढांचे को अधिक मजबूत बनाना, आम नागरिकों को उच्च स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराना और पर्यटन सेक्टर को नई रफ्तार देना है।
किन शहरों और इलाकों को मिलेगा फायदा
इस प्रस्तावित योजना के दायरे में कुल 32 शहरी स्थानीय निकायों को शामिल किया गया है। इनमें जयपुर, जोधपुर, कोटा और भरतपुर के चार बड़े और प्रमुख शहरी क्लस्टर के साथ-साथ उनसे जुड़े हुए 28 सैटेलाइट टाउन भी शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों की संयुक्त आबादी वर्ष 2026 तक 78 लाख से अधिक होने का अनुमान जताया गया है। विश्व बैंक की वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग से तैयार इस परियोजना का मुख्य जोर शहरों में आधारभूत सुविधाओं का दायरा बढ़ाने तथा तेजी से बढ़ती आबादी की आधुनिक जरूरतों के मुताबिक सुनियोजित शहरी विकास को गति देने पर रहेगा।
सड़क, परिवहन और जल निकासी पर विशेष फोकस
सूत्रा परियोजना के अंतर्गत शहरों के भीतर यातायात व्यवस्था, परिवहन के साधनों और आपसी कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। इसका प्राथमिक लक्ष्य आम जनता के लिए आवागमन को सुगम बनाना और शहरी परिवहन नेटवर्क को अधिक आधुनिक रूप देना है। इसके साथ ही ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं को भी अत्याधुनिक स्तर पर मजबूत करने की पूरी योजना है। गर्मियों के मौसम में उत्पन्न होने वाले गंभीर जल संकट और मानसून के दौरान जलभराव जैसी पुरानी समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे, जिससे शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक मजबूती मिल सके।
ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन स्थलों का होगा कायापलट
राजस्थान के तमाम प्रमुख शहर अपनी ऐतिहासिक इमारतों, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के लिए पूरी दुनिया में पहचाने जाते हैं। इस परियोजना के प्रस्ताव में इन प्राचीन धरोहरों के संरक्षण और पुराने विरासत क्षेत्रों के पुनरुद्धार को भी विशेष महत्व दिया गया है। इसका उद्देश्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के स्वरूप को और अधिक आकर्षक बनाना, प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन शहरों की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक मजबूत करना है।
नगर निकायों की आर्थिक और प्रशासनिक स्थिति में सुधार
यह परियोजना केवल भौतिक निर्माण और बुनियादी सुविधाओं के विकास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए नगर निकायों की वित्तीय और प्रशासनिक कार्यक्षमता को भी सुदृढ़ करने का बड़ा प्रावधान है। इसके तहत नगर निकायों की आंतरिक आय बढ़ाने, राजस्व संग्रहण व्यवस्था में सुधार लाने और कर्ज के बेहतर प्रबंधन से जुड़े तमाम उपाय प्रस्तावित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, भविष्य में शहरों के विकास कार्यों के लिए निजी क्षेत्र और बड़े वाणिज्यिक संस्थानों से पूंजी जुटाने की क्षमता को भी विकसित किया जाएगा, ताकि शहरी विकास योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों की कोई कमी न रहे।
विश्व बैंक देगा 27 करोड़ डॉलर का भारी-भरकम ऋण
इस पूरी परियोजना की कुल अनुमानित लागत 38 करोड़ 57 लाख अमेरिकी डॉलर तय की गई है। इसमें अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक यानी IBRD की तरफ से 27 करोड़ डॉलर का ऋण दिया जाएगा, जबकि शेष 11 करोड़ 57 लाख डॉलर का वित्तपोषण राजस्थान सरकार द्वारा किया जाएगा। इस परियोजना की मुख्य कार्यान्वयन एजेंसी राजस्थान अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को बनाया गया है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, इस परियोजना के तकनीकी डिजाइन की समीक्षा 10 दिसंबर 2026 को और विश्व बैंक के बोर्ड से इसकी औपचारिक मंजूरी 2 जुलाई 2027 तक मिलने की पूरी संभावना जताई गई है। फिलहाल यह एक प्रस्तावित मसौदा है और इसके तहत धरातल पर होने वाले तमाम कार्यों की रूपरेखा अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
























