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चीन को आर्थिक महाशक्ति बनाने वाले पूर्व प्रीमियर झू रोंगजी का 98 वर्ष की उम्र में निधनएशिया
12 अग॰ 2026, 11:16 pm (59 दिन पहले)· 0

चीन को आर्थिक महाशक्ति बनाने वाले पूर्व प्रीमियर झू रोंगजी का 98 वर्ष की उम्र में निधन

चीन के पूर्व प्रधानमंत्री झू रोंगजी का बीजिंग में 98 साल की उम्र में निधन हो गया। 1998 से 2003 तक प्रीमियर रहे झू रोंगजी ने ही चीन को WTO में शामिल कराया था और कड़े सुधारों से देश को निर्यात का केंद्र बनाया था।

चीन की अर्थव्यवस्था का चेहरा बदलने और देश को वैश्विक व्यापार मंच पर स्थापित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री झू रोंगजी का निधन हो गया है। 98 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। अपने कड़े प्रशासनिक फैसलों, सरकारी मशीनरी में बड़े सुधारों और विश्व व्यापार संगठन (WTO) में चीन का प्रवेश सुनिश्चित कराने के लिए जाने जाने वाले झू रोंगजी ने चीन को दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे बड़ा निर्यातक देश बनाने का मजबूत आधार तैयार किया था।

बीजिंग में 98 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूर्व प्रीमियर झू रोंगजी का निधन बुधवार सुबह लगभग 11 बजे देश की राजधानी बीजिंग में हुआ। वह पिछले कुछ समय से बीमारी से जूझ रहे थे और 98 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्होंने 1998 से 2003 तक चीन के प्रीमियर (प्रधानमंत्री) के रूप में देश के सर्वोच्च आर्थिक पद का कार्यभार संभाला था। उनका कार्यकाल चीन के इतिहास में सबसे निर्णायक और बदलावकारी आर्थिक दौरों में गिना जाता है।

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कड़े सुधारों से चीन को बनाया दुनिया का बड़ा निर्यातक

झू रोंगजी ने 1979 में डेंग शियाओपिंग द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों को एक नए मुकाम पर पहुंचाया। 1990 के दशक के दौरान उन्होंने सरकारी स्वामित्व वाले उद्योगों में अत्यधिक कड़े और मुश्किल संरचनात्मक बदलाव लागू किए। इसके साथ ही, चीन को विश्व व्यापार संगठन (WTO) का सदस्य बनाने में उनकी रणनीतिक भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। इन ऐतिहासिक कदमों ने चीनी अर्थव्यवस्था में अभूतपूर्व तेजी ला दी। इन दूरदर्शी सुधारों का नतीजा था कि 2000 से 2010 के दशक के बीच चीन की सालाना आर्थिक विकास दर लगातार 8 प्रतिशत से ऊपर बनी रही। इतना ही नहीं, वर्ष 2007 में चीन की विकास दर 14.2 प्रतिशत के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थी, जिसने चीन को वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बना दिया।

राजनीतिक निर्वासन से शीर्ष पद तक का संघर्षपूर्ण सफर

झू रोंगजी का राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। एक समय ऐसा भी आया जब अन्य कम्युनिस्ट देशों में जारी आर्थिक सुधारों की सार्वजनिक तारीफ करने की वजह से उन्हें पार्टी के भीतर विरोध का सामना करना पड़ा। सजा के तौर पर उन्हें ग्रामीण इलाकों में निर्वासित कर दिया गया था, जहां उन्हें कठिन शारीरिक श्रम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि, अपनी काबिलियत के बल पर उन्होंने वापसी की और 1998 में 69 साल की उम्र में चीन के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।

सख्त रुख, ईमानदारी और 'बॉस' की पहचान

प्रधानमंत्री बनने के बाद झू रोंगजी ने सरकारी भ्रष्टाचार, अक्षमता और लालफीताशाही के खिलाफ बेहद आक्रामक अभियान चलाया। वे अपनी सरकार की कमियों और नाकामियों की जिम्मेदारी खुद सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने में कभी नहीं झिझकते थे। इसी निर्भीक और सख्त प्रशासनिक शैली के कारण प्रशासनिक हलकों में उन्हें 'बॉस' और जनता के बीच 'झू फेंगजी' यानी पागल झू जैसे नाम मिले। उन्होंने आम लोगों के बीच अपनी एक ईमानदार और असरदार नेता की छवि बनाई।

वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के बीच झू रोंगजी का योगदान

झू रोंगजी का निधन ऐसे समय में हुआ है जब चीन की अर्थव्यवस्था विभिन्न चुनौतियों से गुजर रही है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, मजबूत निर्यात के बावजूद चीन की आर्थिक विकास दर पिछले 3 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे समय में जब देश की विकास की रफ्तार धीमी पड़ी है, झू रोंगजी द्वारा 1990 और 2000 के दशकों में बनाए गए मजबूत आर्थिक ढांचे को याद किया जा रहा है, जिसने चीन को एक वैश्विक आर्थिक शक्ति का दर्जा दिलाया था।

सवाल-जवाब

झू रोंगजी का निधन कब और कहां हुआ?
झू रोंगजी का निधन बुधवार सुबह लगभग 11 बजे बीजिंग में बीमारी के कारण 98 वर्ष की उम्र में हुआ।
चीन के प्रधानमंत्री के रूप में झू रोंगजी का कार्यकाल कब से कब तक था?
उन्होंने 1998 से 2003 तक चीन के प्रधानमंत्री (प्रीमियर) के रूप में कार्य किया।
चीन की अर्थव्यवस्था में झू रोंगजी का क्या मुख्य योगदान माना जाता है?
उन्होंने 1990 के दशक में सरकारी उद्योगों में बड़े बदलाव किए और चीन को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शामिल कराया, जिससे चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक बना।
झू रोंगजी को 'झू फेंगजी' या 'बॉस' क्यों कहा जाता था?
भ्रष्टाचार पर उनकी सख्त कार्रवाई, सरकारी गड़बड़ियों की तीखी आलोचना और नाकामियों की जिम्मेदारी खुद लेने के अनोखे अंदाज के कारण उन्हें यह नाम दिए गए थे।
2000 से 2010 के बीच चीन की आर्थिक विकास दर क्या थी?
उनके द्वारा शुरू किए गए सुधारों की बदौलत 2000 से 2010 के दौरान चीन की जीडीपी वृद्धि दर सालाना 8 प्रतिशत से ऊपर रही, जो 2007 में 14.2 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंची थी।
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