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हिमालयी नदियों के उफान से नेपाल में भारी तबाही, 7,570 मकान क्षतिग्रस्त और 30 अरब रुपये का सड़क तंत्र बर्बादएशिया
2 सित॰ 2026, 4:34 pm (40 मिनट पहले)· 2

हिमालयी नदियों के उफान से नेपाल में भारी तबाही, 7,570 मकान क्षतिग्रस्त और 30 अरब रुपये का सड़क तंत्र बर्बाद

भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जिलों में भारी नुकसान हुआ है। शुरुआती आकलन के अनुसार 7,570 निजी मकानों और 45 सरकारी भवनों के साथ-साथ सड़क और पेयजल बुनियादी ढांचे को अरबों रुपये की क्षति पहुंची है।

नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भयावह बाढ़ के बाद मध्य नेपाल के पर्वतीय इलाकों में तबाही की अत्यंत दुखद तस्वीर सामने आई है। शुरुआती सरकारी आकलनों के अनुसार, बाढ़ के प्रचंड वेग ने पांच प्रमुख जिलों रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन में भारी जन-जीवन और आधारभूत अवसंरचना को तहस-नहस कर दिया है। शहरी विकास तथा भवन निर्माण विभाग द्वारा जुटाए गए प्रारंभिक विवरणों से संकेत मिलता है कि इन पांचों जिलों में कुल मिलाकर 7,570 से अधिक निजी मकान बाढ़ की विनाशकारी चपेट में आए हैं। इसके अतिरिक्त, दर्जनों सरकारी इमारतें, राष्ट्रीय राजमार्ग, पक्के पुल, झोलुंगे पुल तथा पेयजल नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और प्रभावित ग्रामीण आबादी को अरबों रुपये की चपत लगी है।

निजी आवासीय संपत्तियों और सरकारी भवनों का व्यापक विनाश

शहरी विकास तथा भवन निर्माण विभाग द्वारा गठित तकनीकी टीमों ने बाढ़ प्रभावित दुर्गम इलाकों का दौरा करके बुनियादी नुकसान का प्राथमिक मूल्यांकन किया है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, 1,253 निजी घरों का अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो चुका है और उनका नामोनिशान तक मिट गया है। इसके अलावा 6,317 मकान बेहद गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इन मकानों की संरचनात्मक नींव और दीवारें इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि उन्हें केवल सामान्य मरम्मत के जरिए रहने योग्य बनाना संभव नहीं है। विशेषज्ञ अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए इन सभी मकानों का नए सिरे से पूर्ण पुनर्निर्माण करना पड़ेगा।

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वित्तीय नुकसान के आंकड़ों पर नजर डालें तो विभाग ने अनुमान व्यक्त किया है कि केवल निजी मकानों की तबाही से ही प्रभावित पांचों जिलों में लगभग 17 अरब 31 करोड़ नेपाली रुपये की प्रत्यक्ष संपत्ति नष्ट हुई है। आवासीय भवनों के अलावा, सरकारी प्रशासनिक ढांचे को भी गहरा झटका लगा है। विभिन्न सरकारी निकायों, मंत्रालयों और स्थानीय प्रशासन के 45 भवन बाढ़ के पानी तथा भूस्खलन की वजह से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इन सरकारी भवनों को पहुंचे नुकसान का प्रारंभिक आकलन लगभग साढ़े चार अरब नेपाली रुपये आंका गया है। शहरी विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक शुरुआती अनुमान है और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में विस्तृत जमीनी आकलन का कार्य अभी भी लगातार जारी है, जिससे अंतिम आंकड़े में वृद्धि हो सकती है।

नुवाकोट और रसुवा जिलों में तबाही का सबसे भयावह प्रकोप

प्राप्त विभागीय आंकड़ों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि नुवाकोट जिला इस प्राकृतिक आपदा का सबसे बड़ा शिकार बना है। नुवाकोट जिले में कुल 3,977 निजी मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे इस अकेले जिले में 9 अरब 22 करोड़ 62 लाख नेपाली रुपये का कुल आर्थिक नुकसान दर्ज किया गया है। नुवाकोट के स्थानीय निकायों में हुई तबाही का विवरण भी बेहद चिंताजनक है। विदुर नगरपालिका में सबसे ज्यादा 3,026 मकानों को भारी क्षति पहुंची है, जहां कुल नुकसान 7 अरब 17 करोड़ 58 लाख रुपये आंका गया है। इसी तरह, किस्पाङ क्षेत्र में उफनती नदी का पानी बस्तियों में घुसने से 696 मकान पूरी तरह पानी में बह गए, जिससे 1 अरब 30 करोड़ 24 लाख रुपये का नुकसान हुआ। बेलकोटगढ़ी नगरपालिका क्षेत्र में 212 मकान तबाह हुए, जिससे 60 करोड़ रुपये की क्षति का अनुमान लगाया गया है, जबकि तार्केश्वर नगरपालिका में 43 मकान ध्वस्त होने से 14 करोड़ 79 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

नुवाकोट के साथ लगती रसुवा जिला सीमा में भी बाढ़ का भयंकर तांडव देखने को मिला है। रसुवा जिले के भीतर कुल 1,779 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और यहां करीब 5 अरब 7 करोड़ 98 लाख नेपाली रुपये का भारी आर्थिक नुकसान दर्ज किया गया है। रसुवा जिले के प्रसिद्ध गोसाईंकुंड इलाके में 1,043 मकानों को क्षति पहुंची है, जिससे अकेले इस क्षेत्र को 2 अरब 49 करोड़ 86 लाख रुपये का घाटा हुआ है। रसुवा के ही उत्तरगया क्षेत्र में बाढ़ का प्रकोप इतना तीव्र था कि 567 घरों का नामोनिशान पूरी तरह मिट गया, जिससे 2 अरब 30 करोड़ 23 लाख रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। इसके अतिरिक्त, कालिका में 112 मकान बर्बाद हुए जिससे 18 करोड़ 48 लाख रुपये की क्षति हुई और आमाछोदिङ्मो में 57 मकान नष्ट होने से 9 करोड़ 40 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

धादिंग, गोरखा और चितवन जिलों में हुआ नुकसान

नेपाल के धादिंग जिले में भी भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के रोद्र रूप के कारण व्यापक नुकसान देखने को मिला है। धादिंग जिले के विभिन्न हिस्सों में कुल मिलाकर 1,451 निजी घर बाढ़ की चपेट में आकर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। धादिंग जिले में कुल वित्तीय क्षति का अनुमान 2 अरब 40 करोड़ 95 लाख नेपाली रुपये लगाया गया है। स्थानीय निकाय वार आंकड़ों के अनुसार, बेनीघाट रोराङ क्षेत्र में 1,037 मकान टूटने से 1 अरब 72 करोड़ 64 लाख रुपये का नुकसान हुआ, जो धादिंग में सबसे अधिक है। सिद्धलेक क्षेत्र में 228 मकानों को क्षति पहुंचने से 37 करोड़ 62 लाख रुपये का नुकसान दर्ज किया गया। वहीं, गजुरी में 107 मकानों के टूटने पर 17 करोड़ 65 लाख रुपये तथा गल्छी में 79 मकानों के क्षतिग्रस्त होने से 13 करोड़ 3 लाख रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है।

पड़ोसी गोरखा और चितवन जिलों में भी बाढ का असर स्पष्ट रूप से देखा गया है। गोरखा जिले में कुल 263 निजी मकान बाढ़ और पानी के बहाव के कारण क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे 43 करोड़ 39 लाख रुपये का नुकसान आंका गया है। गोरखा के गण्डकी क्षेत्र में 248 मकान और शहीद लखन क्षेत्र में 15 मकान इस तबाही का शिकार बने। दूसरी ओर, चितवन जिले के इच्छाकामना इलाके में 100 मकान बाढ़ के पानी की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे वहां लगभग 16 करोड़ 50 लाख नेपाली रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है।

राष्ट्रीय सड़क ढांचे और पुलों का विनाशकारी नुकसान

रिहाइशी इलाकों के साथ-साथ बाढ़ ने नेपाल के परिवहन और सड़क बुनियादी ढांचे की रीढ़ ही तोड़ दी है। सड़क विभाग द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, देश के राष्ट्रीय सड़क ढांचे को लगभग 30 अरब नेपाली रुपये का विनाशकारी नुकसान पहुंचा है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और आंतरिक आवागमन के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण 82 किलोमीटर लंबे गल्छी-स्याफ्रुबेंसी-रसुवागढ़ी मार्ग का लगभग 40 किलोमीटर लंबा हिस्सा पूरी तरह से जमींदोज और तबाहा हो चुका है। विभाग का कहना है कि इस 40 किलोमीटर लंबे मार्ग को दोबारा नए सिरे से तैयार करना पड़ेगा। इसके अलावा, देश की राजधानी को जोड़ने वाले प्रमुख पृथ्वी राजमार्ग के कृष्णभीर खंड को भी बाढ़ और भूस्खलन के कारण गंभीर नुकसान पहुंचा है।

पुलों के विनाश के आंकड़े भी बेहद डरावने हैं। नदियों के बेकाबू बहाव में 31 बड़े पक्के पुल पूरी तरह से बहकर नष्ट हो चुके हैं, जबकि 3 अन्य पुलों को संरचनात्मक रूप से भारी क्षति पहुंची है। सड़क विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तबाह हुई सड़कों, राजमार्गों और पक्के पुलों के पूर्ण पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्य में कम से कम 50 अरब नेपाली रुपये खर्च होने का अनुमान है। केवल बड़े पुल ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में आवाजाही के एकमात्र साधन माने जाने वाले झोलुंगे पुल (सस्पेंशन ब्रिज) भी भीषण बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं। रसुवा और नुवाकोट जिलों में कुल 53 झोलुंगे पुल बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 33 पुल नदियों के तेज पानी में बह गए हैं, जबकि 20 पुलों की स्थिति ऐसी है कि उनकी मरम्मत करके उन्हें पुनः चालू किया जा सकता है।

स्थानीय बुनियादी ढांचा और आपातकालीन रोपवे व्यवस्था

स्थानीय पूर्वाधार विकास विभाग द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, स्थानीय स्तर के बुनियादी ढांचे को कुल मिलाकर लगभग 1 अरब 25 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। बाढ़ और पुलों के बह जाने के कारण दर्जनों गांव पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं। ऐसे में संपर्क व्यवस्था को तुरंत बहाल करने के लिए नेपाल सरकार आपातकालीन उपाय के रूप में कुछ दुर्गम स्थानों पर रोपवे (केबलवे) लगाने की तैयारी कर रही है। विभाग के अनुसार, रसुवा जिले में तीन स्थानों पर और नुवाकोट जिले में दो स्थानों पर ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था विकसित की जा रही है। नुवाकोट के विदुर, बेलकोटगढ़ी और इन्द्रचौर में रोपवे स्थापित करने का काम पूरा किया जा चुका है, जबकि रसुवा में इसका काम तेजी से प्रक्रियाधीन है।

विभाग ने स्थानीय अवसंरचना के जीर्णोद्धार के लिए बजट का अनुमानित ब्योरा भी पेश किया है। ग्रामीण इलाकों की क्षतिग्रस्त सड़कों की त्वरित मरम्मत पर लगभग 40 करोड़ रुपये खर्च होंगे, क्षतिग्रस्त झोलुंगे पुलों की मरम्मत पर 15 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जबकि नए रोपवे के निर्माण और पुनर्निर्माण पर करीब 60 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना जताई गई है।

पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता प्रणालियों पर गहरा संकट

विनाशकारी बाढ़ के कारण रसुवा, नुवाकोट, गोरखा और धादिंग जिलों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। पेयजल तथा ढल व्यवस्थापन विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, रसुवा में 10 प्रमुख पेयजल रिजर्वायर टैंक क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नुवाकोट जिले में जल संकट सबसे गहरा है, जहां 111 रिजर्वायर टैंक पूरी तरह तबाह हो गए हैं। इसके अलावा धादिंग में 7 और गोरखा में 24 पेयजल रिजर्वायर टैंकों को भारी नुकसान पहुंचा है। इन जलाशयों और मुख्य पाइपलाइनों को मिलाकर पेयजल संरचनाओं को कुल 64 करोड़ रुपये की क्षति पहुंची है। वहीं, सीवेज, नालियों और स्वच्छता संबंधी सार्वजनिक अवसंरचना को भी करीब 29 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

राहत अभियान, जल वितरण और पुनर्निर्माण की समयसीमा

इस गंभीर जल संकट के बावजूद नुवाकोट जिले में आपातकालीन पंपिंग प्रणालियों के जरिए प्रतिदिन लगभग 10 लाख लीटर पानी पंप करके नागरिकों को उपलब्ध कराया जा रहा है। देश की राजधानी काठमांडू में बनाए गए अस्थायी राहत शिविरों में विस्थापित लोगों के लिए चार टैंकरों के माध्यम से पेयजल पहुंचाया जा रहा है। पीने के पानी की स्वच्छता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 'वॉटर एम्बुलेंस' को विशेष रूप से तैनात किया गया है, जो पानी के नमूनों की जांच और वितरण में लगी हुई है।

सरकारी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि रसुवा जिले में सामान्य पेयजल आपूर्ति बहाल करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि अगले डेढ़ से दो महीने के भीतर अस्थायी संरचनाओं का निर्माण करके प्राथमिक पानी आपूर्ति शुरू करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। हालांकि, पूरी पेयजल प्रणाली को स्थाई रूप से मजबूत बनाने और सभी क्षतिग्रस्त अवसंरचनाओं के पुनर्निर्माण में लगभग दो वर्ष का लंबा समय लग सकता है। इस कठिन समय में राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के लिए भारतीय सेना भी मैदान में उतर चुकी है। भारतीय सैन्य दल नेपाली सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हाई रिस्क आपदा क्षेत्रों में मलबे में फंसे लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने का कार्य मुस्तैदी से कर रहा है।

सवाल-जवाब

नेपाल के बाढ़ प्रभावित जिलों में निजी मकानों को कितना नुकसान पहुंचा है?
बाढ़ से पांच जिलों में कुल 7,570 निजी घर प्रभावित हुए हैं, जिनमें 1,253 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और 6,317 बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। निजी मकानों को लगभग 17 अरब 31 करोड़ नेपाली रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
बाढ़ से नेपाल के राष्ट्रीय सड़क बुनियादी ढांचे को कितना नुकसान हुआ है और पुनर्निर्माण की लागत क्या है?
राष्ट्रीय सड़क ढांचे को लगभग 30 अरब रुपये की क्षति पहुंची है। 31 पुल पूरी तरह बह गए हैं और 82 किलोमीटर लंबे गल्छी-स्याफ्रुबेंसी-रसुवागढ़ी मार्ग का 40 किलोमीटर हिस्सा तबाह हो चुका है, जिसके पुनर्निर्माण में करीब 50 अरब रुपये खर्च होने का अनुमान है।
किन जिलों में सबसे अधिक मकान और संपत्तियां क्षतिग्रस्त हुई हैं?
नुवाकोट जिले में सबसे अधिक तबाही हुई है जहां 3,977 घर क्षतिग्रस्त हुए और 9 अरब 22 करोड़ 62 लाख रुपये का नुकसान हुआ। इसके बाद रसुवा में 1,779 घर क्षतिग्रस्त हुए जिससे 5 अरब 7 करोड़ 98 लाख रुपये की क्षति हुई।
प्रभावित इलाकों में पीने के पानी की समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
नुवाकोट में पंपिंग के जरिए रोजाना 10 लाख लीटर पानी दिया जा रहा है और काठमांडू के राहत शिविरों में 4 टैंकर भेजे जा रहे हैं। पानी की जांच के लिए वॉटर एम्बुलेंस भी तैनात की गई है, जबकि रसुवा में अस्थायी पेयजल व्यवस्था बहाल करने में डेढ़ से दो महीने का समय लगेगा।
राहत और कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए क्या वैकल्पिक उपाय अपनाए जा रहे हैं?
सड़क और पुल बह जाने के बाद आपातकालीन आवागमन के लिए रोपवे लगाए जा रहे हैं। नुवाकोट के विदुर, बेलकोटगढ़ी और इन्द्रचौर में रोपवे स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि रसुवा में 3 स्थानों पर रोपवे लगाने की प्रक्रिया चल रही है।
नेपाल के राहत अभियानों में बचाव दल किस प्रकार कार्य कर रहे हैं?
भारतीय सेना नेपाली सेना के साथ मिलकर हाई रिस्क वाले इलाकों में राहत और बचाव कार्य चला रही है और मलबे में फंसे लोगों को निकालने का काम कर रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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