असम के धुबरी जिले में एक चार साल की बच्ची के साथ हुए बलात्कार और उसकी हत्या के बेहद संवेदनशील मामले में न्याय प्रणाली ने कड़ा फैसला सुनाया है। बिलासीपारा के अतिरिक्त एवं जिला सत्र न्यायालय की विशेष पोक्सो अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी उत्पल रॉय को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने इस जघन्य अपराध को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' श्रेणी का मानते हुए दोषी को फांसी की सजा का आदेश दिया।
अदालत का फैसला और न्यायाधीश की टिप्पणी
विशेष पोक्सो न्यायाधीश राणा दत्ता ने सोमवार को मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अपना ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। अदालत ने माना कि जिस तरह से चार साल की अबोध बच्ची का यौन उत्पीड़न किया गया और फिर उसकी निर्मम हत्या कर दी गई, वह समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला अपराध था। न्यायाधीश ने सजा का ऐलान करते हुए कहा कि पीड़ित बच्ची के शोकाकुल परिवार को पूर्ण न्याय दिलाने के लिए कानून के तहत निर्धारित अधिकतम दंड देना अत्यंत आवश्यक था।
घटना का विवरण और पुलिस जांच
यह दुखद घटना धुबरी जिले के चापर पुलिस स्टेशन की सीमा में स्थित कृष्णकाली टी एस्टेट इलाके में हुई थी। अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, यह मामला साल 2023 का है जब दोषी उत्पल रॉय ने चाय बागान क्षेत्र में मासूम को अपना शिकार बनाया था। बच्ची के साथ दरिंदगी करने के बाद दोषी ने उसकी जान ले ली थी। घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आपराधिक मामला दर्ज किया और आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।
विभिन्न धाराओं में अतिरिक्त सजा और जुर्माना
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने जोरदार पैरवी करते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता और प्रकृति को देखते हुए केवल सख्त सजा ही उपयुक्त हो सकती है। अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों से सहमति जताते हुए दोषी उत्पल रॉय को फांसी की सजा के अलावा भारतीय दंड संहिता (IPC) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की कई अन्य वैधानिक धाराओं के अंतर्गत अतिरिक्त सजा और जुर्माना भी सुनाया। लगभग तीन साल तक चली गहन न्यायिक सुनवाई के बाद आए इस फैसले से केस का कानूनी समापन हो गया है।

















