वैश्विक कमोडिटी बाजारों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, क्योंकि हाई-टेक क्षेत्र में छाई अनिश्चितता का असर अब औद्योगिक धातुओं पर भी पड़ने लगा है। दुनिया भर में तांबे (कॉपर) की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसका मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास की गति को लेकर पैदा हुई चिंताएं हैं। वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय सावधानी का माहौल है, जहां निवेशक प्रमुख केंद्रीय बैंकों के आगामी नीतिगत फैसलों का इंतजार कर रहे हैं। डेटा सेंटरों के निर्माण में कमी आने की आशंका और प्रमुख एक्सचेंजों पर आपूर्ति की स्थिति सुधरने से तांबे की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है।
AI की रफ्तार धीमी होने की आशंका से गिरा तांबा
वित्तीय संस्थान आईएनजी के विश्लेषक वॉरेन पैटरसन और ईवा मैन्थी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि तांबे की कीमतों में हालिया गिरावट सीधे तौर पर तकनीकी क्षेत्र में बदले सेंटीमेंट से जुड़ी है। तकनीकी दुनिया के कई बड़े दिग्गजों ने सार्वजनिक रूप से सलाह दी है कि AI के विकास की गति को कुछ समय के लिए धीमा किया जाना चाहिए। इन बयानों के बाद टेक कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे डेटा सेंटरों में होने वाले निवेश को लेकर उम्मीदें कमजोर हो गई हैं। चूंकि आधुनिक डेटा सेंटरों में बिजली के सुचारू प्रवाह, अर्थिंग और केबलिंग के लिए भारी मात्रा में तांबे का इस्तेमाल होता है, इसलिए इनके निर्माण की रफ्तार सुस्त होने की आशंका सीधे तौर पर तांबे की भविष्य की मांग को प्रभावित कर रही है।
मांग में इस संभावित कमी के अलावा, तांबे की तात्कालिक भौतिक आपूर्ति में भी सुधार के संकेत मिले हैं। आईएनजी के विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक एक्सचेंजों पर तांबे के बढ़ते स्टॉक (इन्वेंट्री) और नजदीकी कॉन्ट्रैक्ट्स के बीच कम होते अंतर ने लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर आपूर्ति के संकट को काफी हद तक कम कर दिया है। इस बदलाव ने उन चिंताओं को शांत किया है जिन्होंने कुछ समय पहले तांबे की कीमतों को ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचा दिया था। वॉरेन पैटरसन और ईवा मैन्थी ने बाजार की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, "निकट अवधि में, तांबा दबाव में रह सकता है क्योंकि अत्यधिक सट्टा पोजीशनों में सुधार हो रहा है।" हालांकि, विश्लेषकों का यह भी मानना है कि खदानों से होने वाली कम आपूर्ति से जुड़ी दीर्घकालिक बाधाएं कीमतों को एक मजबूत आधार प्रदान करती रहेंगी, जिससे बाजार स्थिर होने पर कीमतों को सहारा मिलेगा।
यूएस यील्ड में बढ़त और चीनी डेटा से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पस्त
विदेशी मुद्रा बाजार में भी इस समय जोखिम से बचने की प्रवृत्ति साफ देखी जा सकती है, जिसके कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लगातार दबाव का सामना कर रहा है। मंगलवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान AUD/USD की जोड़ी कमजोर बनी रही और यह 0.7150 के स्तर से नीचे कारोबार कर रही थी। यह जोड़ी सोमवार को दर्ज किए गए अपने तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के बेहद करीब बनी हुई है। अमेरिकी डॉलर की इस मजबूती के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर टिके रहना है। निवेशक इस सप्ताह होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक से पहले अपनी पोजीशन मजबूत कर रहे हैं, जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण मुद्रास्फीति के जोखिम भी बने हुए हैं।
इस वृहद आर्थिक परिदृश्य ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी जोखिम-संवेदनशील मुद्राओं के लिए वापसी की राह मुश्किल कर दी है। इसके अलावा, चीन से आए अगस्त महीने के आर्थिक आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बढ़ाने का काम किया। चीन के आर्थिक संकेतकों में मिले-जुले रुझान देखने को मिले, जिससे बाजार को कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिल पाई। चूंकि ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था और उसकी मुद्रा काफी हद तक चीन की औद्योगिक मांग से जुड़ी है, इसलिए चीनी बाजारों से सकारात्मक संकेत न मिलने के कारण कमोडिटी से जुड़ी मुद्राओं को कोई ठोस सहारा नहीं मिल पा रहा है।
जापानी येन पर दबाव बरकरार, केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर टिकी नजरें
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में लगातार कमजोरी देखी जा रही है। मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान USD/JPY की जोड़ी 155.00 के स्तर की ओर बढ़ती हुई दिखाई दी। मुद्रा व्यापारी इस सप्ताह बेहद सतर्क रुख अपना रहे हैं क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की FOMC और बैंक ऑफ जापान (BoJ) की महत्वपूर्ण बैठकें होने वाली हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार बनी हुई तेजी और तेल की वजह से बढ़ती महंगाई के जोखिमों के बीच अमेरिकी डॉलर को मजबूत समर्थन मिल रहा है।
हालांकि, टोक्यो से आने वाले नीतिगत संकेतों के आधार पर USD/JPY की इस तेजी पर लगाम भी लग सकती है। वैश्विक बाजार इस बात पर करीबी नजर रख रहे हैं कि क्या बैंक ऑफ जापान अपनी मौद्रिक नीति को कड़ा करने के लिए कोई आक्रामक रुख अपनाएगा। यदि टोक्यो में नीति निर्माता उम्मीद से पहले ब्याज दरों को सामान्य करने का संकेत देते हैं, तो इससे येन की कीमतों में बड़ा सुधार हो सकता है। ऐसी स्थिति में जापानी मुद्रा को मजबूती मिलेगी, जिससे निकट भविष्य में USD/JPY की जोड़ी की ऊपरी बढ़त सीमित हो सकती है।
महत्वपूर्ण FOMC बैठक से पहले सोने की चमक पड़ी फीकी
सुरक्षित निवेश के रूप में पसंद की जाने वाली पीली धातु यानी सोना भी इस बैठक से पहले हो रहे बदलावों से अछूता नहीं रहा। लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को यूरोपीय सत्र के पहले भाग के दौरान सोना लगभग 0.80% गिरकर 4,265 डॉलर से 4,264 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार करता दिखा। इस गिरावट के बाद सोना सोमवार को छुए गए अपने एक महीने से अधिक के निचले स्तर के काफी करीब पहुंच गया है।
सोना बाजार के लिए इस समय सबसे बड़ा घटनाक्रम आज से शुरू होने वाली दो दिवसीय FOMC नीतिगत बैठक है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए इसकी कीमतें अमेरिकी मौद्रिक नीति और बॉन्ड यील्ड के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं। जब तक अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदों के कारण कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर बनी रहेगी, तब तक सोने को अपने पास बनाए रखने की लागत अधिक रहेगी, जिससे पीली धातु पर अल्पकालिक दबाव बना रहेगा।


















