असम के गुवाहाटी में 12 और 13 नवंबर को दो दिवसीय विशेष आयोजन गज उत्सव 2026 आयोजित होने जा रहा है। इस सम्मेलन का मुख्य केंद्र बिंदु एशियाई हाथियों का संरक्षण, मानव-हाथी सह-अस्तित्व और समाज में इन जीवों का सांस्कृतिक महत्व रहेगा। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरणविद्, सांस्कृतिक हस्तियां, जमीनी स्तर के ग्रामीण प्रतिनिधि और स्कूली बच्चे एक साझा मंच पर एकत्र होंगे, ताकि हाथियों की सुरक्षा से जुड़ी जमीनी चुनौतियों पर व्यावहारिक समाधान तलाशे जा सकें।
दो अलग-अलग स्थानों पर चलेगा दो दिवसीय कार्यक्रम
इस पूरे आयोजन की रूपरेखा दो चरणों में तैयार की गई है। कार्यक्रम का पहला दिन, यानी 12 नवंबर, उत्तरी गुवाहाटी स्थित फैकल्टी कॉम्प्लेक्स में सुबह 9:30 बजे से शुरू होगा। इसके बाद दूसरे दिन का पूरा सत्र 13 नवंबर को नगांव स्थित हाथी बंधु एक्टिविटी एरिया में आयोजित किया जाएगा, जिसकी शुरुआत सुबह 8:00 बजे से होगी। इस उत्सव की कमान वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के हाथी बंधु असम और इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज यानी इनटैक के असम चैप्टर ने मिलकर संभाली है।
उद्घाटन सत्र में शामिल होंगी प्रमुख हस्तियां
उद्घाटन समारोह में डॉ. शीला बोरा स्वागत भाषण प्रस्तुत करेंगी। इसके बाद इनटैक की निदेशक निरुपमा मोदवेल गज उत्सव की रूपरेखा सामने रखेंगी, जबकि वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के संरक्षण प्रमुख संदीप तिवारी इस विषय पर अपनी बात रखेंगे। हाथी बंधु असम के अध्यक्ष प्रदीप भुइयां और उपाध्यक्ष रून भुइयां अपनी संस्था के कार्यों और संरक्षण प्रयासों की जानकारी साझा करेंगे।
समारोह में पद्मश्री से सम्मानित पार्वती बरुआ के साथ एक विशेष पॉडकास्ट सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसके साथ स्कूली बच्चों के लिए रचनात्मक गतिविधियां भी होंगी। प्रख्यात लेखिका और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता अनुराधा शर्मा पुजारी बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहेंगी। वहीं असम के वन मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में अपना संबोधन देंगे। इस दौरान हाथियों को रेल हादसों से बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले लोको पायलटों को उनके सराहनीय प्रयासों के लिए सम्मानित भी किया जाएगा।
चार मुख्य विषयों पर केंद्रित होंगे पैनल परिचर्चाएं
सत्र के दौरान चार प्रमुख पैनल चर्चाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें मानव समाज और हाथियों के आपसी संबंधों का विश्लेषण होगा। पहला सत्र संस्कृति, लोक परंपराओं, स्मृति और पहचान में हाथियों की भूमिका पर रोशनी डालेगा। दूसरा सत्र प्राकृतिक गलियारों को साझा करने और इंसानों व हाथियों दोनों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने पर केंद्रित होगा। तीसरे सत्र में स्थानीय समुदायों की अगुवाई में सह-अस्तित्व के व्यावहारिक तरीकों पर विचार होगा, जबकि चौथा सत्र वन्यजीव कानूनों और सार्वजनिक जिम्मेदारियों पर विमर्श करेगा।
सत्र के अंत में आम दर्शकों की भागीदारी का एक विशेष दौर रखा गया है, ताकि आम नागरिक भी वन्यजीव संरक्षण पर अपने विचार रख सकें। पूरे सत्र का समापन वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के पूर्वोत्तर प्रमुख रथिन बर्मन के भाषण और धन्यवाद ज्ञापन के साथ होगा। 13 नवंबर को नगांव के हाथी बंधु एक्टिविटी एरिया में सुबह 8 बजे से आगे की गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा।





















