जोधपुर के ऐतिहासिक मेहरानगढ़ दुर्ग में स्थित मां चामुंडा माता मंदिर में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन से ही श्रद्धालुओं का बड़ा सैलाब उमड़ रहा है। मारवाड़ क्षेत्र के लोगों की कुलदेवी और आस्था का प्रमुख केंद्र होने के कारण अलसुबह से ही भक्त दर्शन के लिए कतारों में लगने लगे हैं। भारी भीड़ को सुचारू रूप से नियंत्रित करने और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचने के लिए मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट तथा स्थानीय पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और कतार प्रबंधन की संयुक्त योजना जमीन पर उतार दी है। नवरात्रि के सभी नौ दिनों के दौरान मंदिर के कपाट प्रतिदिन सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक आम दर्शनार्थियों के लिए खुले रहेंगे।
प्रवेश द्वार, दर्शन का समय और अलग कतार व्यवस्था
प्रशासनिक योजना के अनुसार हर दिन सुबह ठीक 7 बजे दुर्ग के मुख्य प्रवेश द्वार जयपोल और फतेहपोल श्रद्धालुओं के प्रवेश के लिए खोल दिए जाएंगे, जहां शाम 5 बजे तक निरंतर दर्शन प्रक्रिया चलेगी। जयपोल के बाहरी हिस्से से लेकर मंदिर प्रांगण तक श्रद्धालुओं को एक व्यवस्थित एकल पंक्ति में आगे बढ़ना होगा। किसी भी अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए निर्धारित सुरक्षा जांच चौकियों पर जांच पूरी होने के बाद ही भक्तों को आगे जाने की अनुमति दी जा रही है।
भीड़भाड़ को सुरक्षित ढंग से बांटने के उद्देश्य से महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए बिल्कुल अलग-अलग रास्ते तय किए गए हैं। महिलाओं, छोटे बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को पट्टे की तरफ से आने और जाने का सुरक्षित मार्ग दिया गया है। इसके विपरीत, पुरुषों और युवा श्रद्धालुओं की आवाजाही सलीम कोट से होते हुए बसंत सागर की दिशा से सुनिश्चित की गई है, जिससे दोनों कतारें एक-दूसरे से टकराए बिना आसानी से आगे बढ़ सकें।
पुलिस निगरानी और सीसीटीवी कंट्रोल रूम से सुरक्षा
नवरात्रि महोत्सव के दौरान व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी पुलिस कमिश्नर अंशुमन भोमिया के सीधे निर्देशन में की जा रही है। मौके पर सुरक्षा का जिम्मा डीसीपी मनीष चौधरी और उनकी टीम संभाल रही है, जबकि शहर और दुर्ग की ओर जाने वाली सड़कों पर यातायात सुचारू बनाए रखने की कमान डीसीपी ट्रैफिक शाहीन सी के पास है। इसके साथ ही एडीसीपी शालिनी राज को यातायात प्रबंधन की जमीनी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दुर्ग परिसर के जयपोल से लेकर चामुंडा माता मंदिर के पूरे रास्ते पर जगह-जगह आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों की सीधी फीड एक समर्पित कंट्रोल रूम में लगातार जांची जा रही है, ताकि किसी भी संदेहास्पद गतिविधि, भारी दबाव या आपात स्थिति की सूचना मिलते ही पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कर सके।
वेदपाठी ब्राह्मणों का दुर्गापाठ और हवन का शुभ मुहूर्त
धार्मिक अनुष्ठानों के क्रम में मंदिर के बसंत सागर क्षेत्र के पास 9 वेदपाठी ब्राह्मण 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक निरंतर दुर्गापाठ का वाचन करेंगे। धार्मिक परंपरा के अनुसार होमाष्टमी की रात को मुख्य हवन अनुष्ठान शुरू किया जाएगा। इसके उपरांत 20 अक्टूबर को नवमी तिथि पर सुबह 11:15 बजे से 11:50 बजे के बीच महाराजा गजसिंह और महारानी हेमलता राज्ये द्वारा हवन की पूर्णाहुति संपन्न कराई जाएगी।
हवन संपन्न होने के तुरंत बाद सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:01 बजे तक महाराजा गजसिंह की पारंपरिक तिलक आरती का विशेष मुहूर्त निर्धारित किया गया है। तत्पश्चात, नवमी के ही दिन दोपहर 12:05 बजे से 12:15 बजे के समय अंतराल में थापना जी के उत्थापना का धार्मिक कार्य विधि-विधान से पूरा किया जाएगा।
प्रसाद, नारियल और प्रतिबंधित वस्तुओं के कड़े निर्देश
श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रसाद चढ़ाने के नियमों में भी स्पष्ट बदलाव किए गए हैं। महिला श्रद्धालुओं के लिए पट्टे पर नारियल अर्पित करने का स्थान बनाया गया है, जबकि पुरुष श्रद्धालु बसंत सागर के निकट निर्धारित स्थल पर नारियल भेंट कर सकेंगे। मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट और प्रशासन ने भक्तों से विशेष अपील की है कि वे पानी वाले कच्चे नारियल लाने के बजाय सूखे गोटे वाला नारियल ही प्रसाद के रूप में लाएं। दर्शन पूरा करने के बाद मंदिर परिसर के अंदर किसी भी तरह की परिक्रमा करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि कतारों का प्रवाह न रुके।
स्वच्छता और सुरक्षा नियमों के तहत मंदिर परिसर में पॉलिथीन में किसी भी प्रकार की पूजन सामग्री या प्रसाद लाने पर पूर्ण रोक है। श्रद्धालुओं से स्पष्ट आग्रह किया गया है कि वे कैरी बैग, हैंगिंग बैग अथवा कपड़े के थैले अपने साथ दुर्ग के भीतर न लाएं। इसके अलावा, शराब पीकर आने वाले अथवा अपने साथ किसी भी रूप में शराब लाने वाले व्यक्तियों को प्रवेश द्वार से ही लौटा दिया जाएगा और उनके प्रवेश पर पूर्ण पाबंदी रहेगी। प्रशासन का एकमात्र उद्देश्य नवरात्रि के दौरान सभी भक्तों को शांत, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण में दर्शन उपलब्ध कराना है।



















