हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए 'अपना परिवार सुखी परिवार योजना' के अंतर्गत आवेदन आमंत्रित कर रही है। इस योजना के अंतिम चरण के तहत पात्र व्यक्ति 20 सितंबर तक अपना आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं। राज्य सरकार की इस कल्याणकारी पहल का मुख्य उद्देश्य निर्धन परिवारों पर से वित्तीय बोझ कम करना और उन्हें मुफ्त बिजली, नकद वित्तीय सहायता तथा आवास निर्माण के लिए धन उपलब्ध कराना है।
योजना के अंतर्गत मिलने वाले प्रमुख लाभ और वित्तीय मदद
इस योजना में शामिल किए गए परिवारों को सरकार कई प्रत्यक्ष वित्तीय और ढांचागत लाभ प्रदान करेगी। मुख्य प्रावधानों के तहत चयनित परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाएगी, जिससे उनके मासिक खर्च में बड़ी राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त, पात्र परिवारों की महिलाओं के लिए प्रतिमाह 1500 रुपये की वित्तीय सहायता राशि तय की गई है। जिन गरीब परिवारों के पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है, उन्हें अपना घर बनाने के लिए सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। सरकार ने इस पूरी योजना के माध्यम से लगभग 80 लाख से 2 लाख गरीब परिवारों को लाभ पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। आधिकारिक योजना के अनुसार, राज्य सरकार इसे 2 अक्तूबर 2026 को पूरी तरह लागू करेगी।
पात्रता के मानदंड और निर्धारित शर्तें
योजना के दायरे में समाज के विभिन्न वंचित वर्गों को प्राथमिकता के आधार पर जोड़ा गया है। ऐसे परिवार जिनमें 27 वर्ष से कम आयु के अनाथ बच्चे शामिल हैं, वे इस योजना का लाभ पा सकते हैं। 59 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों वाले परिवारों को भी पात्र माना गया है। इसके अलावा, महिला मुखिया वाले परिवारों को इसमें शामिल किया गया है, जिनमें विधवा, अविवाहित, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाएं शामिल हैं। हालांकि, शर्त यह रखी गई है कि ऐसे महिला मुखिया वाले परिवार में 27 से 59 वर्ष की आयु का कोई अन्य वयस्क सदस्य नहीं होना चाहिए। यदि किसी परिवार के मुख्य कमाऊ व्यक्ति या मुखिया की दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक है, तो वह परिवार भी आवेदन करने का हकदार होगा।
इन स्थितियों में नहीं मिलेगा योजना का लाभ
योजना का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुँचाने के लिए सरकार ने सख्त अयोग्यता शर्तें लागू की हैं। यदि किसी परिवार की कुल वार्षिक आय 75 हजार रुपये से अधिक पाई जाती है, तो उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसके साथ ही, जिन परिवारों के पास एक हेक्टेयर से अधिक भूमि है, वे भी अपात्र घोषित किए जाएंगे। यदि परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी, अर्धसरकारी संस्थान या किसी निजी सेवा में कार्यरत है, तो वह परिवार भी इस आर्थिक सहायता का हकदार नहीं होगा। केवल इन सभी मानकों पर खरा उतरने वाले परिवारों को ही अंतिम पात्र माना जाएगा।
मनरेगा मजदूरों के लिए नए नियम और आवेदन प्रक्रिया
आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाते हुए सरकार ने पंचायतों और स्थानीय प्रशासनिक कार्यालयों को फॉर्म स्वीकार करने की जिम्मेदारी दी है। पात्र आवेदक अपने फॉर्म संबंधित ग्राम पंचायत, खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कार्यालय अथवा उप-मंडल अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय में जमा करा सकते हैं। सोलन में खंड विकास अधिकारी मंजुला कंवर के अनुसार, आठवें चरण में मनरेगा के तहत कम से कम एक दिन काम करने वाले मजदूरों को भी शामिल किया गया था। विभाग द्वारा 1 अगस्त को जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत अब वित्तीय वर्ष 2024-25 के साथ-साथ वर्ष 2025-26 में मनरेगा के तहत कार्य करने वाले मजदूर भी इस योजना के लिए पूरी तरह पात्र होंगे।
अब तक का चयन और प्रशासनिक समीक्षा
खंड स्तर पर प्राप्त सभी आवेदनों की गहन छंटनी और प्रशासनिक समीक्षा की प्रक्रिया लगातार जारी है। पुनरीक्षण के बाद अंतिम चरण में 27 नए परिवारों का चयन किया गया है। सोलन खंड में अब तक आयोजित कुल आठ चरणों के दौरान 713 पात्र परिवारों को चिन्हित किया जा चुका है। प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी पात्र परिवारों से 20 सितंबर की निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने दस्तावेज और आवेदन पत्र जमा कराने की अपील की है ताकि समय पर उन्हें योजना के विभिन्न लाभ प्रदान किए जा सकें।



















