असमिया सिनेमा प्रेमियों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। बहुप्रतीक्षित फिल्म महाबाहु द ब्रह्मपुत्र अब आगामी ग्यारह सितंबर को बड़े पर्दे पर रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह पूरी कहानी ब्रह्मपुत्र नदी के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जिसमें इस विशाल जलधारा के किनारे जीवन गुजारने वाले आम लोगों के कड़े संघर्षों को बेहद करीब से दर्शाया गया है।
निर्माण और शुरुआती रुकावटें
इस प्रोजेक्ट को मनोरीजित एंटरटेनमेंट के बैनर तले लौहित्या आर्ट्स के सहयोग से तैयार किया गया है। फिल्म के लेखक, निर्देशक और मुख्य अभिनेता की भूमिका प्रंजल प्रातिम चेटिया ने खुद निभाई है। मूल रूप से इस फिल्म को उन्नीस जून को सिनेमाघरों में आना था, लेकिन असम में आई भीषण बाढ़ की गंभीर स्थिति और अन्य प्रशासनिक कारणों के चलते इसकी रिलीज टाल दी गई थी।
नाम के मायने और सात साल का सफर
फिल्म के निर्देशक प्रंजल प्रातिम चेटिया ने बताया कि शीर्षक महाबाहु इस नदी के विराट स्वरूप और कथा के मूल भाव को सटीक रूप से परिभाषित करता है। उन्होंने साझा किया कि इस नाम में एक असीम विशालता महसूस होती है जो सीधे दर्शकों को फिल्म के कथ्य से जोड़ देती है। ब्रह्मपुत्र पर आधारित फिल्म बनाने का साहसिक कदम उठाने से लेकर आज तक का यह सात साल का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। इस दौरान कोविड महामारी से लेकर भयंकर बाढ़ जैसी कई आपदाओं का सामना करना पड़ा और अंततः ग्यारह सितंबर की तारीख पक्की हो गई।
वैज्ञानिक अभियान और बाढ़ की विभीषिका
कथा का मुख्य केंद्र शिवसागर है। कहानी एक वैज्ञानिक दल के सफर का अनुसरण करती है जो शक्तिशाली ब्रह्मपुत्र नदी में आगे बढ़ता है और इसकी अप्रत्याशित धाराओं के बीच आने वाली मुश्किलों का सामना करता है। यह महाकाय नदी पर्दे पर एक तरफ जहां बेहद खूबसूरत और मनमोहक नजर आती है, वहीं दूसरी तरफ इसका आक्रामक रूप इंसानी सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा लेता है। इसके साथ ही पटकथा में बाढ़ की विवश करने वाली सच्चाई को भी समाहित किया गया है, जो स्थानीय निवासियों के जीवन को हर साल प्रभावित करती है।
डॉ भूपेन हजारिका से जुड़ाव और खास स्क्रीनिंग
निर्देशक ने यह भी स्पष्ट किया कि महाबाहु शब्द का सीधा जुड़ाव दिग्गज संगीतकार डॉ भूपेन हजारिका से है। फिल्म की पहली सार्वजनिक स्क्रीनिंग दिवंगत हजारिका की जयंती के खास अवसर पर आयोजित की गई थी। इस फिल्म को जुबीन गर्ग की मधुर आवाज से भी सजाया गया है, जिससे इसका संगीत और अधिक समृद्ध हो जाता है। पूरी टीम ने इसे एक नई और अनूठी शैली में गढ़ा है ताकि दर्शकों को कुछ अलग अनुभव मिल सके।
कलाकार और तकनीकी टीम
फिल्म में मुख्य अभिनेता के विपरीत प्रीति के कोंगाना ने मुख्य अभिनेत्री की भूमिका निभाई है। कलाकारों की इस सूची में जादुमोनी दत्ता, दिल्ली के एनएसडी से प्रशिक्षित रंगमंच कलाकार पालाश प्रातिम मेच, राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कलाकार सेवन सिंह येइन, प्रयास, गिगी प्रभात दत्ता, दियाश्री और पल्लवी गोहाई पाठक जैसे अनुभवी तथा नए कलाकार शामिल हैं। अभिनेत्री कोंगाना का कहना है कि यह फिल्म असम के लोगों की प्रमुख समस्याओं और हर साल आने वाली बाढ़ को प्रभावशाली तरीके से सामने लाती है।
फिल्म के निर्माण से जुड़े अन्य प्रमुख लोगों में निर्माता मोनूज सांगबुन फुकन शामिल हैं, जबकि प्रंजल प्रातिम चेटिया सह-निर्माता हैं। इसके अलावा बिद्युत कोंवार, आकाश दुवोरीज और हेमंत फुकन सहायक निर्माता के रूप में जुड़े हैं, और समीर दत्ता ने कार्यकारी निर्माता की भूमिका निभाई है।
संगीत और तकनीकी पक्ष
इस फिल्म का संगीत शंकुराज कोंवार, सव्वी सबरवाल और सुकुमार दत्ता ने मिलकर तैयार किया है। गानों में जुबीन गर्ग, दीपलिना डेका, शंकुराज कोंवार, पापोरी गोगोई, सीमांत शेखर और गरिमा क्रिस्टी जैसी बेहतरीन आवाज़ें सुनने को मिलेंगी, जबकि पृष्ठभूमि का संगीत सुकुमार दत्ता ने दिया है। चलचित्र का फिल्मांकन रिपु कश्यप और राजा गोगोई ने किया है, और संपादन की जिम्मेदारी तापोष फुकन ने संभाली है। नृत्य निर्देशन आशिम गोगोई और पवित्र बोराह का है।



















