असम के तिनसुकिया जिले में बच्चों के कंधों से भारी-भरकम बस्तों का बोझ कम करने के लिए प्रशासन पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बुधवार को जिले के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पहुंचकर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने न सिर्फ स्कूलों की व्यवस्थाओं को परखा, बल्कि खुद अपने हाथों से छात्रों के स्कूल बैग उठाकर उनके वजन की पड़ताल की ताकि यह पता चल सके कि तय किए गए मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
अधिकारियों की औचक कार्रवाई और निर्देश
यह पूरी कार्रवाई तिनसुकिया के स्कूल इंस्पेक्टर और जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देशों के बाद अमल में लाई गई है। इन निर्देशों में स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि सरकारी और निजी दोनों तरह के संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों पर अनावश्यक वजन न लादा जाए। इस मुहिम के तहत विभागीय टीमों ने स्कूलों के भीतर जाकर बच्चों के बस्तों की सघन जांच की और यह देखा कि कौन सा स्कूल नियमों का पालन कर रहा है और कौन लापरवाही बरत रहा है।
कक्षाओं के हिसाब से तय किए गए वजन के नियम
सरकार द्वारा तय किए गए नए मानकों के मुताबिक अलग-अलग कक्षाओं के लिए बस्ते की सीमा तय की गई है। पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों के लिए बैग का अधिकतम वजन डेढ़ किलोग्राम यानी 1.5 किलोग्राम तय किया गया है। इसके अलावा कक्षा तीन से पांच तक के विद्यार्थियों के लिए यह सीमा दो किलोग्राम से तीन किलोग्राम के बीच रखी गई है।
जैसे-जैसे कक्षाएं बढ़ती हैं, वजन की सीमा में भी आंशिक छूट दी गई है लेकिन उसकी एक निश्चित अधिकतम सीमा है। कक्षा छह और सात के छात्रों के बस्ते का वजन चार किलोग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए। कक्षा आठ और नौ के लिए इसे साढ़े चार किलोग्राम यानी 4.5 किलोग्राम तय किया गया है, जबकि दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए बैग का अधिकतम वजन पांच किलोग्राम निर्धारित किया गया है।
स्वास्थ्य सुरक्षा और आगे की निगरानी
शिक्षा विभाग का कहना है कि यह सख्त कदम विद्यार्थियों के शारीरिक स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। छोटे बच्चों की नाजुक हड्डियों और रीढ़ की हड्डी पर भारी बैग का बुरा असर पड़ता है, जिसे रोकने के लिए यह पहल की गई है। संस्थानों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों को तय सीमा से अधिक किताबें या अन्य सामग्री स्कूल लाने के लिए बाध्य न करें।
तिनसुकिया के स्कूल इंस्पेक्टर मदन पेगु ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस पूरी जांच का मुख्य मकसद यह सत्यापित करना था कि शिक्षण संस्थान बस्ते के वजन को लेकर बनाए गए नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं या नहीं। विभाग की तरफ से यह भी हिदायत दी गई है कि स्कूल प्रबंधन को नियमित रूप से छात्रों के बस्तों की जांच करनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बच्चे कोई भी अनावश्यक किताब, कॉपी या अन्य सामान स्कूल न लेकर आएं।


















