दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में सीएनजी चालित गाड़ियां चलाने वाले ड्राइवरों के लिए ईंधन भरवाना अब पहले की तुलना में अधिक कड़ा हो गया है। गैस वितरण कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने अपने नेटवर्क के सभी सीएनजी स्टेशनों को दो महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच अनिवार्य करने का कड़ा निर्देश जारी किया है। नए सुरक्षा प्रोटोकॉल के मुताबिक, जब तक वाहन चालक अपनी वैध कंप्लायंस प्लेट और सिलेंडर का आधिकारिक हाइड्रो टेस्ट सर्टिफिकेट नहीं दिखाएंगे, तब तक किसी भी वाहन के टैंक में गैस नहीं भरी जाएगी।
टिकरी कलां हादसे के बाद लिया गया कड़ा फैसला
सुरक्षा नियमों में इस बड़े बदलाव की मुख्य वजह टिकरी कलां क्षेत्र में हुई एक गंभीर दुर्घटना है। टिकरी कलां स्थित एक सीएनजी स्टेशन पर वाहन और पंप के बीच हुए हादसे के फौरन बाद इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने पूरे नेटवर्क में सिलेंडर सुरक्षा मानकों की विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी थी। जमीनी स्तर पर हुई इस पड़ताल के दौरान कई वाहनों में लगी कंप्लायंस प्लेटें या तो एक्सपायर पाई गईं या फिर अवैध निकलीं। पूर्व में पंप कर्मचारी केवल गाड़ी पर लगी प्लेट देखकर गैस भर दिया करते थे, लेकिन अब किसी भी संभावित खतरे को टालने के लिए वास्तविक कागजी रिकॉर्ड और हाइड्रो टेस्ट सर्टिफिकेट की मौके पर पुष्टि को अनिवार्य बना दिया गया है।
पंपों पर औचक निरीक्षण और छह स्टेशनों पर कार्रवाई
नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के लिए कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी खुद अलग-अलग सीएनजी पंपों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। इन औचक दौरों में देखा जा रहा है कि पंप कर्मी हर गाड़ी के दोनों दस्तावेजों की गहन जांच कर रहे हैं या नहीं। लापरवाही बरतने और बिना पूरे सत्यापन के गैस देने के आरोप में अब तक करीब छह पंपों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई भी की जा चुकी है। हालांकि, जांच प्रक्रिया सख्त होने से पंपों पर ईंधन भरने में पहले से ज्यादा समय लग रहा है, जिसके चलते कई स्टेशनों पर वाहन चालकों और कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है।
क्या होता है हाइड्रो टेस्ट और यह क्यों जरूरी है
सीएनजी सिलेंडर का हाइड्रो टेस्ट मूल रूप से उसकी मजबूती, धातु की उम्र और दबाव झेलने की क्षमता को मापने की एक वैज्ञानिक सुरक्षा जांच है। इस तकनीकी प्रक्रिया में सिलेंडर के भीतर अत्यधिक उच्च दबाव डालकर यह देखा जाता है कि उसमें कोई सूक्ष्म लीकेज, दरार या संरचनात्मक कमजोरी तो नहीं है। जब सिलेंडर इस कड़े परीक्षण में पूरी तरह खरा उतरता है, तभी अधिकृत एजेंसी वाहन पर वैध कंप्लायंस प्लेट लगाती है और वाहन मालिक को अधिकृत टेस्ट सर्टिफिकेट जारी करती है।
वाहन चालकों को यह ध्यान रखना होगा कि सीएनजी सिलेंडर का कराया गया हाइड्रो टेस्ट केवल तीन साल की अवधि के लिए ही वैध माना जाता है। तीन साल पूरे होने के बाद सिलेंडर की दोबारा अधिकृत केंद्र से टेस्टिंग करानी होती है। यदि सर्टिफिकेट की तीन वर्ष की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है या प्लेट पर दर्ज तारीख पुरानी है, तो पंप संचालक सीधे तौर पर गैस देने से मना कर देंगे। इस पूरी कवायद का मकसद दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रहे गैस सिलेंडरों को पूरी तरह सुरक्षित और हादसों से मुक्त बनाना है।



















